{"_id":"583330b14f1c1bb504b3a4cf","slug":"farmers-are-facing-problem-due-to-notbandi","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्रय केंद्रों पर सिर्फ 38 किसान लाए धान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्रय केंद्रों पर सिर्फ 38 किसान लाए धान
ब्यूरो, अमर उजाला एटा
Updated Mon, 21 Nov 2016 11:06 PM IST
विज्ञापन
किसान का धान
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोट बंदी का असर धान खरीद पर भी दिख रहा है। बैंकों में लग रही लंबी-लंबी लाइन को देखते हुए किसान क्रयकेंद्रों पर धान बेचकर आनलाइन भुगतान लेने से बच रहे हैं। यही कारण है कि ज्यादातर क्रयकेंद्र अभी भी सूने पड़े हैं।
शासन ने धान खरीद का भुगतान इस बार ऑनलाइन निर्धारित किया है। इसके तहत धान की कीमत सीधे किसान के खाते मेें जाती है। इधर, नोट बंदी के चलते बैंकों पर इन दिनों लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैैं। ऐसे में किसान धान बिक्री का धन बैंकों से निकालने के लिए कतारों में लगने से कतरा रहा है।
वहीं कृषि विभाग के आंकड़े देखें तो इस बार 3060 हेक्टेयर में 177480 मीट्रिक टन धान की पैदावार हुई है। जबकि 15125 हेक्टेयर में 438625 मीट्रिक टन ए ग्रेड किस्म के धान की पैदावार हुई है। इसके बाद भी अभी तक क्रय केंद्रों पर धान की खरीद में तेजी नहीं आ सकी है।
विज्ञापन
खाद्य विभाग ही ऐसा है जिसने अपने चार केंद्रों पर 3500 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 354.25 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। यह धान 38 किसानों से खरीदा गया है। जबकि पीसीएफ के 9 केंद्रों पर 2750 मीट्रिक टन एवं भारतीय खाद्य निगम के एक केंद्र पर 200 मीट्रिक टन के सापेक्ष एक भी दाना धान नहीं खरीदा जा सका है। इन दोनों संस्थाओं के क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। जबकि जनपद में धान खरीद का लक्ष्य सात हजार मीट्रिक टन दिया गया है। इनसेट
मांगा गया ब्योरा भी बन रहा बाधा
धान की ऑनलाइन खरीद के दौरान किसानों से 20 बिन्दुओं पर सूचनाएं मांगी जा रहीं हैं। उनसे जनपद का नाम, तहसील, ब्लॉक, ग्रामसभा, पिता का नाम, मोबाइल नंबर, फोटो युक्त पहचान पत्र का विवरण, बैंक का नाम, खाता संख्या, आईएफएसई कोड, कुल रकबा, संभावित मात्रा, पंजीयन तिथि आदि की जानकारी ली जा रही है। ब्योरा नहीं देने वाले किसान की उपज नहीं खरीदी जाती है।
धान खरीद में अभी तक खाद्य निगम ने ही खरीद की है। अभी तो आवक शुरू ही हुई है। शुरूआत अच्छी है। लक्ष्य पूरा होने की पूरी संभावना है- जेया अहमद खाद्य विपणन अधिकारी
विज्ञापन
शासन ने धान खरीद का भुगतान इस बार ऑनलाइन निर्धारित किया है। इसके तहत धान की कीमत सीधे किसान के खाते मेें जाती है। इधर, नोट बंदी के चलते बैंकों पर इन दिनों लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैैं। ऐसे में किसान धान बिक्री का धन बैंकों से निकालने के लिए कतारों में लगने से कतरा रहा है।
विज्ञापन
वहीं कृषि विभाग के आंकड़े देखें तो इस बार 3060 हेक्टेयर में 177480 मीट्रिक टन धान की पैदावार हुई है। जबकि 15125 हेक्टेयर में 438625 मीट्रिक टन ए ग्रेड किस्म के धान की पैदावार हुई है। इसके बाद भी अभी तक क्रय केंद्रों पर धान की खरीद में तेजी नहीं आ सकी है।
विज्ञापन
खाद्य विभाग ही ऐसा है जिसने अपने चार केंद्रों पर 3500 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 354.25 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। यह धान 38 किसानों से खरीदा गया है। जबकि पीसीएफ के 9 केंद्रों पर 2750 मीट्रिक टन एवं भारतीय खाद्य निगम के एक केंद्र पर 200 मीट्रिक टन के सापेक्ष एक भी दाना धान नहीं खरीदा जा सका है। इन दोनों संस्थाओं के क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। जबकि जनपद में धान खरीद का लक्ष्य सात हजार मीट्रिक टन दिया गया है। इनसेट
मांगा गया ब्योरा भी बन रहा बाधा
धान की ऑनलाइन खरीद के दौरान किसानों से 20 बिन्दुओं पर सूचनाएं मांगी जा रहीं हैं। उनसे जनपद का नाम, तहसील, ब्लॉक, ग्रामसभा, पिता का नाम, मोबाइल नंबर, फोटो युक्त पहचान पत्र का विवरण, बैंक का नाम, खाता संख्या, आईएफएसई कोड, कुल रकबा, संभावित मात्रा, पंजीयन तिथि आदि की जानकारी ली जा रही है। ब्योरा नहीं देने वाले किसान की उपज नहीं खरीदी जाती है।
धान खरीद में अभी तक खाद्य निगम ने ही खरीद की है। अभी तो आवक शुरू ही हुई है। शुरूआत अच्छी है। लक्ष्य पूरा होने की पूरी संभावना है- जेया अहमद खाद्य विपणन अधिकारी