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अखिलेश-रामगोपाल पर बरसे विधायक आशीष
Amar Ujala
Updated Tue, 03 Jan 2017 12:16 AM IST
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विधायक आशीष
- फोटो : Amar Ujala
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सदर विधायक आशीष यादव ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव का सपा का सबसे बड़ा गद्दार और पार्टी खत्म करने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के माफी मांगने पर उनकी व प्रोफेसर की बर्खास्तगी वापस हुई थी और अधिवेशन का नाम बदलकर कार्यकर्ता सम्मेलन करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन रामगोपाल ने मुख्यमंत्री को भड़का कर पार्टी को खत्म करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अधिवेशन असंवैधानिक था। जो प्रत्याशी अधिवेशन में गए थे वे दोगले हैं और उनके नाम प्रत्याशी की सूची से काट कर नेताजी दो चार दिन में 201 प्रत्याशियों की नई सूची जारी करेंगे।
गांधी मार्केट स्थित आवास पर प्रेस वार्ता में सदर विधायक आशीष यादव ने कहा अब समझौता केवल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर होगा, रामगोपाल यादव पर कोई समझौता नहीं होगा। प्रोफेसर को पार्टी में वापस लेना नेताजी की सबसे बड़ी भूल थी। चुनाव आयोग ने नेताजी पक्ष को बुलाया है, रामगोपाल यादव अपना सिंबल पास कराने आयोग गए हैं। साइकिल चुनाव चिह्न नेताजी का है और रहेगा। विधायक ने कहा कि अधिवेशन बुलाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को संसदीय बोर्ड का 40 प्रतिशत समर्थन होना जरूरी है। मुख्यमंत्री के अधिवेशन में सिर्फ दो सदस्य थे। सदर विधायक यहीं नहीं रुके बोले रामगोपाल यादव ने सत्ता का दुरुपयोग कर पुलिस मदद एवं गुंडागर्दी के बल पर नेताजी और शिवपाल यादव के नेम प्लेट उखाड़ कर प्रदेश अध्यक्ष कार्यालय पर कब्जा किया।
मुख्यमंत्री ने पुत्रधर्म नहीं निभाया
सदर विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश ने पुत्र धर्म नहीं निभाया, नेताजी ने अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया था। बोले अखिलेश यादव के असंवैधानिक मंच पर पार्टी से निकाले गए नेता, प्रदेश भर के गुंडे, अपराधी और माफिया मौजूद थे। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि प्रदेश अध्यक्ष बदलने के एक घंटे में प्रदेश कार्यालय पर कब्जा किया गया हो। बोले अब चुनाव आयोग तय करेगा कि साइकिल चुनाव चिह्न किसके पास रहेगा।
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अखिलेश ने नेताजी से जबरन छीनी कुर्सी
सदर विधायक ने कहा कि नेताजी मुलायम सिंह यादव ने अपनी कुर्सी अखिलेश यादव को देकर सीएम बनाया, लेकिन जबरन कुर्सी छीन ली गई। संसदीय बोर्ड के 40 सदस्यों ने नेताजी के पक्ष में हस्ताक्षर किए हैं। राज्यसभा सासद नरेश अग्रवाल को दल बदलू बताते हुए कहा कि वे सत्ता का सुख लेने वाले नेता है। नेताजी ने 11 बजे बैठक बुलाई, लेकिन सीएम ने सुबह नौ बजे बैठक शुरू कर आने नहीं ही दिया।
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गांधी मार्केट स्थित आवास पर प्रेस वार्ता में सदर विधायक आशीष यादव ने कहा अब समझौता केवल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर होगा, रामगोपाल यादव पर कोई समझौता नहीं होगा। प्रोफेसर को पार्टी में वापस लेना नेताजी की सबसे बड़ी भूल थी। चुनाव आयोग ने नेताजी पक्ष को बुलाया है, रामगोपाल यादव अपना सिंबल पास कराने आयोग गए हैं। साइकिल चुनाव चिह्न नेताजी का है और रहेगा। विधायक ने कहा कि अधिवेशन बुलाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को संसदीय बोर्ड का 40 प्रतिशत समर्थन होना जरूरी है। मुख्यमंत्री के अधिवेशन में सिर्फ दो सदस्य थे। सदर विधायक यहीं नहीं रुके बोले रामगोपाल यादव ने सत्ता का दुरुपयोग कर पुलिस मदद एवं गुंडागर्दी के बल पर नेताजी और शिवपाल यादव के नेम प्लेट उखाड़ कर प्रदेश अध्यक्ष कार्यालय पर कब्जा किया।
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मुख्यमंत्री ने पुत्रधर्म नहीं निभाया
सदर विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश ने पुत्र धर्म नहीं निभाया, नेताजी ने अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया था। बोले अखिलेश यादव के असंवैधानिक मंच पर पार्टी से निकाले गए नेता, प्रदेश भर के गुंडे, अपराधी और माफिया मौजूद थे। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि प्रदेश अध्यक्ष बदलने के एक घंटे में प्रदेश कार्यालय पर कब्जा किया गया हो। बोले अब चुनाव आयोग तय करेगा कि साइकिल चुनाव चिह्न किसके पास रहेगा।
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अखिलेश ने नेताजी से जबरन छीनी कुर्सी
सदर विधायक ने कहा कि नेताजी मुलायम सिंह यादव ने अपनी कुर्सी अखिलेश यादव को देकर सीएम बनाया, लेकिन जबरन कुर्सी छीन ली गई। संसदीय बोर्ड के 40 सदस्यों ने नेताजी के पक्ष में हस्ताक्षर किए हैं। राज्यसभा सासद नरेश अग्रवाल को दल बदलू बताते हुए कहा कि वे सत्ता का सुख लेने वाले नेता है। नेताजी ने 11 बजे बैठक बुलाई, लेकिन सीएम ने सुबह नौ बजे बैठक शुरू कर आने नहीं ही दिया।