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शुद्ध पानी के अभाव में दिव्यांग होते जा रहे लोग
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शहीद पार्क में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद दिव्यांग- संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। सावधान, भारत में भले ही पोलियो का अंत हो गया हो पर जिले का पानी लोगों को अपंग बना रहा है। जरा सी असावधानी आपके पाल्य को जीवन भर के लिए दिव्यांग बना सकती है। पानी में फ्लोराइड, क्लोराइड, हार्डनेस, आयरन और नाइट्रेट आदि तत्वों के कारण बच्चों के हाथ-पैरों में पतला पन सहित अन्य शारीरिक बीमारियां जन्म ले रही हैं। फिलहाल जलेसर, अवागढ़ और निधौलीकलां क्षेत्र में चिंतनीय स्थिति है। हालांकि शासन को इसकी चिंता सता रही है। उसने स्वच्छ, साफ और मीठा पेयजल ग्रामीणों को उपलब्ध कराने के लिए इन क्षेत्रों में करीब तीन सौ टीटीएसपी टंकी लगाने का काम जल निगम को सौंपा है।
जलेसर तहसील के अवागढ़, निधौलीकलां और उससे सटे गांव निधौली खुर्द, फफोतू, चमकरी, ऊंचागांव, जवां, काजीपुर, बदनपुर, ओसमा, नगला मीरा सहित तीन सैकड़ा गांव हैं जहां का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। यहां जल निगम द्वारा कराई जाने वाली बोरिंग के दौरान जब पानी की लैब में जांच की गई तो पानी में डीडीएस की मात्रा जो पांच सौ से एक हजार के आसपास होनी चाहिए वह बढ़कर दो से चार हजार तक पहुंच गई है। ऐसे में यहां का पानी पीने लायक नहीं रह गया है।
नहीं जानते दुष्प्रभाव
प्लोराइड युक्त पानी का न तो रंग बदलता है और न ही उसके स्वाद में कोई फर्क आता है, ऐसे में लोग इस पानी को अक्सर घरों में इस्तेलाम करते हैं, बिना यह जाने कि यह उनके स्वास्थ्य पर कितना विपरीत असर डाल रहा है।
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लग रहीं टीटीएसपी
लोगों को वर्षों तक यह पता ही नहीं चल पाया कि वह जो पानी पी रहे हैं वह उन्हें और बच्चों को दिव्यांग बना रहा है। जल निगम ने जब पानी की जांच की और स्थिति को विस्फोटक पाया तो मीठे पानी की व्यवस्था के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा, जिसे स्वीकृत कर धनराशि मंजूर कर ली गई है, इसी धनराशि से इन दिनों करीब 300 सौ गांवों में टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट का निर्माण कराया जा रहा है, इसमें अब तक पक्की सीमेंटेड टंकी बनती थी पर अब प्लास्टिक की टंकी रखवाई जा रही है, जिससे उसकी सफाई समय पर होती रहे।
यह हो रहीं बीमारियां
दंतीय फ़्लोरोसिस: इस रोग में व्यक्ति के दांतों में पीलापन या अधिक सफेदपन, भूरे या काले धब्बे पड़ जाते हैं और दांत झड़ने लगते हैं।
-कंकालीय फ्लोरोसिस: इस रोग में व्यक्ति के हाथ-पैरों में पतलापन, टेड़ापन सहित अन्य प्रकार की विकृतियां पैैदा हो जाती हैं, जिसे अक्सर लोग पोलियो समझ लेते हैं।
ऐसे करें जांच
सिक्का जांच: जमीन पर सिक्का पटक दें, यदि व्यक्ति घुटनों को बिना मोड़े सिक्का न उठा पाए तो वह बीमारी की गिरफ्त में है।
ठोड़ी जांच: कोई व्यक्ति यदि अपनी ठोड़ी को छाती से नहीं चिपका पाए तो मान लिया जाता है कि वह भी इस बीमारी से ग्रसित है।
