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चिकित्सक हड़ताल पर, मरीज बेहाल
ब्यूरो, अमर उजाला, एटा
Updated Fri, 08 May 2015 11:40 PM IST
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आईएमए की शुक्रवार को हुई हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं गड़बड़ा गईं। चिकित्सकों पर हमले और विभागीय शोषण के विरोध में जिले में चिकित्सकों ने प्रदर्शन किया। सभी अस्पताल, क्लीनिक और कुछ मेडिकल स्टोर बंद रहे। मरीजों को काफी दिक्कत हुई। प्रदर्शन के बाद चिकित्सकों ने डीएम को ज्ञापन सौंपा।
आईएमए के आह्वान पर प्रदेश व्यापी चिकित्सक आंदोलन का असर जिले में भी दिखाई दिया। शुक्रवार को क्लीनिक नहीं खोले। हाथों में विरोध पट्टिकाएं लिए चिकित्सक कचहरी रोड पर एकत्रित हुए। नारे लगाते हुए कलक्ट्रेट पहुंच प्रदेश भर में चिकित्सकों पर बढ़ रहे हमलों पर आक्रोश जताया। बोले आज प्रदेशीय चिकित्सक सुरक्षित नहीं हैं। उन पर जानलेवा हमले हो रहे हैं। वहीं मनमाने तरीके से चिकित्सीय सेवाओं पर थोपे जा रहे अनावश्यक नियम कानून परेशानियां बढ़ा रहे हैं।
पीसीपीएनडीटी एक्ट की मनमानी व्याख्या से चिकित्सकों का उत्पीड़न बढ़ा है। आईएमए के अध्यक्ष डा. एचवी बिसारिया, सचिव डा. ललित वार्ष्णेय ने इलाहाबाद के चिकित्सक रोहित गुप्ता पर हुए हमले, गाजीपुर के चिकित्सक डा. राजेश सिंह की पत्नी पर की गई प्राथमिकी, कानपुर की चिकित्सक डा. आरती लालचंदानी के निलंबन का मुद्दा भी उठाया। इसके बाद ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
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प्रदर्शन में आईएमए के अलावा नीमा, होम्योपैथिक एसोसिएशन, दंत चिकित्सक संघ के दर्जनों चिकित्सक शामिल थे। इनमें पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष डा. निर्मल जैन, डा. राजेश सक्सेना, डा. एके सक्सेना, डा. हरीश गुप्ता, डा. अरुण गौड़, डा. पीके मितल, डा. बीके गुप्ता, डा. एनपी सिंह, डा. विशाल गुप्ता, डा. पवन मिश्रा आदि प्रमुख थे।
दवा ही दे दो डाक्टर साहब
शुक्रवार का दिन मरीजों के लिए आफत भरा रहा। चिकित्सक हड़ताल पर तो मरीज भटकते रहे। अस्पताल, क्लीनिक पहुंचे तो वहां शटर पड़े थे। वृद्घों को परिवारीजन गोद में उठाए एक से दूसरे चिकित्सक के यहां चक्कर काटते दिखे। तो कुछ ने प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों से कहा अरे दवा ही बता दें डाक्टर साहब। दोपहर तक क्लीनिक न खुलने पर परेशान लोग जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकांश ने मेडिकल स्टोर से दवा लेकर ही काम चलाया।
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आईएमए के आह्वान पर प्रदेश व्यापी चिकित्सक आंदोलन का असर जिले में भी दिखाई दिया। शुक्रवार को क्लीनिक नहीं खोले। हाथों में विरोध पट्टिकाएं लिए चिकित्सक कचहरी रोड पर एकत्रित हुए। नारे लगाते हुए कलक्ट्रेट पहुंच प्रदेश भर में चिकित्सकों पर बढ़ रहे हमलों पर आक्रोश जताया। बोले आज प्रदेशीय चिकित्सक सुरक्षित नहीं हैं। उन पर जानलेवा हमले हो रहे हैं। वहीं मनमाने तरीके से चिकित्सीय सेवाओं पर थोपे जा रहे अनावश्यक नियम कानून परेशानियां बढ़ा रहे हैं।
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पीसीपीएनडीटी एक्ट की मनमानी व्याख्या से चिकित्सकों का उत्पीड़न बढ़ा है। आईएमए के अध्यक्ष डा. एचवी बिसारिया, सचिव डा. ललित वार्ष्णेय ने इलाहाबाद के चिकित्सक रोहित गुप्ता पर हुए हमले, गाजीपुर के चिकित्सक डा. राजेश सिंह की पत्नी पर की गई प्राथमिकी, कानपुर की चिकित्सक डा. आरती लालचंदानी के निलंबन का मुद्दा भी उठाया। इसके बाद ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
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प्रदर्शन में आईएमए के अलावा नीमा, होम्योपैथिक एसोसिएशन, दंत चिकित्सक संघ के दर्जनों चिकित्सक शामिल थे। इनमें पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष डा. निर्मल जैन, डा. राजेश सक्सेना, डा. एके सक्सेना, डा. हरीश गुप्ता, डा. अरुण गौड़, डा. पीके मितल, डा. बीके गुप्ता, डा. एनपी सिंह, डा. विशाल गुप्ता, डा. पवन मिश्रा आदि प्रमुख थे।
दवा ही दे दो डाक्टर साहब
शुक्रवार का दिन मरीजों के लिए आफत भरा रहा। चिकित्सक हड़ताल पर तो मरीज भटकते रहे। अस्पताल, क्लीनिक पहुंचे तो वहां शटर पड़े थे। वृद्घों को परिवारीजन गोद में उठाए एक से दूसरे चिकित्सक के यहां चक्कर काटते दिखे। तो कुछ ने प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों से कहा अरे दवा ही बता दें डाक्टर साहब। दोपहर तक क्लीनिक न खुलने पर परेशान लोग जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकांश ने मेडिकल स्टोर से दवा लेकर ही काम चलाया।