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यूपी में फर्जी मेडिकल काॅलेज: चपरासी को बनाया फैकल्टी, छात्रों से ऐंठी रकम; रिटायर्ड CMO के बेटे का पूरा खेल

Sun, 20 Sep 2026 11:20 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: Arun Parashar Updated Sun, 20 Sep 2026 11:20 AM IST
सार

यूपी के एटा जिले में फर्जी मेडिकल काॅलेज और यूनिवर्सिटी का भंडाफोड़ हुआ है। शातिर अब तक छात्रों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं। मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें रिटायर्ड  सीएमओ का बेटा भी शामिल है, जो फर्जी मेडिकल का संचालन कर रहा था।

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विस्तार

एटा में दो लाख रुपये की फिरौती के लिए भाई के अपहरण की झूठी सूचना के बाद पुलिस जांच में मामला फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नेटवर्क तक पहुंच गया है। मारहरा पुलिस ने जांच के बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि जिस बीएस नामक व्यक्ति के नाम पर मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रेशन का दावा किया गया है वह चाय बेचता है।
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मास्टर माइंड सतेंद्र कुमार उर्फ कृष्णपाल वर्ष 2022 से फर्जी खोले गए बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी के नाम पर विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के नाम पर छात्रों से रकम लूट रहा था। बदले में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी मार्कशीट, आईडी कार्ड, प्रवेश फार्म, हाजिरी शीट, परीक्षा पुस्तिकाएं, जाली प्रश्नपत्र, फीस रसीदें, मोहर, लेटर पैड, लैपटॉप और चार बैंकों के फर्जी चेक समेत अन्य सामग्री बरामद की है।
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एएसपी श्वेताभ पांडेय ने प्रेसवार्ता में बताया कि 16 सितंबर की सुबह करीब सात बजे महमूदपुर नगरिया निवासी रामसेवक ने पीआरवी को सूचना दी कि उसके भाई सतेंद्र कुमार को तीन लोग बीएस कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी से अगवा कर ले गए हैं। उसने अपहर्ताओं द्वारा दो लाख रुपये की फिरौती मांगे जाने का आरोप भी लगाया। सतेंद्र की पत्नी की तहरीर पर मारहरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
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गंभीरता को देखते हुए चार पुलिस टीमों को लगाया गया। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई तो सतेंद्र की लोकेशन आगरा में मिली। पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर उसे सकुशल बरामद किया। एएसपी ने बताया कि पूछताछ में अपहरण की कहानी झूठी और भ्रामक निकली। सतेंद्र ने छात्रों से लिए गए रुपये वापस करने के दबाव के बीच खुद के अपहरण की साजिश रची थी। कुछ छात्रों का प्रवेश रद्द होने के बाद वे रुपये वापस मांग रहे थे।

सतेंद्र ने आगरा में रुपये देने की बात कही और छात्रों के साथ ही वहां चला गया। इस बीच उसने अपने भाई रामसेवक से अपहरण की सूचना देने को कहा। आगरा पहुंचने के बाद छात्रों के मोबाइल से अपने भाई को फोन कर दो लाख रुपये की मांग कराई। अपहरण के झूठ का खुलासा होने के बाद पुलिस की जांच कॉलेज के संबंध में आगे बढ़ी। पुलिस को कॉलेज से 16 फर्जी आईडी कार्ड, आवेदन फार्म, हाजिरी शीट, फीस रसीदें, परीक्षा पुस्तिकाएं, जाली प्रश्नपत्र, फर्जी मार्कशीट और मोहर मिली हैं। फर्जी मोहर लगे लेटर पैड और यूनिवर्सिटी कोड वाली प्रचार सामग्री भी बरामद की है। यहां बीफार्मा, डीफार्मा, बीएससी नर्सिंग, बीएएमएम, जीएनएम, एएनएम, डीएमएमटी, बीएमएलटी समेत कई फर्जी कोर्स संचालित किए जा रहे थे।

एएसपी ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि जिस बीएस नामक व्यक्ति के नाम पर कॉलेज को रजिस्टर्ड दिखाया गया है, वह चाय बेचता है। उस व्यक्ति का पूरा नाम भगवान दास है और वह गांव धरपसी थाना मारहरा का निवासी है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि उसके नाम और पहचान का इस्तेमाल आखिर क्यों की गई। पुलिस ने सतेंद्र कुमार निवासी महमूदपुर नगरिया, गौरव अग्रवाल निवासी पंखा वाला बाग नदरई गेट कासगंज भगवान दास निवासी धरपसी, नरेंद्र उर्फ पप्पू निवासी मोहल्ला पैठ और मोहम्मद शरीफ कुरैशी निवासी मोहल्ला गफूरगंज मारहरा को गिरफ्तार किया है।


 

