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‘उत्तम मार्दव गुन मन माना’
अमर उजाला ब्यूरो एटा।
Updated Wed, 07 Sep 2016 11:31 PM IST
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मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु
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पर्यूषण पर्व पर नगर के जैन मंदिरों में श्रावकों की भीड़ उमड़ रही है। पर्व के दूसरे दिन बुधवार को उत्तम मार्दव धर्म की लोगों ने पूजा की। सुबह जहां पूजन में भक्तों ने जिनेंद्र प्रभु को अर्घ्य समर्पित किए। वहीं शाम की आरती में भी आस्था का सैलाब नजर आया।
जैन धर्म के प्रमुख पर्व पर्यूषण के दूसरे दिन श्रावक-श्राविकाओं ने उत्तम मार्दव धर्म का अनुसरण किया। इस दौरान लोगों ने विनय भाव को धारण करने और मान कषाय के दमन का संकल्प लिया। प्रेमनगर स्थित नशिया जैन मंदिर में श्रावकों ने प्रभु की भक्तिभाव से संगीतमय पूजा की। वहीं बड़े जैन मंदिर में प्रभु की पूजा-अर्चना को कतारें लगी नजर आई। सुबह पांच बजे जैन गली स्थित जानकीदास चैत्यालय से वीर मंडल द्वारा प्रभातफेरी निकाली गई। इसमें बच्चे जैन धर्म का जयघोष लगाते हुए नगर के जैन मंदिरों की वंदना की। प्रकाश चंद्र जैन ने कहा कि मार्दव का अर्थ मृदुता और उत्तम का अर्थ है श्रेष्ठ। जहां श्रेष्ठ मृदुता है, वही उत्तम मार्दव धर्म है। अभिमान को समाप्त करने के लिए जीवन में विनय होना आवश्यक है। हम मुक्ति की प्राप्ति हेतु मान का त्याग कर मार्दव धर्म को धारण करें। बड़े जैन मंदिर में विकास जैन शास्त्री ने प्रवचन दिए। जैन महिला संगठन की अध्यक्ष बबिता जैन प्रेरणा ने बताया कि पर्यूषण पर्व में जानकीदास चैत्यालय, मोरध्वज जैन मंदिर, पार्श्वनाथ जैन मंदिर, गोटावाला जैन मंदिर समेत सभी चैत्यालयों में धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। शाम आरती के बाद धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। मौके पर जैन नगर मंदिर के अध्यक्ष विनय जैन, योगेंद्र जैन, नितिन जैन, सुनीलचंद्र जैन, संभव जैन, प्रतीश जैन, विकास जैन, डेविड जैन, सुनील बांदा, संजीव जैन, मोहित जैन, सुनीता जैन, शशि जैन, सुनीलता जैन, कल्पना जैन, वर्षा जैन, राजकुमारी जैन, पूनम जैन, मेघा जैन, विमला जैन, आशी जैन आदि मौजूद रही।
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उत्तम आर्जव धर्म
दश लक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म का पूजन किया जाएगा। दश लक्षण में श्रावक-श्राविकाएं व्रत व उपवास रखकर कर्मों की निर्जरा कर रहे हैं।
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जैन धर्म के प्रमुख पर्व पर्यूषण के दूसरे दिन श्रावक-श्राविकाओं ने उत्तम मार्दव धर्म का अनुसरण किया। इस दौरान लोगों ने विनय भाव को धारण करने और मान कषाय के दमन का संकल्प लिया। प्रेमनगर स्थित नशिया जैन मंदिर में श्रावकों ने प्रभु की भक्तिभाव से संगीतमय पूजा की। वहीं बड़े जैन मंदिर में प्रभु की पूजा-अर्चना को कतारें लगी नजर आई। सुबह पांच बजे जैन गली स्थित जानकीदास चैत्यालय से वीर मंडल द्वारा प्रभातफेरी निकाली गई। इसमें बच्चे जैन धर्म का जयघोष लगाते हुए नगर के जैन मंदिरों की वंदना की। प्रकाश चंद्र जैन ने कहा कि मार्दव का अर्थ मृदुता और उत्तम का अर्थ है श्रेष्ठ। जहां श्रेष्ठ मृदुता है, वही उत्तम मार्दव धर्म है। अभिमान को समाप्त करने के लिए जीवन में विनय होना आवश्यक है। हम मुक्ति की प्राप्ति हेतु मान का त्याग कर मार्दव धर्म को धारण करें। बड़े जैन मंदिर में विकास जैन शास्त्री ने प्रवचन दिए। जैन महिला संगठन की अध्यक्ष बबिता जैन प्रेरणा ने बताया कि पर्यूषण पर्व में जानकीदास चैत्यालय, मोरध्वज जैन मंदिर, पार्श्वनाथ जैन मंदिर, गोटावाला जैन मंदिर समेत सभी चैत्यालयों में धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। शाम आरती के बाद धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। मौके पर जैन नगर मंदिर के अध्यक्ष विनय जैन, योगेंद्र जैन, नितिन जैन, सुनीलचंद्र जैन, संभव जैन, प्रतीश जैन, विकास जैन, डेविड जैन, सुनील बांदा, संजीव जैन, मोहित जैन, सुनीता जैन, शशि जैन, सुनीलता जैन, कल्पना जैन, वर्षा जैन, राजकुमारी जैन, पूनम जैन, मेघा जैन, विमला जैन, आशी जैन आदि मौजूद रही।
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उत्तम आर्जव धर्म
दश लक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म का पूजन किया जाएगा। दश लक्षण में श्रावक-श्राविकाएं व्रत व उपवास रखकर कर्मों की निर्जरा कर रहे हैं।