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पुलिस के पहरे में लगी किनौनी में पैंठ
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Dec 2016 11:42 PM IST
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खादर में खूनी संघर्ष
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सुन्नगढ़ी की खादर में जमीन को लेकर चार दिन पहले हुए खूनी संघर्ष की तपिश तो यहां के वाश्ंिादों में बरसों बनी रहेगी। घटना में किलौनी, किसौल के पांच लोगों की हत्या हो गई थी। तब से इलाके में दहशत है। किसान, मजदूरों का जीवन ठहर सा गया है। चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात है। इन्हीं खाकी के साए में लोगों की दिनचर्या चल रही है। गली, खेत-खलिहान, बाजार में भी पुलिस, पीएसी के जवान घूमते दिखे।
खादर में शनिवार को हुए खूनी संघर्ष में किलौनी के तीन और किसौल के दो लोगों की की मौत हो गई। रूह कंपा देने वाली इस वारदात से दोनों गांव के लोग सहमे हैं। जेहन में तमाम आशंकाएं बनी हैं। दोनों गांव छावनी बने हुए हैं। दु:ख-दहशत में दो दिनों तक तो लोगों के घरों में चूल्हे नहीं जले। घरों से निकलने में लोग डरते रहे। स्कूल, खेत-खलिहान, पैठ में सन्नाटा सा पसरा हुआ था। सिर्फ पुलिस-पीएसी के जवान ही दिख रहे थे। सोमवार से गांव में जनप्रतिनिधियों के आने के बाद से लोगों के जेहन से डर कुछ कम हुआ है। इससे घटना के चौथे दिन ग्रामीण खेत-खलिहान की ओर गए। पशुओं के लिए चारे आदि के इंतजाम में जुटे। बच्चों को भी स्कूल भेजा गया। इतना ही नहीं गांव में लगने वाली पैठ भी लगी। भले ही पैठ में दुकानदार, खरीदारों से ज्यादा पुलिस और पीएसी के सिपाही घूमते दिखे। किसौल के चोब सिंह, सुन्नगढ़ी के धनपाल ने बताया कि हर आदमी को मौतों का दु:ख है, लेकिन काम काज तो करना है।
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अस्पताल-स्कूल खुले
गंगा खादर की जमीन पर कब्जे को लेकर हुई दिल दहलाने वाली घटना के बाद से दहशत में बंद स्कूल और अस्पताल भी मंगलवार को खुले। बता दें कि किसौल और किलौनी दोनों गांव के ज्यादातर बच्चे प्राथमिक स्कूल नगला धाव में पढ़ते हैं। प्राथमिक विद्यालय किसौल किलौनी में भी छात्र-छात्राएं दिखे। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी एएनएम मौजूद रहीं। गन्ना केंद्र पर भी कुछ किसान तौल करा रहे थे। गांव के रहने वाले लकी, जगदीश और राजेश्वर ने बताया कि बच्चों को स्कूल भेजा गया है।
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खादर में शनिवार को हुए खूनी संघर्ष में किलौनी के तीन और किसौल के दो लोगों की की मौत हो गई। रूह कंपा देने वाली इस वारदात से दोनों गांव के लोग सहमे हैं। जेहन में तमाम आशंकाएं बनी हैं। दोनों गांव छावनी बने हुए हैं। दु:ख-दहशत में दो दिनों तक तो लोगों के घरों में चूल्हे नहीं जले। घरों से निकलने में लोग डरते रहे। स्कूल, खेत-खलिहान, पैठ में सन्नाटा सा पसरा हुआ था। सिर्फ पुलिस-पीएसी के जवान ही दिख रहे थे। सोमवार से गांव में जनप्रतिनिधियों के आने के बाद से लोगों के जेहन से डर कुछ कम हुआ है। इससे घटना के चौथे दिन ग्रामीण खेत-खलिहान की ओर गए। पशुओं के लिए चारे आदि के इंतजाम में जुटे। बच्चों को भी स्कूल भेजा गया। इतना ही नहीं गांव में लगने वाली पैठ भी लगी। भले ही पैठ में दुकानदार, खरीदारों से ज्यादा पुलिस और पीएसी के सिपाही घूमते दिखे। किसौल के चोब सिंह, सुन्नगढ़ी के धनपाल ने बताया कि हर आदमी को मौतों का दु:ख है, लेकिन काम काज तो करना है।
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अस्पताल-स्कूल खुले
गंगा खादर की जमीन पर कब्जे को लेकर हुई दिल दहलाने वाली घटना के बाद से दहशत में बंद स्कूल और अस्पताल भी मंगलवार को खुले। बता दें कि किसौल और किलौनी दोनों गांव के ज्यादातर बच्चे प्राथमिक स्कूल नगला धाव में पढ़ते हैं। प्राथमिक विद्यालय किसौल किलौनी में भी छात्र-छात्राएं दिखे। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी एएनएम मौजूद रहीं। गन्ना केंद्र पर भी कुछ किसान तौल करा रहे थे। गांव के रहने वाले लकी, जगदीश और राजेश्वर ने बताया कि बच्चों को स्कूल भेजा गया है।
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