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प्रतिभाएं हैं, जरूरत सिर्फ ‘गोपी’ की
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Sun, 28 Aug 2016 11:53 PM IST
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खेल दिवस पर विशेष
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रियो ओलंपिक बीत चुका है। भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन और बैंडमिंटन में सिंधू के चमचमाते चांदी के मेडल ने दिखाया कि सफलता के लिए ‘कोच’ कितना अहम है। जिले में भी खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। बस उन्हें तराशने के लिए पुलेला गोपीचंद जैसे प्रशिक्षक की जरूरत है। पर, आलम यह है कि यहां सब कुछ अनदेखी का शिकार है। जिला स्टेडियम में ही बदहाल मैदान के साथ प्रशिक्षक की कमी है।
आज हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती है। इसे पूरे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया गया। जयंती पर प्रतिवर्ष जिम्मेदार बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन खेल प्रतिभाओं को निखारने के प्रयास सिर्फ कागजों तक सिमटे रहते हैं। देखें तो जिले में हॉकी समेत अन्य खेलों के नाम पर सिर्फ विभागीय कोरम पूरा हो रहा है। स्टेडियम की इमारत दरक चुकी है, मैदान में बड़ी-बड़ी घासें हैं। जबकि यहां विभिन्न खेलों में 105 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें क्रिकेट में 42, भारोत्तोलन में 30 और वॉलीबाल में 33 खिलाड़ी पंजीकृत हैं। वहीं हॉकी समेत अन्य खेलों में कोच की कमी से कोई पंजीकरण नहीं हुआ है।
हॉकी
जिला खेल विभाग हर साल राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर हॉकी प्रतियोगिता कराता है, लेकिन जिला स्तर पर एक भी पंजीकृत हॉकी टीम नहीं है। स्टेडियम में खेलने की पर्याप्त सुविधा और कोच न होने से खिलाड़ियों की प्रतिभा नहीं निखर रही है।
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बैडमिंटन
स्टेडियम में बैडमिंटन कोर्ट है। पर, नेट जर्जर पड़ा है। सुबह-शाम जो खिलाड़ी यहां खेलते भी , वे भी इसे शौकिया ही लेते हैं। प्रशिक्षक न होने के कारण पंजीकरण शून्य है।
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एथलेटिक्स
दौड़, कूद और अन्य खेलों के लिए स्टेडियम का हाल बेहद खराब है। जिले के किसी भी एथलीट का स्टेडियम में पंजीकरण नहीं है। ज्यादातर एथलीट स्कूल स्तर पर तैयारी कर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं।
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कुश्ती
जिले में पहलवानी और कुश्ती के शौकीनों की संख्या कम नहीं है, लेकिन जिले में एक भी पहलवान का पंजीकरण नहीं है। स्टेडियम में कुश्ती के लिए न तो कोई सुविधा है और न ही कोई मैदान।
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फुटबॉल
जिले में फुटबाल को लेकर खिलाड़ियों में खासा रुझान है। जिला फुटबाल संघ की बदौलत जिले की टीम ने सैफई तक सुब्रतो कप में डंका बजाया है, लेकिन जिला खेल विभाग की ओर से प्रोत्साहन की कोई पहल नहीं हुई।
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बास्केट बाल और जिम भी बदहाल
स्टेडियम के बास्केटबाल कोर्ट में लगे पोल से बास्केट गायब है। इसके साथ ही स्टेडियम की जिम में भी हालात खराब हैं। गेट टूटा पड़ा है। मशीनें ठीक से काम नहीं करती हैं। प्रशिक्षक न होने से खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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कहते हैं अधिकारी
जिले में स्टेडियम में व्यवस्थाओं को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही सुविधाओं के साथ प्रशिक्षकों की तैनाती का प्रयास किया जा रहा है।
दीपक दीक्षित, जिला क्रीड़ाधिकारी
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आज हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती है। इसे पूरे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया गया। जयंती पर प्रतिवर्ष जिम्मेदार बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन खेल प्रतिभाओं को निखारने के प्रयास सिर्फ कागजों तक सिमटे रहते हैं। देखें तो जिले में हॉकी समेत अन्य खेलों के नाम पर सिर्फ विभागीय कोरम पूरा हो रहा है। स्टेडियम की इमारत दरक चुकी है, मैदान में बड़ी-बड़ी घासें हैं। जबकि यहां विभिन्न खेलों में 105 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें क्रिकेट में 42, भारोत्तोलन में 30 और वॉलीबाल में 33 खिलाड़ी पंजीकृत हैं। वहीं हॉकी समेत अन्य खेलों में कोच की कमी से कोई पंजीकरण नहीं हुआ है।
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हॉकी
जिला खेल विभाग हर साल राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर हॉकी प्रतियोगिता कराता है, लेकिन जिला स्तर पर एक भी पंजीकृत हॉकी टीम नहीं है। स्टेडियम में खेलने की पर्याप्त सुविधा और कोच न होने से खिलाड़ियों की प्रतिभा नहीं निखर रही है।
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बैडमिंटन
स्टेडियम में बैडमिंटन कोर्ट है। पर, नेट जर्जर पड़ा है। सुबह-शाम जो खिलाड़ी यहां खेलते भी , वे भी इसे शौकिया ही लेते हैं। प्रशिक्षक न होने के कारण पंजीकरण शून्य है।
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एथलेटिक्स
दौड़, कूद और अन्य खेलों के लिए स्टेडियम का हाल बेहद खराब है। जिले के किसी भी एथलीट का स्टेडियम में पंजीकरण नहीं है। ज्यादातर एथलीट स्कूल स्तर पर तैयारी कर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं।
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कुश्ती
जिले में पहलवानी और कुश्ती के शौकीनों की संख्या कम नहीं है, लेकिन जिले में एक भी पहलवान का पंजीकरण नहीं है। स्टेडियम में कुश्ती के लिए न तो कोई सुविधा है और न ही कोई मैदान।
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फुटबॉल
जिले में फुटबाल को लेकर खिलाड़ियों में खासा रुझान है। जिला फुटबाल संघ की बदौलत जिले की टीम ने सैफई तक सुब्रतो कप में डंका बजाया है, लेकिन जिला खेल विभाग की ओर से प्रोत्साहन की कोई पहल नहीं हुई।
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बास्केट बाल और जिम भी बदहाल
स्टेडियम के बास्केटबाल कोर्ट में लगे पोल से बास्केट गायब है। इसके साथ ही स्टेडियम की जिम में भी हालात खराब हैं। गेट टूटा पड़ा है। मशीनें ठीक से काम नहीं करती हैं। प्रशिक्षक न होने से खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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कहते हैं अधिकारी
जिले में स्टेडियम में व्यवस्थाओं को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही सुविधाओं के साथ प्रशिक्षकों की तैनाती का प्रयास किया जा रहा है।
दीपक दीक्षित, जिला क्रीड़ाधिकारी