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Etah News: चिप्स-पापड़ का व्यापार, महिलाओं को दे रहीं रोजगार
Sun, 01 Mar 2026 12:18 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sun, 01 Mar 2026 12:18 AM IST
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पापड़ तैयार करती स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। स्रोत स्वयं
एटा। रंगों का त्योहार होली नजदीक आते ही बाजारों में चिप्स-पापड़ की मांग तेजी से बढ़ गई है। इस बढ़ती मांग ने ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसर भी पैदा किए हैं। विकासखंड सकीट के गांव नगला काजी की शनि देव स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं इन दिनों चिप्स और पापड़ बनाने में जुटी हैं। समूह की मेहनती अध्यक्ष राखी अब तक तीन कुंतल से अधिक चिप्स-पापड़ तैयार कर बाजारों में भिजवा चुकी हैं।
बीएमएम विनीता शर्मा ने बताया कि होली का सीजन में राखी चिप्स-पापड़ पैक कर बाजारों में भेजती हैं। इस बार मांग कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि समूह की महिलाएं पूरी स्वच्छता, शुद्ध मसालों और परंपरागत तरीकों से चिप्स-पापड़ तैयार करती हैं। यही कारण है कि गांव के साथ-साथ आसपास के कस्बों के व्यापारी भी इन्हें बड़ी मात्रा में खरीदते हैं। समूह की अध्यक्ष राखी ने बताया कि इस वर्ष मांग पिछले वर्षों के मुकाबले कहीं अधिक है।
वर्तमान में 10 महिलाएं समूह में मिलकर काम कर रही हैं। सुबह से शाम तक सभी महिलाएं मिलकर आलू छीलने, मसाला तैयार करने, पापड़ बेलने व धूप में सुखाने का काम करती हैं। उन्होंने बताया कि लगातार बढ़ती मांग से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है। कहा कि चिप्स-पापड़ की बिक्री से हर महिला को अच्छी आय हो जाती है जिससे होली का त्योहार उनके लिए भी खुशियों की सौगात लेकर आता है। पहले जहां उन्हें रोजगार के लिए बाहर निर्भर रहना पड़ता था वहीं अब गांव में ही काम उपलब्ध है।
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बीएमएम विनीता शर्मा ने बताया कि होली का सीजन में राखी चिप्स-पापड़ पैक कर बाजारों में भेजती हैं। इस बार मांग कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि समूह की महिलाएं पूरी स्वच्छता, शुद्ध मसालों और परंपरागत तरीकों से चिप्स-पापड़ तैयार करती हैं। यही कारण है कि गांव के साथ-साथ आसपास के कस्बों के व्यापारी भी इन्हें बड़ी मात्रा में खरीदते हैं। समूह की अध्यक्ष राखी ने बताया कि इस वर्ष मांग पिछले वर्षों के मुकाबले कहीं अधिक है।
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वर्तमान में 10 महिलाएं समूह में मिलकर काम कर रही हैं। सुबह से शाम तक सभी महिलाएं मिलकर आलू छीलने, मसाला तैयार करने, पापड़ बेलने व धूप में सुखाने का काम करती हैं। उन्होंने बताया कि लगातार बढ़ती मांग से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है। कहा कि चिप्स-पापड़ की बिक्री से हर महिला को अच्छी आय हो जाती है जिससे होली का त्योहार उनके लिए भी खुशियों की सौगात लेकर आता है। पहले जहां उन्हें रोजगार के लिए बाहर निर्भर रहना पड़ता था वहीं अब गांव में ही काम उपलब्ध है।
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