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काली नदी: सबकी आंखों के सामने खनन, लेकिन सब अनजान
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धुमरी पुल के पास काली नदी से बालू खनने में जुटे ट्रैक्टर ।
- फोटो : ETAH
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एटा। काली नदी से सटे गांवों में लंबे समय से लगातार बालू का अवैध खनन किया जा रहा है। चार थाना क्षेत्र से जुड़े गांवों में लगातार अवैध खनन हो रहा है। बालू आसपास सड़क किनारे बनी दुकानों को बेच दी जाती है। जिम्मेदार अफसर जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं। जबकि इन गांवों से अक्सर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की गाड़ियां निकलती हैं।
गंजडुंडवारा रोड पर अथैया गांव में काली नदी से सबसे ज्यादा खनन किया जा रहा है। इसके अलावा ओनघाट, प्रेमी नगला, बेंदुला सोनसा तक यह काला कारोबार फैला हुआ है। अलीगंज रोड, कासगंज रोड के गांवों में भी बेखौफ खनन चलता है। इन गांवों से संबंधित कोतवाली देहात, बागवाला, जैथरा और मिरहची थाना पुलिस ने अवैध खनन करने वालों को पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटाई। कभी-कभी सड़क पर चलते ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़कर जरूर जुर्माना या चालान कर दिया जाता है।
इन दिनों नदी में पानी कम है। इसलिए गहराई तक ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी चले जाते हैं। नदी के किनारे रेता मिलता है। जबकि नदी के बीच मोटी बालू प्राप्त होती है। इसकी मांग अधिक होती है। बरसात में पानी बढ़ते ही मोटी बालू निकालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इसका बाजार में दाम बढ़ जाता है। अभी एक ट्रॉली बालू ढाई से तीन हजार रुपये में बिक रही है। जबकि बरसात में इसका दाम चार से साढ़े चार हजार रुपये तक पहुंच जाता है। इसको देखते हुए कई माफिया खनन कर बालू का स्टॉक करने में जुटे हैं।
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जिले में खनन का कोई भी पट्टा आवंटित नहीं है। व्यवसायिक रूप से कोई खनन कर रहा है तो उनको चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
- सुनील कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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गंजडुंडवारा रोड पर अथैया गांव में काली नदी से सबसे ज्यादा खनन किया जा रहा है। इसके अलावा ओनघाट, प्रेमी नगला, बेंदुला सोनसा तक यह काला कारोबार फैला हुआ है। अलीगंज रोड, कासगंज रोड के गांवों में भी बेखौफ खनन चलता है। इन गांवों से संबंधित कोतवाली देहात, बागवाला, जैथरा और मिरहची थाना पुलिस ने अवैध खनन करने वालों को पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटाई। कभी-कभी सड़क पर चलते ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़कर जरूर जुर्माना या चालान कर दिया जाता है।
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इन दिनों नदी में पानी कम है। इसलिए गहराई तक ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी चले जाते हैं। नदी के किनारे रेता मिलता है। जबकि नदी के बीच मोटी बालू प्राप्त होती है। इसकी मांग अधिक होती है। बरसात में पानी बढ़ते ही मोटी बालू निकालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इसका बाजार में दाम बढ़ जाता है। अभी एक ट्रॉली बालू ढाई से तीन हजार रुपये में बिक रही है। जबकि बरसात में इसका दाम चार से साढ़े चार हजार रुपये तक पहुंच जाता है। इसको देखते हुए कई माफिया खनन कर बालू का स्टॉक करने में जुटे हैं।
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जिले में खनन का कोई भी पट्टा आवंटित नहीं है। व्यवसायिक रूप से कोई खनन कर रहा है तो उनको चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
- सुनील कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व