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ओमिक्रॉन: यात्रियों की हो रही सैंपलिंग
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रोडवेज बस में कोरोना जांच के लिए सैंपलिंग करते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ।संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की आशंका को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। खासतौर से बाहर से आने वाले लोगों की जांच पर जोर दिया जा रहा है। बस स्टैंड पर ही तीन टीमें लगाकर रोडवेज बसों में सफर करने वाले लोगों के सैंपल लेकर जांच को भेजे जा रहे हैं।
शहर में सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाका रोडवेज बस स्टैंड को माना जा रहा है। यहां पर रोजाना ही बड़ी संख्या में बाहर के यात्री पहुंचते हैं। इनकी निगरानी और सैंपलिंग कराने के लिए तीन स्वास्थ्य टीमों को लगाया गया है। इनमें दो नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट वैन और एक अन्य टीम को शामिल किया है। तीनों टीमों को हिदायत दी गई है कि बसों से उतरने वाला एक भी यात्री बिना सैंपलिंग के नहीं जाना चाहिए। यहां प्रतिदिन 300 के करीब लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं।
आठों ब्लॉकों में भी कराई जा रही सैंपलिंग
आठों ब्लॉकों में दो-दो सैंपल सेंटर बनाए गए हैं। सैंपलों को जिलास्तर पर एकत्रित कर आगरा स्थित सेंट्रल जालमा इंस्टीट्यूट ऑफ लेप्रोसी को भेजकर जांच कराई जा रही है।
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आरटीपीसीआर लैब में हो रही 100 जांचें
मेडिकल कॉलेज में संचालित की जा रही रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पालीमर्स चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) लैब में प्रतिदिन 100 जांचें हो रही हैं। जबकि जिले भर से 1000 से अधिक सैंपल लिए जाते हैं। संसाधनों की कमी के चलते आरटीपीसीआर लैब में जांचें कम हो पा रही हैं।
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शहर में सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाका रोडवेज बस स्टैंड को माना जा रहा है। यहां पर रोजाना ही बड़ी संख्या में बाहर के यात्री पहुंचते हैं। इनकी निगरानी और सैंपलिंग कराने के लिए तीन स्वास्थ्य टीमों को लगाया गया है। इनमें दो नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट वैन और एक अन्य टीम को शामिल किया है। तीनों टीमों को हिदायत दी गई है कि बसों से उतरने वाला एक भी यात्री बिना सैंपलिंग के नहीं जाना चाहिए। यहां प्रतिदिन 300 के करीब लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं।
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आठों ब्लॉकों में भी कराई जा रही सैंपलिंग
आठों ब्लॉकों में दो-दो सैंपल सेंटर बनाए गए हैं। सैंपलों को जिलास्तर पर एकत्रित कर आगरा स्थित सेंट्रल जालमा इंस्टीट्यूट ऑफ लेप्रोसी को भेजकर जांच कराई जा रही है।
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आरटीपीसीआर लैब में हो रही 100 जांचें
मेडिकल कॉलेज में संचालित की जा रही रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पालीमर्स चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) लैब में प्रतिदिन 100 जांचें हो रही हैं। जबकि जिले भर से 1000 से अधिक सैंपल लिए जाते हैं। संसाधनों की कमी के चलते आरटीपीसीआर लैब में जांचें कम हो पा रही हैं।