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फंगस, एलर्जी और हर्पीज का हमला, बढ़े त्वचा रोगी

Tue, 10 May 2022 10:45 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2022 10:45 PM IST
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Fungus, Allergy and Herpes Attacks, Increased Skin Patients
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में लगी मरीजों की कतार। संवाद - फोटो : ETAH
एटा। गर्मी बढ़ते ही त्वचा रोगियों की संख्या में इजाफा हो गया है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर दिन औसतन 100 मरीज फंगस, एलर्जी और हर्पीज की समस्या के पहुंच रहे हैं। राहत यह है कि कॉलेज में अब त्वचा रोग विशेषज्ञ मिल रहे हैं, लेकिन मुसीबत भी है कि दवा अधूरी ही मिल पा रही है। मरीजों को बाहर से 200 रुपये तक की दवा खरीदनी पड़ रही है।
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दाद-खाज, खुजली के साथ ही फंगस, एलर्जी और हर्पीज की समस्या के मरीजों की कतार लग रही है। फंगल संक्रमण में गोल चकत्ते, सिर में दाद और बाल गिरना, एथलीट फुट, पेट व जांघ के बीच में दाद, त्वचा का रंग बदल जाना, त्वचा पर लाल रंग के धब्बे आदि लक्षण बता रहे हैं। यह बीमारी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने और जीवनशैली के बदलाव से फैलती है। मंगलवार को सुबह 8.30 बजे से मरीजों का मेडिकल पहुंचना शुरू हो गया। कुछ ही देर में अधिक मरीज होने पर लंबी कतार लग गई। भीषण गर्मी के बीच सभी चिकित्सक को पहले दिखाने की जल्दबाजी में थे। दोपहर एक बजे तक मरीजों के आने का सिलसिला बना रहा।
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बोले चिकित्सक, पसीना कम आने दें
फंगल संक्रमण से बचाव के लिए कोशिश करें कि पसीना कम आए। तंग कपड़े नहीं पहनें। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। फंगस का जीवाणु ज्यादातर शरीर के नमी वाले हिस्सों में फैलता है। जैसे पैर की उंगलियां, जांघ, बगल और यौनांगों आदि पर जल्द प्रभाव डालता है। इन अंगों की सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। - डॉ. तनवीर अहमद, त्वचा रोग विशेषज्ञ
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हर्पीज एक वायरल बीमारी है। इसके दो प्रकार हैं। एचएसवी-1 में मुंह के आसपास पानी वाले छाले पड़ते हैं। जबकि एचएसवी-2 में जननांग के आसपास के क्षेत्र को प्रभावित करता है। फफोले फूटने के बाद घाव भी हो जाते हैं जो अधिक पीड़ादायक होते हैं। हर्पीज होने पर फफोलो को फोड़े नहीं। इससे निकलने वाले पानी से संक्रमण फैलता है। हर्पीज का इलाज उपलब्ध है, चिकित्सक से सलाह लेकर उपचार कराने से राहत मिल जाती है। - डॉ. दिगंबर सिंह यादव, त्वचा रोग विशेषज्ञ
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