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किसानों को चार दिन पहले मिलेगी मौसम की जानकारी

Mon, 27 Feb 2017 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 27 Feb 2017 11:47 PM IST
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kisaanon ko chaar din pahale milegee mausam kee jaanakaaree
मौसम की जानकारी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जिले के किसानों को अब बारिश, ओलावृष्टि, आंधी और तूफान की जानकारी मौसम खराब होने से चार दिन पहले एडवांस में मिलेगी। इसके लिए अवागढ़ स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में मौसम विभाग मैट्रोलॉजिकल लैब स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। प्रथम चरण में यूपी के दस जिलों का चयन कर सर्वे पूरा हो चुका है। लैब अगले छह महीने में बनकर तैयार हो जाएगी और पंजीकृत किसानों को मौसम की जानकारी एसएमएस से दी जाएगी।
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अवागढ़ कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी डाक्टर असीम निधि ने बताया कि मौसम विज्ञान विभाग यूपी के दस जिलों में मैट्रोलॉजिकल लैब स्थापित करने जा रहा है। योजना में एटा जिले का नाम शामिल है। लखनऊ से एक टीम मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक जेपी गुप्ता के नेतृत्व में आकर सर्वे का काम पूरा कर चुकी है। उन्होंने बताया कि मेट्रोलॉजिकल लैब स्थापित होने से किसानों को फसल की बुवाई का समय, फसल में कब पानी देना है, कब नहीं देना के अलावा बारिश, आंधी, ओलावृष्टि तूफान की चार दिन पहले एडवांस में जानकारी एसएमएस भेज कर दी जाएगी। एसएमएस से जानकारी देने की सुविधा सिर्फ पंजीकृत किसानों को ही ब्लॉक वाइज मिलेगी। डा0 असीम निधि ने बताया कि मौसम खराब होने से पूर्व जानकारी मिलने पर किसानों फसल का बचाव कर बेहतर उत्पादन ले सकेंगे और फसल में बारिश से एक दिन पूर्व पानी लगाने से होने वाला खर्च भी बचेगा।
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ऐसे होगी फसलों से किसानों को बचत
किसान फसल की सिंचाई बारिश, आंधी, तूफान, ओलावृष्टि की जानकारी किए बिना कर देते हैं। पता लगा कि आज फसल में पानी दिया है और रात को बारिश, आंधी या ओलावृष्टि होने से फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। लेकिन मैट्रोलॉजिकल लैब खुलने और एडवांस में जानकारी मिलने से किसान आंधी, बारिश या ओलावृष्टि होने की आशंका से फसल को पानी नहीं देगा और सिंचाई के कारण आंधी या बारिश आने पर खेत में फसल गिरने से बच जाएगी।
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विभागीय अफसरों की सुनिए
अवागढ़ कृषि विज्ञान केंद्र में मैट्रोलॉजिकल लैब स्थापित करने के लिए सर्वे हो चुका है। छह महीने में लैब की स्थापना हो जाएगी। प्रदेश के दस जिलों में लैब स्थापित करने का प्रस्ताव है। दस जिलो में एटा भी शामिल है। इससे जिले के किसानों की फसलों को फायदा होगा।

                             - डाक्टर जेपी गुप्ता, निदेशक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ
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