हाथ पसार:-दोनों हाथों को खोलकर सिर के पीछे लगाया जाता है, यदि आदमी आसानी से यह कर लेता है तो वह बीमारी से ग्रसित नहीं है।
नहीं लगे हैंडपंपों पर निशान
सरकार का आदेश है कि फ्लोराइड युक्त पानी देने वाले हैंडपंपों पर लाल रंग का निशान लगाया जाए, जिससे उस पानी को लोग न पियें, जबकि पीने युक्त पानी देने वाले हैंडपंप पर नीला निशान लगाया जाए। जिले में किसी हैंडपंप पर इस तरह का निशान नहीं लगाया जा रहा है।
यह कर सकते हैं सेवन
विटामिन सी के लिए:- आंवला, नीबू, संतरा, टमाटर का सेवन करें।विटामिन ई के लिए:- वनस्पति तेल, सूखी मेवा, अनाज, दाल का सेवन करें।कैल्शियम के लिए:-दूू, दही, हरी और पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।एंटी ऑक्सीडेंट:-लहसुन, अदरक, प्याज, कद्दू आदि का सेवन करें।
बचाव ही उपचार
फ्लोराइड युक्त पानी पीने से होने वाली बीमारियों से बचाव का कोई अन्य उपाय नहीं है। इस पानी को उबालने से भी इसके तत्व नहीं जाते हैं। केवल यह तत्व तभी ही जाएंगे जब पानी को रिम्यूवल फिल्टर से गुजारा जाए।
कहां कितने दिव्यांग
अलीगंज में 1443, अवागढ़ में 878, जैथरा में 1274, जलेसर में 823, मारहरा में 1006, निधौली कलां में 1346, सकीट में 1408, शीतलपुर में 1779 दिव्यांग हैं। जबकि पूरे जिले में कुल- 99957 दिव्यांग हैं।
जलेसर तहसील क्षेत्र में पानी में फ्लोराइड और नाइट्रेट की मात्रा बहुत अधिक है। इस पानी को पीने से लोगों के शरीर में पतलापन और टेड़ापन, दातों में पीलापन और झड़ने सहित अन्य बीमारियां पनप रही हैं, इसी को देखते हुए इन गांवों में टीटीएसपी टंकी के माध्यम से पेयजल सप्लाई की जाएगी, करीब 300 गांवों में यह टंकी लगाई जा रही हैं।
कमल कुमार गुप्ता, जेई जल निगम
पोलियो तो अब भारत से लगभग समाप्त हो गया है। पानी में फ्लोराइड, क्लोराइड और नाइट्रेट आदि की अधिक मात्रा के चलते बीमारियां लोगों में पनपती हैं। अन्य सुदूर के जिलों में ऐसे पानी से बीमारियां प्रकाश में आती रही हैं, जिले में ऐसी स्थिति है यह बात अभी तक संज्ञान में नहीं आई है।
डॉ. आरएन जिंदल, हड्डी रोग विशेषज्ञ।
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जलेसर तहसील के अवागढ़, निधौलीकलां और उससे सटे गांव निधौली खुर्द, फफोतू, चमकरी, ऊंचागांव, जवां, काजीपुर, बदनपुर, ओसमा, नगला मीरा सहित तीन सैकड़ा गांव हैं जहां का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। यहां जल निगम द्वारा कराई जाने वाली बोरिंग के दौरान जब पानी की लैब में जांच की गई तो पानी में डीडीएस की मात्रा जो पांच सौ से एक हजार के आसपास होनी चाहिए वह बढ़कर दो से चार हजार तक पहुंच गई है। ऐसे में यहां का पानी पीने लायक नहीं रह गया है।
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प्लोराइड युक्त पानी का न तो रंग बदलता है और न ही उसके स्वाद में कोई फर्क आता है, ऐसे में लोग इस पानी को अक्सर घरों में इस्तेलाम करते हैं, बिना यह जाने कि यह उनके स्वास्थ्य पर कितना विपरीत असर डाल रहा है।
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लग रहीं टीटीएसपी
