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थम गई मां की सांसें: बेटे की मौत की खबर सुनी तो सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई, त्याग दिए प्राण
Fri, 29 Mar 2024 03:18 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Fri, 29 Mar 2024 03:18 PM IST
सार
बेटे की मौत की खबर जैसे ही बुजुर्ग मां को मिली, तो वो चक्कर खाकर गिर पड़ी। परिवार के लोग उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया।
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चिता।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में बेहद ही दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग मां अपने बेटे की मौत का दर्द ने झेल सकी। बीमारी से पुत्र की मौत की खबर मिली तो बूढ़ी मां चक्कर खाकर गिर पड़ी। इसके बाद उठ न सकी। परिजन चिकित्सक के पास ले गए। जहां मृत बता दिया गया। एक ही दिन में दो सदस्यों की मौत से परिवार में चीत्कार मचा हुआ है।
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मारहरा थाना क्षेत्र के नगला भूड़ निवासी रामखिलाड़ी (48) चार भाइयों में सबसे बड़े थे, जो कथावाचक थे। मंगलवार शाम उनकी तबीयत बिगड़ने पर परिजन उपचार के लिए चिकित्सक के पास ले गए। उन्हें हार्टअटैक बताया गया था। उनकी गंभीर हालत देखते हुए आगरा रेफर किया गया। वहां भी हालत में सुधार नहीं आया तो परिजन गुरुग्राम ले गए। जहां उपचार के दौरान बुधवार को निधन हो गया।
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पुत्र के निधन की सूचना बुधवार सुबह के समय मां गायत्री देवी (70) को मिली तो बेटे के वियोग में बेहोश होकर गिर पड़ीं। परिवार के लोग उनको मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां डाॅक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके शव का अंतिम संस्कार बुधवार की शाम कर दिया गया। जबकि बेटे का शव बृहस्पतिवार सुबह तक गांव में पहुंचेगा। जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।
प्रख्यात कथावाचक थे रामखिलाड़ी
गांव नगला भूड़ के रहने वाले रामखिलाड़ी लंबे समय से कथावाचन कर रहे थे। वर्तमान में प्रख्यात कथावाचक थे और एटा ही नहीं, दूर-दूर के जिलों में भी भागवत कथा का वाचन करने के लिए उन्हें बुलाया जाता था। उनके छोटे भाई सुरेंद्र शास्त्री और शैलेंद्र शास्त्री भी कथावाचक हैं। रामखिलाड़ी के दो पुत्र हैं। पुत्री की विवाह के बाद मृत्यु हो चुकी है।
गांव नगला भूड़ के रहने वाले रामखिलाड़ी लंबे समय से कथावाचन कर रहे थे। वर्तमान में प्रख्यात कथावाचक थे और एटा ही नहीं, दूर-दूर के जिलों में भी भागवत कथा का वाचन करने के लिए उन्हें बुलाया जाता था। उनके छोटे भाई सुरेंद्र शास्त्री और शैलेंद्र शास्त्री भी कथावाचक हैं। रामखिलाड़ी के दो पुत्र हैं। पुत्री की विवाह के बाद मृत्यु हो चुकी है।