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जालसाज शैलेंद्र को ‘तन्हाई’ बैरक में डाला
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Sun, 03 Jul 2016 11:21 PM IST
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जेल
- फोटो : अमर उजाला
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जिला कारागार में बंद जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल गिरगिट से भी तेज रंग बदलता है। कोर्ट में पेशी पर जाते समय तफरीह करते पकड़े जाने के बाद जेल अधीक्षक का स्थानांतरण कर दिया गया था। इसके बाद उसने खुद की जान को खतरा बताकर जेल प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया। पेशी पर तफरीह का विडियो वायरल होने और अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने से झुंझलाए जालसाज ने जेल पहुंचकर सफाई कर्मी से धक्का मुक्की कर दी थी। मामला उजागर होने से पहले ही जेल प्रशासन ने उसे तन्हाई बैरक में डाल दिया।
जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल पर 45 केस दर्ज होने, हिस्ट्री शीट खुलने और गैंगेस्टर एक्ट में भी उसके खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। हमेशा वह जेल प्रशासन के लिए मुसीबत बना रहा है। जिला कारागार सूत्रों की माने तो अनूप सिंह के जेल अधीक्षक रहते शैलेंद्र अग्रवाल बीमारी का बहाना बनाकर बैरक नंबर आठ में रहने के बजाय अस्पताल में रहता था और जेल की किचिन में उसके मनपसंद का खाना अलग से अस्पताल में पहुंचने के अलावा बाहर से फल, जूस, चाट, कोल्ड ड्रिंक्स और होटल से भी भोजन आता था। अनूप सिंह के जमाने में जालसाज एक महीने में बामुश्किल दो दिन ही अपनी बैरक में गुजारता था, लेकिन रात उसकी अस्पताल में गुजरती थी। जालसाज के जेल में ऐश करने की शिकायत शासन तक पहुंचने पर जेल अधीक्षक ने उसे बैरक नंबर आठ में शिफ्ट कर दिया था। आगरा में पेशी पर ऐश करते पकड़े जाने और मीडिया में खबर आने के बाद शैलेंद्र इतना परेशान हो गया कि उसने अपनी बैरक में सफाई करने आए कर्मचारी से धक्का-मुक्की तक कर दी। मामला तूल पकड़ने पर जेल अधीक्षक अनूप सिंह ने उससे बैरक में जाकर बात की और उसके बाद शैलेंद्र ने जेल में जान का खतरा जताते हुए कारागार प्रशासन को लिखित में प्रार्थनपत्र देकर सुरक्षा की गुहार लगाई। इसी बीच जब शासन ने जेल अधीक्षक अनूप सिंह का कारागार से ट्रांसफर कर दिया। अनूप सिंह ने चार्ज छोड़ने से पहले शैलेंद्र अग्रवाल को हाई सिक्योरिटी तन्हाई बैरक में शिफ्ट कर दिया। जिला कारागार एटा में दो तन्हाई बैरक हैं। एक बैरक में जालसाज शैलेंद्र अकेला, जबकि दूसरी हाई सिक्योरिटी तन्हाई बैरक में चार बंदी हैं।
अगस्त में जेल से रिहा होने की संभावना
जिला कारागार सूत्रों की माने तो जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल पर दर्ज 45 मामलों में 44 में उसको कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। जालसाज को अब सिर्फ गैंगेस्टर के मामले में कोर्ट से जमानत मिलनी बाकी है। इसके चलते जिला कारागार सूत्र आगामी अगस्त या सितंबर में शैलेंद्र अग्रवाल के जेल से रिहा होने की उम्मीद जताई है।
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जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल पर 45 केस दर्ज होने, हिस्ट्री शीट खुलने और गैंगेस्टर एक्ट में भी उसके खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। हमेशा वह जेल प्रशासन के लिए मुसीबत बना रहा है। जिला कारागार सूत्रों की माने तो अनूप सिंह के जेल अधीक्षक रहते शैलेंद्र अग्रवाल बीमारी का बहाना बनाकर बैरक नंबर आठ में रहने के बजाय अस्पताल में रहता था और जेल की किचिन में उसके मनपसंद का खाना अलग से अस्पताल में पहुंचने के अलावा बाहर से फल, जूस, चाट, कोल्ड ड्रिंक्स और होटल से भी भोजन आता था। अनूप सिंह के जमाने में जालसाज एक महीने में बामुश्किल दो दिन ही अपनी बैरक में गुजारता था, लेकिन रात उसकी अस्पताल में गुजरती थी। जालसाज के जेल में ऐश करने की शिकायत शासन तक पहुंचने पर जेल अधीक्षक ने उसे बैरक नंबर आठ में शिफ्ट कर दिया था। आगरा में पेशी पर ऐश करते पकड़े जाने और मीडिया में खबर आने के बाद शैलेंद्र इतना परेशान हो गया कि उसने अपनी बैरक में सफाई करने आए कर्मचारी से धक्का-मुक्की तक कर दी। मामला तूल पकड़ने पर जेल अधीक्षक अनूप सिंह ने उससे बैरक में जाकर बात की और उसके बाद शैलेंद्र ने जेल में जान का खतरा जताते हुए कारागार प्रशासन को लिखित में प्रार्थनपत्र देकर सुरक्षा की गुहार लगाई। इसी बीच जब शासन ने जेल अधीक्षक अनूप सिंह का कारागार से ट्रांसफर कर दिया। अनूप सिंह ने चार्ज छोड़ने से पहले शैलेंद्र अग्रवाल को हाई सिक्योरिटी तन्हाई बैरक में शिफ्ट कर दिया। जिला कारागार एटा में दो तन्हाई बैरक हैं। एक बैरक में जालसाज शैलेंद्र अकेला, जबकि दूसरी हाई सिक्योरिटी तन्हाई बैरक में चार बंदी हैं।
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अगस्त में जेल से रिहा होने की संभावना
जिला कारागार सूत्रों की माने तो जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल पर दर्ज 45 मामलों में 44 में उसको कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। जालसाज को अब सिर्फ गैंगेस्टर के मामले में कोर्ट से जमानत मिलनी बाकी है। इसके चलते जिला कारागार सूत्र आगामी अगस्त या सितंबर में शैलेंद्र अग्रवाल के जेल से रिहा होने की उम्मीद जताई है।
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