{"_id":"57dc380f4f1c1b0d47d48a4e","slug":"ganga-ghaat-par-pitaron-ko-kiya-tarpan","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा घाट पर पितरों का किया तर्पण ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा घाट पर पितरों का किया तर्पण
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Sat, 17 Sep 2016 12:04 AM IST
विज्ञापन
पितृपक्ष
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुरखों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए एक पखवाड़े तक चलने वाला पितृपक्ष शुक्रवार से शुरू हो गया। पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगाघाटों पर पहुंचकर सपरिवार गंगा स्नान कर तर्पण किया। लोगों ने हरि की पैड़ी के घाटों, कछला गंगा घाट पर जलदान करके पितरों का तर्पण किया।
एक दिन पूर्व ही कछला गंगा घाट, शहवाजपुर, कादरगंज, इस्माइलपुर, लहरा सोरों हरि की पैड़ी आदि गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। शुक्रवार को लोगों ने विधिविधान से श्राद्ध पूजा आयोजित की। ब्राह्मणों एवं साधुओं को भोज कराया दान दक्षिणा दी। श्याम वाराह घाट पर विद्वान आचार्यों ने वैदिक रीति रिवाज से सामूहिक जलदान तर्पण कर्मकांड व श्राद्ध कर्म संपन्न कराया। हरि की पैड़ी के लक्ष्मन घाट पर आचार्य शशिधर द्विवेदी व वाराह घाट पर आचार्य धर्मधर शास्त्री ने जल तर्पण कराया। पुरोहितों ने राजस्थान मध्यप्रदेश दिल्ली गुजरात आदि प्रांतों से आने वाले श्रद्धालुओं से पिंडदान व तर्पण क्रिया कराया। श्रद्धालुओं ने हरिपदी की परिक्रमा लगाते हुए मंदिरों में दर्शन कर अपने परिवार की खुशहाली की कामना की। वाराह मंदिर, द्वारिकाधीश, सोमेश्वर, बाला जी दरबार, पंचमहाशक्ति, बटुकनाथ, भूतेश्वर, 84 घंटे वाली माता आदि मंदिरों पर दर्शन के लिए दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्राद्ध पक्ष पर गंगा स्थान को पहुंची श्रद्धालु की भीड़ का का आलम यह था कि श्रद्धालु सड़क मार्ग पर गंगा की ओर आने जाने वाले वाहनों में ठसाठस यात्री भरे हुए नजर आ रहे थे। श्राद्ध पक्ष में आज प्रतिपदा का श्राद्ध मनाया जाएगा।
कासगंज/सोरों (ब्यूरो)। श्राद्ध पर्व पितरों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का एक उपागम है। यह हमारी अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। यह मात्र कर्मकांड नहीं है। गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि कृतज्ञता व्यक्त करने से विश्वास व श्रद्धा हमें उत्साह व आनंद देती है। हम संकटों से मुक्त होकर नई ऊर्जा से काम करने लगते हैं। श्राद्ध इसी ऊर्जा को पाने का पर्व है।
विज्ञापन
ज्योतिषाचार्य डा.राधा कृष्ण दीक्षित ने बताया कि पितृ पक्ष में हमारे पूर्वजों की आत्मा हमारे निवास स्थल पर आती है। श्रद्धा से उनका अन्न, प्रसाद या तर्पण से स्वागत करना, उन्हें परम तृष्टि देना उनके प्रति अपनी श्रद्धा है। वह आशीर्वाद में हमें अपनी उन्नति, वैभव-समृद्धि और परिवार में शांति और भाईचारे की समरसता बनी रहने का प्रसाद देते हैं। सोरों के पं.प्रशांत कोठेवार ने बताया कि पौराणिक उल्लेखों के अनुसार भगवान वाराह की अवतरण स्थली सूकरक्षेत्र में श्राद्ध कर्म सर्वोपयुक्त माना गया है। यहां हरिपदी गंगा में 72 घंटे के अंदर प्रवाहित की जाने वाली अस्थियां रेणु रूप में परिवर्तित हो जाती हैं।
विज्ञापन
एक दिन पूर्व ही कछला गंगा घाट, शहवाजपुर, कादरगंज, इस्माइलपुर, लहरा सोरों हरि की पैड़ी आदि गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। शुक्रवार को लोगों ने विधिविधान से श्राद्ध पूजा आयोजित की। ब्राह्मणों एवं साधुओं को भोज कराया दान दक्षिणा दी। श्याम वाराह घाट पर विद्वान आचार्यों ने वैदिक रीति रिवाज से सामूहिक जलदान तर्पण कर्मकांड व श्राद्ध कर्म संपन्न कराया। हरि की पैड़ी के लक्ष्मन घाट पर आचार्य शशिधर द्विवेदी व वाराह घाट पर आचार्य धर्मधर शास्त्री ने जल तर्पण कराया। पुरोहितों ने राजस्थान मध्यप्रदेश दिल्ली गुजरात आदि प्रांतों से आने वाले श्रद्धालुओं से पिंडदान व तर्पण क्रिया कराया। श्रद्धालुओं ने हरिपदी की परिक्रमा लगाते हुए मंदिरों में दर्शन कर अपने परिवार की खुशहाली की कामना की। वाराह मंदिर, द्वारिकाधीश, सोमेश्वर, बाला जी दरबार, पंचमहाशक्ति, बटुकनाथ, भूतेश्वर, 84 घंटे वाली माता आदि मंदिरों पर दर्शन के लिए दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्राद्ध पक्ष पर गंगा स्थान को पहुंची श्रद्धालु की भीड़ का का आलम यह था कि श्रद्धालु सड़क मार्ग पर गंगा की ओर आने जाने वाले वाहनों में ठसाठस यात्री भरे हुए नजर आ रहे थे। श्राद्ध पक्ष में आज प्रतिपदा का श्राद्ध मनाया जाएगा।
विज्ञापन
कासगंज/सोरों (ब्यूरो)। श्राद्ध पर्व पितरों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का एक उपागम है। यह हमारी अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। यह मात्र कर्मकांड नहीं है। गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि कृतज्ञता व्यक्त करने से विश्वास व श्रद्धा हमें उत्साह व आनंद देती है। हम संकटों से मुक्त होकर नई ऊर्जा से काम करने लगते हैं। श्राद्ध इसी ऊर्जा को पाने का पर्व है।
विज्ञापन
ज्योतिषाचार्य डा.राधा कृष्ण दीक्षित ने बताया कि पितृ पक्ष में हमारे पूर्वजों की आत्मा हमारे निवास स्थल पर आती है। श्रद्धा से उनका अन्न, प्रसाद या तर्पण से स्वागत करना, उन्हें परम तृष्टि देना उनके प्रति अपनी श्रद्धा है। वह आशीर्वाद में हमें अपनी उन्नति, वैभव-समृद्धि और परिवार में शांति और भाईचारे की समरसता बनी रहने का प्रसाद देते हैं। सोरों के पं.प्रशांत कोठेवार ने बताया कि पौराणिक उल्लेखों के अनुसार भगवान वाराह की अवतरण स्थली सूकरक्षेत्र में श्राद्ध कर्म सर्वोपयुक्त माना गया है। यहां हरिपदी गंगा में 72 घंटे के अंदर प्रवाहित की जाने वाली अस्थियां रेणु रूप में परिवर्तित हो जाती हैं।