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कोविड जांच न होने पर गई श्वांस के रोगी की जान
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एटा। कोरोना की जांच न होने पर एक सांस रोगी की जान चली गई। परिजनों का कहना है डायलिसिस के कर्मचारियों द्वारा कोरोना की जांच कराने को कहा गया, लेकिन मंगलवार की शाम जिला अस्पताल में मरीज की जांच नहीं हो पाई। इससे समय पर उपचार न मिलने से उसकी जान चली गई।
अवागढ़ निवासी 52 वर्षीय सतपाल सिंह सांस के रोगी थे। वहीं उनके जोड़ों में भी दर्द होता था। सतपाल के बेटे रोहित ने बुधवार को जिला अस्पताल में बताया वह पिता को फरीदाबाद जोड़ों में दर्द की दवा दिलाने गए थे। वहां से लौटते समय उनकी सांस उखड़ गई। उन्होंने बताया पिता सांस के रोग से ग्रसित थे इसी के चलते जिला अस्पताल में उनकी डायलिसिस होती थी।
मंगलवार की शाम वह जिला अस्पताल में पिता को डायलिसिस कराने के लिए लेकर आए। जहां डायलिसिस में तैनात टीम द्वारा कोविड की जांच कराने को कहा गया। रोहित ने बताया उन्होंने अस्पताल में कोरोना की जांच कराने की बात कही, लेकिन कर्मियों ने बताया कि अब लैब बंद हो गई है।
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बुधवार को जांच हो पाएगी। इस पर वह पिता को घर लेकर चले गए। बुधवार को वह फिर पिता को लेकर अस्पताल आए, लेकिन जांच में हीला हवाली होती रही। इस दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। रोहित का कहना था अगर समय से पिता की डायलिसिस हो जाती तो उनकी जान बच सकती थी।
अस्पताल की इमरजेंसी में रात के समय भी कोरोना की जांच की जाती है। मृतक के परिजन किसी भी चिकित्सक से मिलते तो रात में जांच करा दी जाती। वह बिना मिले ही मरीज को घर लेकर चले गए। इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार हैं।
डॉ. आरके अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
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अवागढ़ निवासी 52 वर्षीय सतपाल सिंह सांस के रोगी थे। वहीं उनके जोड़ों में भी दर्द होता था। सतपाल के बेटे रोहित ने बुधवार को जिला अस्पताल में बताया वह पिता को फरीदाबाद जोड़ों में दर्द की दवा दिलाने गए थे। वहां से लौटते समय उनकी सांस उखड़ गई। उन्होंने बताया पिता सांस के रोग से ग्रसित थे इसी के चलते जिला अस्पताल में उनकी डायलिसिस होती थी।
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मंगलवार की शाम वह जिला अस्पताल में पिता को डायलिसिस कराने के लिए लेकर आए। जहां डायलिसिस में तैनात टीम द्वारा कोविड की जांच कराने को कहा गया। रोहित ने बताया उन्होंने अस्पताल में कोरोना की जांच कराने की बात कही, लेकिन कर्मियों ने बताया कि अब लैब बंद हो गई है।
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बुधवार को जांच हो पाएगी। इस पर वह पिता को घर लेकर चले गए। बुधवार को वह फिर पिता को लेकर अस्पताल आए, लेकिन जांच में हीला हवाली होती रही। इस दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। रोहित का कहना था अगर समय से पिता की डायलिसिस हो जाती तो उनकी जान बच सकती थी।
अस्पताल की इमरजेंसी में रात के समय भी कोरोना की जांच की जाती है। मृतक के परिजन किसी भी चिकित्सक से मिलते तो रात में जांच करा दी जाती। वह बिना मिले ही मरीज को घर लेकर चले गए। इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार हैं।
डॉ. आरके अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल