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अवैध खनन: अफसरों के लिए मिट्टी, माफियाओं के लिए सोना

Fri, 06 May 2022 10:33 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 06 May 2022 10:33 PM IST
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Illegal mining: soil for officers, gold for mafia
काली नदी । संवाद - फोटो : ETAH
एटा। काली नदी में निकलने वाली बालू को अफसर मिट्टी का एक प्रकार मानते हैं। इसे निर्माण कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं बताते। जबकि इसी बालू को खोदकर माफिया हर महीने लाखों रुपये का खेल कर रहे हैं। उनके लिए यह सोने से कम नहीं है। मुफ्त की बालू से वह मालामाल हो रहे हैं।
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काली नदी के किनारों जैथरा, बागवाला, मिरहची और कोतवाली देहात थाना क्षेत्रों के अंदर अवैध रूप से बालू का खनन किया जाता है। यह बालू जेसीबी से खोदकर ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर दुकानों या कुछ गोदामों में पहुंचा दी जाती है। हर ट्रॉली बालू की कीमत ढाई से तीन हजार रुपये आसानी से मिल जाती है।
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माफियाओं के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि बालू खनन के लिए पट्टा तक आवंटित नहीं है। ऐसे में उन्हें खनन का कोई शुल्क भी नहीं देना होता। पूरी बालू मुफ्त में ले जाकर बेच दी जाती है। जबकि अधिकारियों के मुताबिक काली नदी के किनारों से निकलने वाली बालू में मिट्टी बहुतायत में होती है। जिसकी मांग व्यवसायिक रूप से नहीं है। कुल मिलाकर खनन माफियाओं को मिली इस छूट का वह जमकर फायदा उठा रहे हैं।
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खनन विभाग ने काली नदी की बालू में काफी मात्रा में मिट्टी मिश्रित बताया है। जिसका सामान्य तौर पर निर्माण कार्यों में प्रयोग नहीं होता है। एक बार फिर सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए लखनऊ की टीम को बुलाया जाएगा।
सुनील कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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