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सेहत की बातः समोसे और पकौड़े का जायका ला सकता है मुसीबत, हार्ट अटैक से लेकर कैंसर तक का खतरा
Mon, 13 Feb 2023 07:07 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Mon, 13 Feb 2023 07:07 PM IST
सार
अधिक तले-भुने पदार्थ खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ सका है। डॉक्टर के मुताबित, खाद्य तेल को बार-बार गर्म करने से प्रोटीन, वसा जल जाता है और पौष्टिकता खत्म हो जाती है। इससे पाचन में दिक्कत होती है।
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समोसे
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पेट की समस्या से पीड़ित मरीजों में लगातार इजाफा हो रहा है। इस पर डॉक्टर ने विशेष सलाह दी है। अन्यथा कैंसर तक की समस्या पैदा हो सकती है। डॉक्टर के मुताबिक तेल को बार-बार गर्म करके बनाए जा रहे पकवानों को खाने से सेहत पर भारी असर पड़ रहा है। इससे पेट में गैस, अपच, कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर की समस्याएं हो रही हैं। डॉक्टर की मानें तो यह खाना किडनी की खराबी से लेकर कैंसर तक की बीमारी पैदा कर सकता है।
आजकल फास्ट फूड का आलम का यह है कि गर्म समोसे, पकौड़े का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। दुकानों, ठेलों पर सुबह से लोगों की भीड़ लगी रहती है। इन्हें खरीदते समय लोग जरा सा भी ध्यान नहीं देते कि ये उनकी सेहत पर किस कदर भारी पड़ सकते हैं। कई दुकानदार बार-बार एक ही तेल को गर्म करके पकवान बनाते हैं।
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कहा कि तेल को पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इससे कैंसर सेल विकसित हो जाते हैं। पाचन क्रिया प्रभावित होने से लिवर भी खराब हो जाता है। हानिकारक पदार्थ किडनी में जमा हो जाते हैं। इससे किडनी फेल हो सकती है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में आने वाले 40 फीसदी मरीज तो पेट में गैस, अपच, कब्ज आदि समस्या लेकर आते हैं। इनमें ज्यादातर लोग वो होते हैं, जो लंबे समय से बाहर का तला-भुना खा रहे होते हैं।
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आजकल फास्ट फूड का आलम का यह है कि गर्म समोसे, पकौड़े का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। दुकानों, ठेलों पर सुबह से लोगों की भीड़ लगी रहती है। इन्हें खरीदते समय लोग जरा सा भी ध्यान नहीं देते कि ये उनकी सेहत पर किस कदर भारी पड़ सकते हैं। कई दुकानदार बार-बार एक ही तेल को गर्म करके पकवान बनाते हैं।
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.....इस तेल को खाने से कैंसर सेल विकसित हो जाते हैं
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. मानवेंद्र प्रताप ने बताया कि कई बार तेल गर्म करने से उसमें ट्रांस फैटी एसिड बनना शुरू हो जाता है। ये एसिड, तेल को हर बार गर्म करने पर पांच से दस फीसदी बढ़ता जाता है। सीएमएस महिला विंग के डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि बार-बार तेल गर्म करने से प्रोटीन, वसा जल जाता है और पौष्टिकता खत्म हो जाती है। इससे पाचन में दिक्कत होती है।
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कहा कि तेल को पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इससे कैंसर सेल विकसित हो जाते हैं। पाचन क्रिया प्रभावित होने से लिवर भी खराब हो जाता है। हानिकारक पदार्थ किडनी में जमा हो जाते हैं। इससे किडनी फेल हो सकती है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में आने वाले 40 फीसदी मरीज तो पेट में गैस, अपच, कब्ज आदि समस्या लेकर आते हैं। इनमें ज्यादातर लोग वो होते हैं, जो लंबे समय से बाहर का तला-भुना खा रहे होते हैं।