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कोर्स और ड्रेस में कमीशन का खेल

Tue, 05 Apr 2016 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
अमर उजाला ब्यूरो, एटा Updated Tue, 05 Apr 2016 10:59 PM IST
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kors aur dres mein kameeshan ka khel
नया शैक्षणिक सत्र - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है। प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में नये पाठ्यक्रम की दुकानें सज गई हैं। पुस्तक विक्रेताओं से स्कूल संचालकों का कमीशन तय है। पुस्तक विक्रेता मनमाने रेट पर कोर्स दे रहे हैं। खास बात यह है कि अधिकांश स्कूलों में ऐसी व्यवस्था है कि कोर्स बाजार में कहीं नहीं मिलेगा स्कूल में लगे बुक स्टाल से ही लेना पडे़गा। नए कोर्स में अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है जबकि स्कूल संचालकों की कमाई। स्कूल संचालक प्रकाशक-पुस्तक विक्रेताओं से कोर्स बेचने के नाम पर साल भर में एक करोड़ से भी अधिक का कमीशन वसूल कर वारे न्यारे कर रहे हैं। 
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शासन से सुविधाएं लेने वाले निजी विद्यालय संचालक कमाई का कोई हथकंडा नहीं छोड़ रहे। प्रवेश पर हजारों रुपये का डोनेशन लेने वाले स्कूल संचालक अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने के अलावा विक्रेता के माध्यम से पुस्तक, बैग, कॉपी पर कमीशन लेकर अभिभावकों की जेब पर डाका डाल रहे हैं। इतना ही नहीं हर महीने डिजिटल क्लास, मैगजीन, पिकनिक, कंप्यूटर, लीपर्स के नाम पर भी वसूली हो रही है। पब्लिक स्कूल सूत्रों की माने तो इन दिनों नए शिक्षा सत्र के नाम पर निजी स्कूल संचालक लाखों रुपये का कमीशन लेकर बुक सेलर्स के माध्यम से मोटी कमाई कर रहे हैं। लोगों की मानें तो गत वर्ष एक संस्था ने आगरा के प्रकाशक कोे बीस लाख रुपये लेकर कोर्स बेचने की अनुमति दी थी। वहीं एक दूसरी संस्था ने साल भर के कोर्स के नाम पर 27 लाख रुपये की डील की थी।
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निजी प्रकाशकों को तरजीह
संस्थाओं की मनमानी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वे सर्वमान्य सरकारी एवं एनसीईआरटी की पुस्तकों के संचालन के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबों को स्कूलों में चला रहे हैं। इतना ही नहीं अधिकांश कक्षाओं की निजी प्रकाशकों की किताबों को हर साल बदलवा दिया जाता है। ताकि नए कक्षाओं के बच्चों को दोबारा नई किताबें, बैग, कॉपी, खरीदने का विवश होना पड़े। 
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जबरन दे रहे कापियां
विद्यालय संचालकों की मनमानी से परेशान अभिभावकों का रोना है कि पुस्तक विक्रेता किताबें नहीं पूरा कोर्स देते हैं। इसमें बुक्स के अलावा कापियां, पेंसल बॉक्स, बैग, कलर सेट, कॉपी-बुक कलर, पोस्टर जबरन दी जा रही है। इतना ही मिलीभगत के कारण बुक सेलर्स पूरा सेट नहीं खरीदने पर अभिभावकों  को लौटा रहे हैं। जबकि कई स्कूल संचालक अभिभावकों की जेब पर ड्रेस खरीदने के नाम पर डाका डालने में लगे हैं। 


नाम छपवाकर वसूल रहे दो गुने दाम
प्रयोगात्मक कापियों पर स्कूल का नाम छपवाने भर से इनका मूल्य दो गुना कर दिया गया है। अभिभावक मीनू का कहना है कि नाम छपी कापी पचास रुपये की है जबकि यही प्रैक्टीकल की कॉपी बाजार में 25 रुपये की है।

कक्षा कोर्स                      मूल्य
एलकेजी                        2600 रुपये
यूकेजी                          2500 रुपये
क्लास एक                   2250 रुपये
दो                             2800 रुपये 
तीन                            3100 रुपये
चार                            2850 रुपये
पांच                           2900 रुपये
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