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चार लोगों ने दस लीटर पानी से काटे छह दिन

Tue, 08 Mar 2022 11:41 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 11:41 PM IST
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Four people spent six days with ten liters of water
परिवार को जानकारी देते यूक्रेन से घर लौटे अभिषेक कुशवाह। संवाद - फोटो : ETAH
एटा। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा जेल रोड निवासी अभिषेक कुशवाह मंगलवार को लौट आए। बताया कि किराए के फ्लैट में चार छात्र रहते थे। 24 फरवरी को रूस का हमला होने के बाद पानी की आपूर्ति आना बंद हो गई। बाजार में भी पांच-पांच लीटर की पानी की दो बोतलें मिलीं। इनसे चारों लोगों ने बहुत मुश्किल से छह दिन काटे। यह भी बताया कि एक दिन ट्रेन पकड़ने के लिए पांच किमी तक दौड़े, लेकिन उसमें सवार यूक्रेनियन ने उन्हें नहीं चढ़ने दिया। इसके अलावा निधौली रोड निवासी अभिषेक शाक्य भी आ गए हैं।
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अभिषेक कुशवाह यूक्रेन के डेनिप्रो में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। वह तीसरी वर्ष में हैं। बताया कि 24 फरवरी से माहौल अस्थिर होने लगा था। वहां कुछ दूरी पर दो विस्फोट हुए, जिससे सभी छात्र काफी डर गए थे। हालांकि इसके बाद डेनिप्रो में कोई धमाका नहीं हुआ, लेकिन पास के शहर खारकीव और जैफ्रोजिया में धमाके हो रहे थे। जिसके चलते खतरा बना हुआ था। प्रशासन हवाई हमलों के मद्देनजर सायरन बजाता था। जिसके बजते ही सभी को बंकर में जाना होता था। हम आठ छात्रों ने पोलैंड बॉर्डर पहुंचने की योजना बनाई। जिसके लिए ल्वीब जाना होता है। वहां की ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे, लेकिन ट्रेन में पहले से भीड़ थी और उसमें सवार यूक्रेन नागरिक चाकू लिए हुए गेट पर ही खड़े थे, जो हम लोगों को नहीं चढ़ने दे रहे थे।
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इसी दौरान ट्रेन छूट गई। फिर भी हम लोग उसके पीछे भागते रहे। करीब पांच किमी तक दौड़ते हुए आगे निकल आए। बाद में हिम्मत टूट गई और लौटे। रात होने की वजह से खाना भी नहीं मिला और भूखे सोना पड़ा। बताया कि 1 मार्च को बस से रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। यहां चेकिंग के दौरान करीब चार घंटे का वक्त लगा जो बहुत भारी पड़ा। माइनस 7 डिग्री तापमान में खुले में खड़ा रहना पड़ा था। रोमानियां में प्रवेश मिलने के बाद वहां भारतीय दूतावास और गैर सरकारी संगठनों की ओर से बढ़िया इंतजाम किए गए थे। सोमवार रात करीब 9.30 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे। यहां से मामा कार द्वारा लेने के लिए गए थे। मंगलवार तड़के 3 बजे एटा पहुंच गए। वहीं निधौली रोड निवासी अभिषेक शाक्य ने बताया कि वह पांचवी वर्ष के मेडिकल छात्र हैं। डेनिप्रो में ही पढ़ रहे हैं। हालात खराब होने के बाद रोमानिया पहुंच गए थे। फ्लाइट मिलने पर सोमवार रात दिल्ली पहुंचे। एटा से पिता नरेंद्र सिंह शाक्य और भाई मेजर डॉ. आशीष शाक्य लेने के लिए पहुंचे।
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