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मजबूरी: 10 दिन से अल्ट्रासाउंड बंद, मरीजों के 4.80 लाख रुपये खर्च
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बन्द पड़ा अल्ट्रासाउंड सेंटर ।संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड सेवा पूरी तरह से ठप है। दस दिन से मरीज अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भटक रहे हैं। मजबूरी में इन दस दिनों में निजी केंद्रों से अल्ट्रासाउंड कराने में मरीजों के करीब 4.80 लाख रुपये खर्च हो गए, लेकिन कॉलेज प्रशासन रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक की व्यवस्था नहीं कर सका है।
वीरांगना अबंतीवाई लोधी स्वशासी राज्य महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में 12 अप्रैल से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। यहां पर तैनात रेडियोलॉजिस्ट गैरहाजिर चल रहे हैं। जबकि मेडिकल प्रशासन की ओर से अन्य कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। मरीज हर रोज अल्ट्रासाउंड सेंटर के चक्कर काटते हैं और वापस चले आते हैं। एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी कोई रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते अल्ट्रासाउंड मशीन ठप पड़ी हुई है। यहां पर हर दिन 50 से 60 मरीजों के अल्ट्रासाउंड होते थे, अब मजबूरी में मरीज निजी केंद्रों से अल्ट्रासाउंड करा रहे हैं।
इस तरह खर्च हुए रुपये
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड न होने की वजह से मरीजों को निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड 800 रुपये में कराना पड़ रहा है। 60 मरीज प्रतिदिन के हिसाब से 48 हजार रुपये हर रोज खर्च किए जा रहे हैं। 10 दिनों से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं ऐसे में 4.80 लाख रुपये मरीजों का खर्चा हो चुका है।
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11 बजे तक ओपीडी नहीं मिले चिकित्सक
अमर उजाला टीम ने बुधवार को भी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी की पड़ताल की। कक्ष संख्या चार और पांच में 11 बजे तक चिकित्सक नहीं मिले। कक्ष चार के बाहर कई चर्म रोगी चिकित्सकों का इंतजार करते-करते चले गए। वहीं कक्ष संख्या पांच में सर्जन चिकित्सक का परामर्श नहीं मिल सका। चिकित्सक स्वास्थ्य सेवाओं में मनमानी कर रहे हैं और अधिकारी भी इस सबको नजरअंदाज कर रहे हैं।
चार दिनों से बंद हैं खून की जांचें
मेडिकल कॉलेज की पड़ताल के दौरान यहां स्थित पैथोलॉजी लैब में सलेक्ट्रा मशीन चार दिनों से बंद मिली। मरीजों के गुर्दा, लिवर, हृदय, यूरियन और शुगर की जांचें नहीं हो पा रही हैं। इस तरह की जांचें हर रोज 80 से 100 के करीब होती थीं। इन जांचों को कराने के लिए मरीज भटक रहे हैं और जिम्मेदार अपने दायित्वों को भुलाकर शांत बैठे हैं।
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वीरांगना अबंतीवाई लोधी स्वशासी राज्य महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में 12 अप्रैल से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। यहां पर तैनात रेडियोलॉजिस्ट गैरहाजिर चल रहे हैं। जबकि मेडिकल प्रशासन की ओर से अन्य कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। मरीज हर रोज अल्ट्रासाउंड सेंटर के चक्कर काटते हैं और वापस चले आते हैं। एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी कोई रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते अल्ट्रासाउंड मशीन ठप पड़ी हुई है। यहां पर हर दिन 50 से 60 मरीजों के अल्ट्रासाउंड होते थे, अब मजबूरी में मरीज निजी केंद्रों से अल्ट्रासाउंड करा रहे हैं।
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इस तरह खर्च हुए रुपये
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड न होने की वजह से मरीजों को निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड 800 रुपये में कराना पड़ रहा है। 60 मरीज प्रतिदिन के हिसाब से 48 हजार रुपये हर रोज खर्च किए जा रहे हैं। 10 दिनों से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं ऐसे में 4.80 लाख रुपये मरीजों का खर्चा हो चुका है।
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11 बजे तक ओपीडी नहीं मिले चिकित्सक
अमर उजाला टीम ने बुधवार को भी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी की पड़ताल की। कक्ष संख्या चार और पांच में 11 बजे तक चिकित्सक नहीं मिले। कक्ष चार के बाहर कई चर्म रोगी चिकित्सकों का इंतजार करते-करते चले गए। वहीं कक्ष संख्या पांच में सर्जन चिकित्सक का परामर्श नहीं मिल सका। चिकित्सक स्वास्थ्य सेवाओं में मनमानी कर रहे हैं और अधिकारी भी इस सबको नजरअंदाज कर रहे हैं।
चार दिनों से बंद हैं खून की जांचें
मेडिकल कॉलेज की पड़ताल के दौरान यहां स्थित पैथोलॉजी लैब में सलेक्ट्रा मशीन चार दिनों से बंद मिली। मरीजों के गुर्दा, लिवर, हृदय, यूरियन और शुगर की जांचें नहीं हो पा रही हैं। इस तरह की जांचें हर रोज 80 से 100 के करीब होती थीं। इन जांचों को कराने के लिए मरीज भटक रहे हैं और जिम्मेदार अपने दायित्वों को भुलाकर शांत बैठे हैं।