300 रुपये की दिहाड़ी पर रखी थी फैकल्टी
फर्जी बीएस मेडिकल कॉलेज व यूनिवर्सिटी की जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। मास्टरमाइंड सतेंद्र कुमार उर्फ कृष्णपाल संगठित गिरोह बनाकर चार साल से विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा था और उनसे मोटी रकम ऐंठ रहा था। फैकल्टी को भी 300 रुपये की दिहाड़ी पर रखा गया था। गिरफ्तार पांचों आरोपियों में 75 साल का एक वृद्ध भी शामिल है जिसे कागजों में फैकल्टी दर्शाया गया था और उसे 300 रुपये की दिहाड़ी मिल रही थी। एएसपी श्वेताभ पांडेय ने बताया कि मामले में पुलिस को बड़ी संख्या में शैक्षणिक दस्तावेज भी मिले हैं। बरामद सामग्री से विद्यार्थियों के प्रवेश से लेकर परीक्षा और परिणाम तक का रिकॉर्ड तैयार किया जाता था।

आरोपियों के पास से एक लैपटॉप और चार बैंकों के फर्जी चेक भी बरामद किए गए हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक संबंधी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद शरीफ कुरैशी ने कहा कि मैं कोई प्रोफेसर या अध्यापक नहीं, बल्कि चपरासी हूं। मुझे 300 रुपये दिहाड़ी पर रखा गया है जबकि कागजों में उसका नाम फैकल्टी के रूप में दर्ज है। कासगंज के पंखा वाला बाग निवासी आरोपी गौरव अग्रवाल के पिता सुभाष चंद्र अग्रवाल सेवानिवृत्त सीएमओ हैं। गौरव फर्जी बीएस मेडिकल कॉलेज का संचालन करता था। मोहल्ला पैठ, मारहरा निवासी आरोपी नरेंद्र उर्फ पप्पू भी कागजों में फैकल्टी के रूप में दर्ज है। पुलिस अन्य आरोपियों और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की पड़ताल कर रही है।

 

कितने छात्रों से ऐंठी रकम, की जा रही जांच
जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कॉलेज में अब तक कितने छात्र प्रवेश ले चुके हैं। उनसे कितनी रकम वसूली गई और फर्जी मार्कशीट व अन्य दस्तावेज का इस्तेमाल नौकरी, आगे की पढ़ाई या अन्य किसी उद्देश्य में किया गया या नहीं। इस सत्र में कॉलेज में कुल 54 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है।

दो मामले पहले से दर्ज
आरोपियों के खिलाफ पूर्व में भी रुपयों की हेराफेरी से जुड़े दो मामले दर्ज हैं, जिनमें आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। अब पुलिस आरोपियों की अवैध संपत्ति का पता लगाकर उसे कुर्क करने की तैयारी कर रही है।

चार साल से चल रहा था फर्जी विश्वविद्यालय, सोता रहा सिस्टम
चार साल से चल रहे बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। छात्रों ने इसकी शिकायतें भी की लेकिन न तो पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया न हीं अन्य अधिकारियों ने। फीस लेकर डिग्री नहीं देने के मामले में वर्ष 2025 में मुख्य आरोपी सतेंद्र और फैकल्टी नरेंद्र के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गई, लेकिन पुलिस ने जांच में लापरवाही दिखाते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी। अब प्रबंधक के अपहरण के फर्जी मामले के बाद इसका भंडाफोड़ हुआ है।

सतेंद्र ने वर्ष 2022 में इस फर्जी मेडिकल कॉलेज की शुरुआत की। एटा, कासगंज, अलीगढ़, आगरा, हाथरस के भोले-भाले छात्रों को विभिन्न कोर्सों के सपने दिखाकर दाखिला दिलाया। इस सत्र में 54 छात्र पंजीकृत थे। इससे पहले भी सैकड़ों छात्रों को यहा दाखिला दिखाकर करीब दो करोड़ रुपये वह ऐंठ चुका है। फीस लेकर डिग्री नहीं देने के मामले में दो बार वर्ष 2025 में मारहरा थाने में शिकायतें भी हुई, लेकिन जांच में पुलिस ने लीपापोती कर दी। पुलिस ने तह तक जांच नहीं की और आरोपी सतेंद्र और नरेंद्र के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में चार्जशीट लगा दी। उस समय अगर पुलिस गंभीरता से जांच करती तो सैकड़ों बच्चों के भविष्य बर्बाद होने से बच सकता था।

पूर्व में रुपयों के धोखाधड़ी की दो शिकायतें पुलिस ने दर्ज की थीं। जिनमें चार्जशीट लग चुकी है। अब गंंभीरता से जांच होने पर फर्जी विश्वविद्यालय के संचालन का भंडाफोड़ किया गया। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर समेत अन्य कार्रवाई भी की जाएगी। -श्वेताभ पांडेय, एएसपी एटा


 
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