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नोटबंदी ने तोड़ी गल्ला कारोबार की कमर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Nov 2016 10:50 PM IST
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नोट का चलन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सरकार के नोटबंदी के फैसले ने गल्ला कारोबार की कमर तोड़कर रख दी है। बारह दिन से गल्ला मंडी में सन्नाटे के हालात हैं। किसानों के गल्ले के भुगतान के लिए एक करोड़ रुपये प्रतिदिन की जरूरत है लेकिन नियमों के मुताबिक कारोबारी एक सप्ताह में अधिकतम पचास हजार की निकासी कर सकता है। लेकिन बैंकों पर नियम के हिसाब से इतनी निकासी भी नहीं हो पा रही। मंडी में एक दिन के भुगतान का धन कारोबारी एक सप्ताह में धन नहीं जुटा पा रहे। ऐसी स्थिति में कारोबार ठप है। किसान, मजदूर, कारोबारी सब परेशान हैं।
इस समय गल्ला मंडी में मक्का, बाजरा, धान, उर्द, मूंग, अरहर की फसल का सीजन चल रहा है। इसके अलावा किसान गेहूं, सरसों, जई आदि की फसल भी मंडी लेकर आता है। गल्ला कारोबार से लगभग 200 कारोबारी जुड़े हुए हैं। इन कारोबारियों के द्वारा प्रतिदिन किसानों से लगभग एक करोड़ रुपये का कारोबार किया जाता है। यह पूरा कारोबार नकदी पर आधारित है। 500 व 1000 के नोट का प्रचलन बंद होते ही किसान इन नोटों को लेने में कतराने लगा है। कारोबार के लिए शासन से एक सप्ताह में 50 हजार रुपये की निकासी की व्यवस्था की गई। जितने धन की जरूरत कारोबार के लिए एक दिन में होती है उतना धन अब एक सप्ताह में आ पा रहा है। यानी प्रतिदिन जरूरत के हिसाब से मात्र 15 प्रतिशत धन ही कारोबारियों को मिल पा रहा है, जिससे कारोबारी किसान को आवक का भुगतान नहीं कर पा रहे। भुगतान न मिलने से किसान भी मंडी नहीं पहुंच रहे। एक दिन में 6 हजार क्विंटल तक की गल्ले की जो आवक हो रही थी वह घटकर मात्र 600 कुंटल तक रह गई है।
बैंकोें से गल्ला कारोबारियों के लिए सप्ताह में धन निकासी की जो व्यवस्था निर्धारित की गई है वह पर्याप्त नहीं है। किसान को धन मिलने पर भुगतान की बात कही जा रही है।
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- आशीष मालू गल्ला कारोबारी
बैंकों में धन की कमी के चलते कारोबारियों को 50 हजार रुपये सप्ताह की निकासी नहीं हो रही। धन के अभाव में कारोबार ठप है।
-सुभाष यादव गल्ला कारोबारी
शासन को गल्ला कारोबार के लिए धन निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे कारोबारी किसान को नकद भुगतान कर सके।
- राज कुमार गुप्ता गल्ला कारोबारी
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इस समय गल्ला मंडी में मक्का, बाजरा, धान, उर्द, मूंग, अरहर की फसल का सीजन चल रहा है। इसके अलावा किसान गेहूं, सरसों, जई आदि की फसल भी मंडी लेकर आता है। गल्ला कारोबार से लगभग 200 कारोबारी जुड़े हुए हैं। इन कारोबारियों के द्वारा प्रतिदिन किसानों से लगभग एक करोड़ रुपये का कारोबार किया जाता है। यह पूरा कारोबार नकदी पर आधारित है। 500 व 1000 के नोट का प्रचलन बंद होते ही किसान इन नोटों को लेने में कतराने लगा है। कारोबार के लिए शासन से एक सप्ताह में 50 हजार रुपये की निकासी की व्यवस्था की गई। जितने धन की जरूरत कारोबार के लिए एक दिन में होती है उतना धन अब एक सप्ताह में आ पा रहा है। यानी प्रतिदिन जरूरत के हिसाब से मात्र 15 प्रतिशत धन ही कारोबारियों को मिल पा रहा है, जिससे कारोबारी किसान को आवक का भुगतान नहीं कर पा रहे। भुगतान न मिलने से किसान भी मंडी नहीं पहुंच रहे। एक दिन में 6 हजार क्विंटल तक की गल्ले की जो आवक हो रही थी वह घटकर मात्र 600 कुंटल तक रह गई है।
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बैंकोें से गल्ला कारोबारियों के लिए सप्ताह में धन निकासी की जो व्यवस्था निर्धारित की गई है वह पर्याप्त नहीं है। किसान को धन मिलने पर भुगतान की बात कही जा रही है।
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- आशीष मालू गल्ला कारोबारी
बैंकों में धन की कमी के चलते कारोबारियों को 50 हजार रुपये सप्ताह की निकासी नहीं हो रही। धन के अभाव में कारोबार ठप है।
-सुभाष यादव गल्ला कारोबारी
शासन को गल्ला कारोबार के लिए धन निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे कारोबारी किसान को नकद भुगतान कर सके।
- राज कुमार गुप्ता गल्ला कारोबारी