लोगों को वर्षों तक यह पता ही नहीं चल पाया कि वह जो पानी पी रहे हैं वह उन्हें और बच्चों को दिव्यांग बना रहा है। जल निगम ने जब पानी की जांच की और स्थिति को विस्फोटक पाया तो मीठे पानी की व्यवस्था के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा, जिसे स्वीकृत कर धनराशि मंजूर कर ली गई है, इसी धनराशि से इन दिनों करीब 300 सौ गांवों में टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट का निर्माण कराया जा रहा है, इसमें अब तक पक्की सीमेंटेड टंकी बनती थी पर अब प्लास्टिक की टंकी रखवाई जा रही है, जिससे उसकी सफाई समय पर होती रहे।
यह हो रहीं बीमारियां
दंतीय फ़्लोरोसिस: इस रोग में व्यक्ति के दांतों में पीलापन या अधिक सफेदपन, भूरे या काले धब्बे पड़ जाते हैं और दांत झड़ने लगते हैं।
-कंकालीय फ्लोरोसिस: इस रोग में व्यक्ति के हाथ-पैरों में पतलापन, टेड़ापन सहित अन्य प्रकार की विकृतियां पैैदा हो जाती हैं, जिसे अक्सर लोग पोलियो समझ लेते हैं।
ऐसे करें जांच
सिक्का जांच: जमीन पर सिक्का पटक दें, यदि व्यक्ति घुटनों को बिना मोड़े सिक्का न उठा पाए तो वह बीमारी की गिरफ्त में है।
ठोड़ी जांच: कोई व्यक्ति यदि अपनी ठोड़ी को छाती से नहीं चिपका पाए तो मान लिया जाता है कि वह भी इस बीमारी से ग्रसित है।
हाथ पसार:-दोनों हाथों को खोलकर सिर के पीछे लगाया जाता है, यदि आदमी आसानी से यह कर लेता है तो वह बीमारी से ग्रसित नहीं है।
नहीं लगे हैंडपंपों पर निशान
सरकार का आदेश है कि फ्लोराइड युक्त पानी देने वाले हैंडपंपों पर लाल रंग का निशान लगाया जाए, जिससे उस पानी को लोग न पियें, जबकि पीने युक्त पानी देने वाले हैंडपंप पर नीला निशान लगाया जाए। जिले में किसी हैंडपंप पर इस तरह का निशान नहीं लगाया जा रहा है।
यह कर सकते हैं सेवन
विटामिन सी के लिए:- आंवला, नीबू, संतरा, टमाटर का सेवन करें।विटामिन ई के लिए:- वनस्पति तेल, सूखी मेवा, अनाज, दाल का सेवन करें।कैल्शियम के लिए:-दूू, दही, हरी और पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।एंटी ऑक्सीडेंट:-लहसुन, अदरक, प्याज, कद्दू आदि का सेवन करें।
बचाव ही उपचार
फ्लोराइड युक्त पानी पीने से होने वाली बीमारियों से बचाव का कोई अन्य उपाय नहीं है। इस पानी को उबालने से भी इसके तत्व नहीं जाते हैं। केवल यह तत्व तभी ही जाएंगे जब पानी को रिम्यूवल फिल्टर से गुजारा जाए।
कहां कितने दिव्यांग
अलीगंज में 1443, अवागढ़ में 878, जैथरा में 1274, जलेसर में 823, मारहरा में 1006, निधौली कलां में 1346, सकीट में 1408, शीतलपुर में 1779 दिव्यांग हैं। जबकि पूरे जिले में कुल- 99957 दिव्यांग हैं।
जलेसर तहसील क्षेत्र में पानी में फ्लोराइड और नाइट्रेट की मात्रा बहुत अधिक है। इस पानी को पीने से लोगों के शरीर में पतलापन और टेड़ापन, दातों में पीलापन और झड़ने सहित अन्य बीमारियां पनप रही हैं, इसी को देखते हुए इन गांवों में टीटीएसपी टंकी के माध्यम से पेयजल सप्लाई की जाएगी, करीब 300 गांवों में यह टंकी लगाई जा रही हैं।
कमल कुमार गुप्ता, जेई जल निगम
पोलियो तो अब भारत से लगभग समाप्त हो गया है। पानी में फ्लोराइड, क्लोराइड और नाइट्रेट आदि की अधिक मात्रा के चलते बीमारियां लोगों में पनपती हैं। अन्य सुदूर के जिलों में ऐसे पानी से बीमारियां प्रकाश में आती रही हैं, जिले में ऐसी स्थिति है यह बात अभी तक संज्ञान में नहीं आई है।
डॉ. आरएन जिंदल, हड्डी रोग विशेषज्ञ।