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बारिश का असर : मरीजों के इंतजार में बैठे रहे डॉक्टर
Wed, 23 Aug 2023 11:43 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Wed, 23 Aug 2023 11:43 PM IST
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एटा। मंगलवार की रात से शुरू हुई बारिश बुधवार दोपहर 12 बजे तक हाेती रही। इसका असर मेडिकल कॉलेज में भी देखा गया। यहां ओपीडी में मरीजों की संख्या बहुत कम रही। सिर्फ 200 पर्चे बने और चिकित्सक मरीजों का इंतजार करते नजर आए।
आम दिनों में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 1200 से 1400 मरीजों के पर्चे बनते हैं। चिकित्सकों के कक्षों के बाहर मरीजों सहित तीमारदारों की लाइन लगी रहती है। कभी-कभी तो पहले दिखाने के लिए मरीजों में धक्का-मुक्की तक हो जाती है, लेकिन बुधवार को बारिश ने मरीजों को रोक दिया। प्रतिदिन की तरह जूनियर रेजीडेंट मेडिकल कॉलेज पहुंचकर अपने कक्षों में बैठ गए। फिजीशियन कक्ष में मरीजों के इंतजार में बैठे चिकित्सक माधवेंद्र ने बताया कि दोपहर एक बजे तक 90 मरीजों का उपचार किया गया। मरीज कम आए, इंतजार में बैठे हैं।
कक्ष में सीनियर रेजीडेंट नहीं थे। त्वचा रोग विभाग में सीनियर रेजीडेंट डॉ. प्रीती कुशवाह मरीजों के इंतजार में बैठी हुईं थीं। ऐसी ही स्थिति नेत्र रोग विभाग की थी। यहां भी चिकित्सक मरीजों के इंतजार में थे। एमसीएच विंग में बाल रोग विभाग में कुल 22 बच्चों के इलाज के लिए परिजन उन्हें लेकर पहुंचे। जबकि यहां प्रतिदिन 160 से 170 तक मरीज पहुंचते हैं।
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आम दिनों में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 1200 से 1400 मरीजों के पर्चे बनते हैं। चिकित्सकों के कक्षों के बाहर मरीजों सहित तीमारदारों की लाइन लगी रहती है। कभी-कभी तो पहले दिखाने के लिए मरीजों में धक्का-मुक्की तक हो जाती है, लेकिन बुधवार को बारिश ने मरीजों को रोक दिया। प्रतिदिन की तरह जूनियर रेजीडेंट मेडिकल कॉलेज पहुंचकर अपने कक्षों में बैठ गए। फिजीशियन कक्ष में मरीजों के इंतजार में बैठे चिकित्सक माधवेंद्र ने बताया कि दोपहर एक बजे तक 90 मरीजों का उपचार किया गया। मरीज कम आए, इंतजार में बैठे हैं।
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कक्ष में सीनियर रेजीडेंट नहीं थे। त्वचा रोग विभाग में सीनियर रेजीडेंट डॉ. प्रीती कुशवाह मरीजों के इंतजार में बैठी हुईं थीं। ऐसी ही स्थिति नेत्र रोग विभाग की थी। यहां भी चिकित्सक मरीजों के इंतजार में थे। एमसीएच विंग में बाल रोग विभाग में कुल 22 बच्चों के इलाज के लिए परिजन उन्हें लेकर पहुंचे। जबकि यहां प्रतिदिन 160 से 170 तक मरीज पहुंचते हैं।
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