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135 समूहाें में से 26 को ही मिला आरएफ फंड
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Sun, 01 Mar 2015 11:08 PM IST
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एनआरएलएम योजना मखौल बनकर रह गई है। 135 समूहों में से केवल 26 को ही आरएफ फंड मिला है। वहीं, बैंकों ने दो वर्ष में एक को भी ऋण स्वीकृत नहीं किया है। इसके चलते समूह चल नहीं पा रहे हैं। संचालक बैंकों के चक्कर काटकर परेशान हैं।
विकास खंड मारहरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गरीबों के स्तर को उठाने के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन कराया गया जिससे कि समूह से मिलने वाले रिवाल्विंग फंड और कम ब्याज पर दिए जाने वाले धन का उपयोग कर गरीबों का स्तर उठ सके, लेकिन यह योजना केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है। वित्तीय वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 में कुल गठित समूहों के आधे भी खाते बैंकों द्वारा नहीं खाले गए हैं। जिन समूहों के खाते खोल भी दिए गए उनको बीसीएल की श्रेणी में नही आने के कारण ऋण वितरण नहीं हो रहा है। समूहों को लाभ न मिलने के कारण आधे समूह टूटने की कगार पर खडे़ हैं।
विकास खंड में 135 समूहों का हुआ गठन
मारहरा। वर्ष 2013-14 में 90 समूहों और 2014-15 में 45 कुल 135 समूहों का विकास खंड में गठन किया गया। इसमें एक समूह को शुरू किए जाने पर 15 हजार रुपया रिवाल्विंग फंड के रूप में सरकार देती है, लेकिन बैंकों द्वारा समूह को बीसीएल के मानकों में व्यवधान डाले जाने के कारण आरएफ फंड केवल 26 को ही मिल पाया है। वहीं बैंक द्वारा देय ऋण पर सात प्रतिशत ब्याज समूह एवं पांच प्रतिशत ब्याज सरकार द्वारा वहन की जाती है।
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बैंकों के असहयोग के चलते गठित किए गए समूह टूटते जा रहे हैं और लोगों का समूहों से मोहभंग होता जा रहा है। जब तक समूह संचालन में बैंक सहयोग नहीं करेंगे तब तक यह योजना सफल नहीं होगी।
- रघुवीर सिंह यादव, प्रभारी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मारहरा, एटा।
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विकास खंड मारहरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गरीबों के स्तर को उठाने के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन कराया गया जिससे कि समूह से मिलने वाले रिवाल्विंग फंड और कम ब्याज पर दिए जाने वाले धन का उपयोग कर गरीबों का स्तर उठ सके, लेकिन यह योजना केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है। वित्तीय वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 में कुल गठित समूहों के आधे भी खाते बैंकों द्वारा नहीं खाले गए हैं। जिन समूहों के खाते खोल भी दिए गए उनको बीसीएल की श्रेणी में नही आने के कारण ऋण वितरण नहीं हो रहा है। समूहों को लाभ न मिलने के कारण आधे समूह टूटने की कगार पर खडे़ हैं।
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विकास खंड में 135 समूहों का हुआ गठन
मारहरा। वर्ष 2013-14 में 90 समूहों और 2014-15 में 45 कुल 135 समूहों का विकास खंड में गठन किया गया। इसमें एक समूह को शुरू किए जाने पर 15 हजार रुपया रिवाल्विंग फंड के रूप में सरकार देती है, लेकिन बैंकों द्वारा समूह को बीसीएल के मानकों में व्यवधान डाले जाने के कारण आरएफ फंड केवल 26 को ही मिल पाया है। वहीं बैंक द्वारा देय ऋण पर सात प्रतिशत ब्याज समूह एवं पांच प्रतिशत ब्याज सरकार द्वारा वहन की जाती है।
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बैंकों के असहयोग के चलते गठित किए गए समूह टूटते जा रहे हैं और लोगों का समूहों से मोहभंग होता जा रहा है। जब तक समूह संचालन में बैंक सहयोग नहीं करेंगे तब तक यह योजना सफल नहीं होगी।
- रघुवीर सिंह यादव, प्रभारी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मारहरा, एटा।