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बहुमंजिला इमारतों में आग से निबटने के इंतजाम नहीं
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Thu, 26 Nov 2015 11:02 PM IST
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बहुमंजिला इमारतों में लगी आग से निबटने के अग्निशमन विभाग के पास आग पर काबू पाने का कोई इंतजाम नहीं है। नगर के संकरे इलाकों में बहुमंजिला इमारतें हैं, जहां आग लगने पर भाग कर नहीं निकला जा सकता। ऐसे में आग बुझाने वाले वाहन कैसे पहुंचेंगे। शहर में नगर पालिका के हाईडेंट प्वाइंट तक बंद पड़े हैं। वहीं अग्निशमन विभाग से बहुमंजिला कामर्शियल इमारतें बनाने से पहले एनओसी तक नहीं ली जाती।
सी ग्रेड एटा जनपद मुख्यालय क्षेत्र में बहुमंजिला कामर्शियल इमारतों का निर्माण अग्निशमन विभाग से एनओसी लिए बिना हो गया। खास बात यह है कि इन इमारतों की जितनी ऊंचाई है उसकी आधी ऊंचाई की अग्निशमन विभाग के पास सीढ़ियां तक मौजूद नहीं है। ऐसे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि यदि बहुमंजिला इमारत में आग लगी तो उसे बुझाया कैसे जाएगा। कमोवेश यही हालात नगर के मुख्य संकरे बाजारों का है।
जहां बिजली के खंबों पर लटक रहे केबिल के गुच्छे हादसे को दावत दे रहे हैं। बाजारों या बहुमंजिला इमारतोें में आग लगने पर अग्निशमन विभाग के लिए पालिका प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। अग्निमशन विभाग की माने तो पालिका के 35 हाईडेंट या तो बंद पड़े हैं या फिर सड़क के नीचे दब चुके हैं। विभाग को पानी सिर्फ पुलिस लाइन से मिलता है। कमोवेश यही हालात नगर के ज्यादातर स्कूलों और निजी अस्पतालों के हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी जेएम दोहरे का कहना है कि ज्यादातर स्कूल, अस्पताल या कामर्शियल इमारतों के निर्माण के वक्त विभाग ने आग बुझाने के उपकरण लगाने के सुझाव दिए थे, लेकिन निर्माण पूरे होने के बाद कोई भी भवन स्वामी या बहुमंजिला इमारत का मालिक विभाग से एनओसी लेने नहीं आया।
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सी ग्रेड एटा जनपद मुख्यालय क्षेत्र में बहुमंजिला कामर्शियल इमारतों का निर्माण अग्निशमन विभाग से एनओसी लिए बिना हो गया। खास बात यह है कि इन इमारतों की जितनी ऊंचाई है उसकी आधी ऊंचाई की अग्निशमन विभाग के पास सीढ़ियां तक मौजूद नहीं है। ऐसे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि यदि बहुमंजिला इमारत में आग लगी तो उसे बुझाया कैसे जाएगा। कमोवेश यही हालात नगर के मुख्य संकरे बाजारों का है।
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जहां बिजली के खंबों पर लटक रहे केबिल के गुच्छे हादसे को दावत दे रहे हैं। बाजारों या बहुमंजिला इमारतोें में आग लगने पर अग्निशमन विभाग के लिए पालिका प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। अग्निमशन विभाग की माने तो पालिका के 35 हाईडेंट या तो बंद पड़े हैं या फिर सड़क के नीचे दब चुके हैं। विभाग को पानी सिर्फ पुलिस लाइन से मिलता है। कमोवेश यही हालात नगर के ज्यादातर स्कूलों और निजी अस्पतालों के हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी जेएम दोहरे का कहना है कि ज्यादातर स्कूल, अस्पताल या कामर्शियल इमारतों के निर्माण के वक्त विभाग ने आग बुझाने के उपकरण लगाने के सुझाव दिए थे, लेकिन निर्माण पूरे होने के बाद कोई भी भवन स्वामी या बहुमंजिला इमारत का मालिक विभाग से एनओसी लेने नहीं आया।
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