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गल्ला मंडी खुली, पर बंदी जैसे हालात
Amar Ujala
Updated Thu, 15 Dec 2016 11:49 PM IST
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गल्ला मंडी खुली, पर बंदी जैसे हालात
- फोटो : Amar Ujala
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गल्ला मंडी में नकदी की समस्या को लेकर गल्ला मंडी में 21 दिनों तक हड़ताल चली। कारोबारियों ने चेक से भुगतान करने की सहमति बनाते हुए गल्ला मंडी खोली तो किसान चेक से भुगतान लेने का राजी नहीं हैं। इससे गल्ला मंडी में माल की आवक कम है।
बता दें कि गल्ला मंडी में नोट बंदी से पूर्व डेढ़ से दो करोड़ का भुगतान प्रतिदिन किसानों को दिया जा रहा था। गल्ले की आवक भी 6 से 8 हजार क्विंटल तक बनी हुई थी। इधर, नोटबंदी से जरूरत के मुताबिक बैंकों से कैश की निकासी नहीं होने से व्यापारियों ने हड़ताल कर दी।
21 दिनों में बैंकों से भी कोई राहत नहीं मिली। व्यापार ठप होने से परेशान व्यापरियों ने किसानों और श्रमिकों के हितों को देखते हुए हड़ताल खत्म कर दी। इसके बाद भी मंडी में बंदी जैसे हालात बने हैं। गल्ला मंडी में नकदी की समस्या पूर्व की तरह बरकरार है। इस दौरान करीब 200 क्विंटल गल्ला ही मंडी आया। गल्ला लेकर आए किसानों को भी नकदी की समस्या का सामना करना पड़ा। किसानों को चेक से भुगतान दिया गया, लेकिन वे चेक लेने को तैयार नहीं हैं।
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बहरोजपुर के किसान तुकाराम आदि अन्य का कहना है कि वे अपनी रोजमर्रा के खर्च की जरूरत के लिए अनाज बेच रहे हैं। बैंकों में पैसा नहीं है तो वे चेक का क्या करेंगे? इससे गल्ला कारोबारियों के सामने कोराबार की समस्या बनी हुई है। गल्ला कारोबारी मुकेश गुप्ता का कहना है कि गल्ला मंडी के हालात बंद जैसे हैं।
बैंक निर्धारित सीमा की नकदी भी नहीं दे पा रहा। सरकार के निर्णय से कारोबार बर्बाद हो गया है। कारोबारी हृदेश वार्ष्णेय का कहना है कि किसान चेक नहीं ले रहे हैं। बैंकों से भी पैसा नहीं मिल रहा है।
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बता दें कि गल्ला मंडी में नोट बंदी से पूर्व डेढ़ से दो करोड़ का भुगतान प्रतिदिन किसानों को दिया जा रहा था। गल्ले की आवक भी 6 से 8 हजार क्विंटल तक बनी हुई थी। इधर, नोटबंदी से जरूरत के मुताबिक बैंकों से कैश की निकासी नहीं होने से व्यापारियों ने हड़ताल कर दी।
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21 दिनों में बैंकों से भी कोई राहत नहीं मिली। व्यापार ठप होने से परेशान व्यापरियों ने किसानों और श्रमिकों के हितों को देखते हुए हड़ताल खत्म कर दी। इसके बाद भी मंडी में बंदी जैसे हालात बने हैं। गल्ला मंडी में नकदी की समस्या पूर्व की तरह बरकरार है। इस दौरान करीब 200 क्विंटल गल्ला ही मंडी आया। गल्ला लेकर आए किसानों को भी नकदी की समस्या का सामना करना पड़ा। किसानों को चेक से भुगतान दिया गया, लेकिन वे चेक लेने को तैयार नहीं हैं।
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बहरोजपुर के किसान तुकाराम आदि अन्य का कहना है कि वे अपनी रोजमर्रा के खर्च की जरूरत के लिए अनाज बेच रहे हैं। बैंकों में पैसा नहीं है तो वे चेक का क्या करेंगे? इससे गल्ला कारोबारियों के सामने कोराबार की समस्या बनी हुई है। गल्ला कारोबारी मुकेश गुप्ता का कहना है कि गल्ला मंडी के हालात बंद जैसे हैं।
बैंक निर्धारित सीमा की नकदी भी नहीं दे पा रहा। सरकार के निर्णय से कारोबार बर्बाद हो गया है। कारोबारी हृदेश वार्ष्णेय का कहना है कि किसान चेक नहीं ले रहे हैं। बैंकों से भी पैसा नहीं मिल रहा है।
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