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Etah News: बेटी से अश्लील हरकत करने वाले सौतेले पिता को जमानत नहीं
Mon, 05 Jan 2026 11:31 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 05 Jan 2026 11:31 PM IST
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एटा। बेटी से अश्लील हरकत करने वाले उसके सौतेले पिता को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट नरेंद्र पाल राणा की अदालत ने जमानत नहीं दी। उसके खिलाफ पत्नी ने कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
महिला द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मुताबिक पहले पति के छोड़ने पर उसने 2020 में दूसरी शादी कर ली थी। पहले पति से उसकी करीब 12 वर्षीय बेटी है। 13 अक्तूबर 2025 को दूसरे पति ने उसके पुत्री को गलत तरीके से छूआ।
14 अक्तूबर को वह घर से काम पर चली गई। घर में मौजूद पुत्री से दूसरे पति ने फिर अश्लील हरकत की। बाथरूम में बंद होकर बेटी ने अपना बचाव किया। घर आने पर बेटी ने पूरी बात बताई। जमानत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर व्यक्ति ने तर्क दिया कि खाना न देने पर उसका पत्नी से वाद-विवाद व मारपीट हुई थी।
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मोहल्ले वालों के उकसाने पर उसने गुस्से में आकर इस तरह की प्राथमिकी दर्ज करा दी। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध साक्ष्य के आधार पर आरोपपत्र भी प्रेषित कर दिया है। ये आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। पीड़िता और आरोपी की उम्र में लगभग 32 वर्ष का अंतर है। इन परिस्थितियों में आरोपी को जमानत पर छोड़े जाने का पर्याप्त और न्यायोचित आधार प्रतीत नहीं होता है।
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महिला द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मुताबिक पहले पति के छोड़ने पर उसने 2020 में दूसरी शादी कर ली थी। पहले पति से उसकी करीब 12 वर्षीय बेटी है। 13 अक्तूबर 2025 को दूसरे पति ने उसके पुत्री को गलत तरीके से छूआ।
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14 अक्तूबर को वह घर से काम पर चली गई। घर में मौजूद पुत्री से दूसरे पति ने फिर अश्लील हरकत की। बाथरूम में बंद होकर बेटी ने अपना बचाव किया। घर आने पर बेटी ने पूरी बात बताई। जमानत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर व्यक्ति ने तर्क दिया कि खाना न देने पर उसका पत्नी से वाद-विवाद व मारपीट हुई थी।
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मोहल्ले वालों के उकसाने पर उसने गुस्से में आकर इस तरह की प्राथमिकी दर्ज करा दी। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध साक्ष्य के आधार पर आरोपपत्र भी प्रेषित कर दिया है। ये आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। पीड़िता और आरोपी की उम्र में लगभग 32 वर्ष का अंतर है। इन परिस्थितियों में आरोपी को जमानत पर छोड़े जाने का पर्याप्त और न्यायोचित आधार प्रतीत नहीं होता है।