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समय से ओपीडी में नहीं पहुंचे चिकित्सक, मरीजों की लगी लंबी कतार
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जिला अस्पताल में पंजीकरण कराने को उमड़ी भीड़।
- फोटो : ETAH
एटा। कोरोना संक्रमण के चलते जिला अस्पताल की बंद चल रही ओपीडी बृहस्पतिवार से बहाल कर दी गई। पहले ही दिन अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ आई तो वहीं अधिकांश चिकित्सक कक्षों से नदारद थे। बृहस्पतिवार को ओपीडी में नेत्र व हड्डी के चिकित्सकों को छोड़कर अन्य चिकित्सक सुबह साढ़े दस बजे तक लापता रहे। जबकि फिजीशियन कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतार लगी थी। पहले दिन 810 पर्चे बनाए गए।
शासन ने कोरोना काल में जिला अस्पताल की बंद कराईं ओपीडी में सभी तरह की चिकित्सा सेवाओं को बृहस्पतिवार से शुरूकरने के निर्देश दिए। जहां ओपीडी में बने फिजीशियन कक्ष को विधिवत खोल दिया गया। सुबह से फिजीशियन कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लग गई। कक्ष संख्या छह में बैठने वाले फिजीशियन सुबह साढ़े दस बजे तक लापता थे। जबकि हड्डी के चिकित्सक व नेत्र रोग चिकित्सक सहित बाल रोग विशेषज्ञ अपने-अपने कक्ष में बैठे नजर आए।
मलेरिया भी पसारने लगा पैर
जिला अस्पताल में प्रतिदिन दो से तीन व्यक्ति मलेरिया के रोग से ग्रसित निकल रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवा का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। प्रभारी मलेरिया अधिकारी डॉ. लोकमन का कहना है सभी ब्लाकों पर छिड़काव वाली दवा के साथ मलेरिया जांच की किट भेज दी गईं है। वहीं शहर में जल्द ही दवा का छिड़काव कराया जाएगा।
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अभी तक जिला अस्पताल में केवल सर्जिकल ओपीडी संचालित हो रही थी। बुखार से पीड़ित मरीजों का उपचार ओपीडी के बजाए फीवर डेस्क पर हो रहा था। बृहस्पतिवार को बुखार से पीड़ित सहित अन्य मर्ज और कोरोना की जांच के लिए भी मरीज लाइन में पहुंच गए। इससे भीड़ बढ़ गई। वहीं चिकित्सक को जानकारी नहीं थी कि बुखार से पीड़ित मरीजों का भी उपचार करना है। इसी के चलते वह कक्ष से हट गए थे। बाद में उन्हें जानकारी दे दी गई सभी मरीजों का उपचार करना है। इसके बाद वह कक्ष में पहुंच गए। -डॉ. आर के अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
मिरहची से बेटे की कोरोना की जांच कराने जिला अस्पताल आए हैं। सुबह नौ बजे से लाइन में लगे हैं, कक्ष संख्या छह में डॉक्टर नहीं हैं, जिससे जांच नहीं हो पा रही है। -प्रदीप, मिरहची
बेटी के पेट में दर्द है, सुबह से पर्चा बनवाने के बाद लाइन में लगे हैं, अभी तक नंबर नहीं आया है। डॉक्टरों को समय पर बैठना चाहिए। जिससे परेशानी नहीं हो सके । -राम सिंह, मारहरा
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शासन ने कोरोना काल में जिला अस्पताल की बंद कराईं ओपीडी में सभी तरह की चिकित्सा सेवाओं को बृहस्पतिवार से शुरूकरने के निर्देश दिए। जहां ओपीडी में बने फिजीशियन कक्ष को विधिवत खोल दिया गया। सुबह से फिजीशियन कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लग गई। कक्ष संख्या छह में बैठने वाले फिजीशियन सुबह साढ़े दस बजे तक लापता थे। जबकि हड्डी के चिकित्सक व नेत्र रोग चिकित्सक सहित बाल रोग विशेषज्ञ अपने-अपने कक्ष में बैठे नजर आए।
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मलेरिया भी पसारने लगा पैर
जिला अस्पताल में प्रतिदिन दो से तीन व्यक्ति मलेरिया के रोग से ग्रसित निकल रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवा का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। प्रभारी मलेरिया अधिकारी डॉ. लोकमन का कहना है सभी ब्लाकों पर छिड़काव वाली दवा के साथ मलेरिया जांच की किट भेज दी गईं है। वहीं शहर में जल्द ही दवा का छिड़काव कराया जाएगा।
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अभी तक जिला अस्पताल में केवल सर्जिकल ओपीडी संचालित हो रही थी। बुखार से पीड़ित मरीजों का उपचार ओपीडी के बजाए फीवर डेस्क पर हो रहा था। बृहस्पतिवार को बुखार से पीड़ित सहित अन्य मर्ज और कोरोना की जांच के लिए भी मरीज लाइन में पहुंच गए। इससे भीड़ बढ़ गई। वहीं चिकित्सक को जानकारी नहीं थी कि बुखार से पीड़ित मरीजों का भी उपचार करना है। इसी के चलते वह कक्ष से हट गए थे। बाद में उन्हें जानकारी दे दी गई सभी मरीजों का उपचार करना है। इसके बाद वह कक्ष में पहुंच गए। -डॉ. आर के अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
मिरहची से बेटे की कोरोना की जांच कराने जिला अस्पताल आए हैं। सुबह नौ बजे से लाइन में लगे हैं, कक्ष संख्या छह में डॉक्टर नहीं हैं, जिससे जांच नहीं हो पा रही है। -प्रदीप, मिरहची
बेटी के पेट में दर्द है, सुबह से पर्चा बनवाने के बाद लाइन में लगे हैं, अभी तक नंबर नहीं आया है। डॉक्टरों को समय पर बैठना चाहिए। जिससे परेशानी नहीं हो सके । -राम सिंह, मारहरा