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Etah News: बिना बैग के स्कूल पहुंचे बच्चे ... खिलौनों से खिले
Sat, 29 Aug 2026 10:45 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sat, 29 Aug 2026 10:45 PM IST
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सकीट के प्राथमिक विद्यालय भरतौली में बैगलेस डे पर मिट्टी के खिलौने बनाते बच्चे। संवाद
सकीट। बैगलेस डे पर शनिवार भरतोली प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के लिए खास रहा। बिना कॉपी, किताबों के स्कूल पहुंचे बच्चे खिलौने बनाकर खिल गए। चिकनी मिट्टी पर इनकी अंगुलियां रवां करने में शिक्षकों ने भी खूब दिलचस्पी ली।
आनंदम योजना के तहत मस्ती की पाठशाला में खिलौने बनाने की बारीकियां सिखाई गईं। बच्चों ने खिलौनों के साथ मटकी, दीपक, फल, कछुआ, मछली, हाथी, मोर बनाकर प्रतिभा का प्रदर्शन किया। शिक्षकों की मदद से वर्षा जल संचयन का लाइव मॉडल भी तैयार किया। बूंद-बूंद से जीवन लघु नाटिका से जल संचय का संदेश दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ। बच्चों ने कविताओं का सधे अंदाज में पाठ किया।
तुलसी, नीम, एलोवेरा, पुदीना जैसे पौधों की पहचान और इनके औषधीय गुणों के बारे में जानकारी दी गई। विद्यालय के किचन गार्डन में इन्हें लगाने के लिए भी प्रेरित किया गया। शिक्षकों ने वर्मी कंपोस्ट, किचन के कचरे और गोबर से जैविक खाद बनाने के बारे में भी बताया।
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प्रधानाध्यापिका अंजू जादौन ने बताया कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में रचनात्मकता, टीम वर्क और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने बताया कि शासन की आनंदम मार्गदर्शिका के तहत प्रत्येक शनिवार को बैगलेस डे मनाया जा रहा है।
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आनंदम योजना के तहत मस्ती की पाठशाला में खिलौने बनाने की बारीकियां सिखाई गईं। बच्चों ने खिलौनों के साथ मटकी, दीपक, फल, कछुआ, मछली, हाथी, मोर बनाकर प्रतिभा का प्रदर्शन किया। शिक्षकों की मदद से वर्षा जल संचयन का लाइव मॉडल भी तैयार किया। बूंद-बूंद से जीवन लघु नाटिका से जल संचय का संदेश दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ। बच्चों ने कविताओं का सधे अंदाज में पाठ किया।
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तुलसी, नीम, एलोवेरा, पुदीना जैसे पौधों की पहचान और इनके औषधीय गुणों के बारे में जानकारी दी गई। विद्यालय के किचन गार्डन में इन्हें लगाने के लिए भी प्रेरित किया गया। शिक्षकों ने वर्मी कंपोस्ट, किचन के कचरे और गोबर से जैविक खाद बनाने के बारे में भी बताया।
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प्रधानाध्यापिका अंजू जादौन ने बताया कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में रचनात्मकता, टीम वर्क और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने बताया कि शासन की आनंदम मार्गदर्शिका के तहत प्रत्येक शनिवार को बैगलेस डे मनाया जा रहा है।