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सरकारी सहायता से खुश नहीं अग्निपीड़ित
अमर उजाला ब्यूरो एटा
Updated Sun, 24 Apr 2016 11:31 PM IST
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सरकारी सहायता से खुश नहीं अग्निपीड़ित
- फोटो : अमर उजाला
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ग्राम खडुइया में दो दिन पूर्व हुए अग्निकांड से पीड़ितों को जो मदद मिल रही हैं वह काफी कम है। इस कारण लोगों में रोष है। एक ग्रामीण ने तो सरकारी मदद का चैक भी वापस कर दिया।
ग्राम खडुइया में आग से हुए नुकसान के बाद राजस्व विभाग की टीम पहुंची। टीम के क्षति का आंकलन करने के बाद चेक वितरित किए। लेकिन मदद इतनी कम थी कि पीड़ितों ने नाराजगी जाहिर की। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें दी गई मदद आग से हुए नुकसान के सापेक्ष में बेहद कम है। उनके नुकसान का सही से आकलन नहीं किया गया है। पीड़ित राजाराम ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि उनका एक्सपेलर चक्की, दो बाइक, भैंस, 50 क्विंटल सरसों, 30 क्विंटल लहसुन जल गया। लेकिन उन्हें सरकारी मदद में मात्र 7900 रुपये का की चैक दिया गया है। उन्होंने इस सहायता राशि के चैक को अधिकारियों को ही वापस कर दिया। अनुभूति सेवा की संरक्षक किरण यादव ने कहा कि अग्नि पीड़ितों को मिलने वाली सरकारी मदद काफी कम हैं। ग्रामीणों का सब कुछ जल गया। लोग दो वक्त की रोटी के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सहायता कम से कम 20 हजार रुपये प्रति पीड़ित होती तो उन्हें खुले में न सोना पड़ता।
उपजिलाधिकारी परवेज अहमद ने बताया कि सरकार निर्धारित दर के अनुसार ही आग से हुई क्षति का आंकलन किया गया है। उसी के मुताबिक पीड़ितों को मदद दी गई है। पशुओं का पोस्टमार्टम होने के बाद जब रिपोर्ट मिलेगी उसके अनुसार ही मुआवजा दिया जाएगा।
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ग्राम खडुइया में आग से हुए नुकसान के बाद राजस्व विभाग की टीम पहुंची। टीम के क्षति का आंकलन करने के बाद चेक वितरित किए। लेकिन मदद इतनी कम थी कि पीड़ितों ने नाराजगी जाहिर की। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें दी गई मदद आग से हुए नुकसान के सापेक्ष में बेहद कम है। उनके नुकसान का सही से आकलन नहीं किया गया है। पीड़ित राजाराम ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि उनका एक्सपेलर चक्की, दो बाइक, भैंस, 50 क्विंटल सरसों, 30 क्विंटल लहसुन जल गया। लेकिन उन्हें सरकारी मदद में मात्र 7900 रुपये का की चैक दिया गया है। उन्होंने इस सहायता राशि के चैक को अधिकारियों को ही वापस कर दिया। अनुभूति सेवा की संरक्षक किरण यादव ने कहा कि अग्नि पीड़ितों को मिलने वाली सरकारी मदद काफी कम हैं। ग्रामीणों का सब कुछ जल गया। लोग दो वक्त की रोटी के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सहायता कम से कम 20 हजार रुपये प्रति पीड़ित होती तो उन्हें खुले में न सोना पड़ता।
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उपजिलाधिकारी परवेज अहमद ने बताया कि सरकार निर्धारित दर के अनुसार ही आग से हुई क्षति का आंकलन किया गया है। उसी के मुताबिक पीड़ितों को मदद दी गई है। पशुओं का पोस्टमार्टम होने के बाद जब रिपोर्ट मिलेगी उसके अनुसार ही मुआवजा दिया जाएगा।
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