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तीन दिनों से नहीं बदली गईं मरीजों के बेड की चादरें
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मेडिकल कॉलेज के मेडिकल वार्ड में बिना चादर के बिछे बेड ।संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाएं हावी हैं। तीन दिन से मरीजों के बेड की चादरें नहीं बदली गई हैं। जिसके चलते चादर ही नहीं, पूरे वार्ड में दुर्गंध आ रही है। मरीजों व तीमारदारों का वहां रुकना मुश्किल हो रहा है। रविवार दोपहर करीब दो बजे मेडिकल कॉलेज स्थित एमसीएच विंग में अमर उजाला ने हालात देखे। ओपीडी के अवकाश के चलते यहां माहौल सूना-सूना था। सर्जिकल वार्ड में मरीजों के बेडों पर चादरें ही नहीं थीं। एक बेड पर कई गंदी चादरें एकत्रित करके रख दी गई थीं। मरीजों ने बताया कि चादरें तीन दिन से नहीं बदली गईं। गंदगी और बदबू की वजह से चादरों को बेड से हटाकर एक ओर रख दिया है।
जबकि हर रोज बेड की चादर बदलने का प्रावधान है। यहां मौजूद अर्जुन सिंह निवासी बुरहैनाबाद ने बताया कि पांच दिनों से पत्नी राजकुमारी सर्जिकल वार्ड में भर्ती हैं। एक अप्रैल से मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं बुरी तरह से प्रभावित हैं। यहां मरीजों के बेड की चादरें तक नहीं बदली गई हैं। वार्ड में दुर्गंध फैली हुई है, जिसकी वजह से बैठना मुश्किल हो रहा है। बेगमवती का उपचार करा रहीं इनकी मां कमलेश देवी ने बताया कि चादरें नहीं बदली हैं, बिना चादर के ही मरीज बेडों पर लेटे हैं। इसके अलावा ऑपरेशन के मरीज के लिए लघुशंका कराने के लिए कोई व्यवस्थाएं नहीं हैं। कर्मचारी कहते हैं कि बोतल काट कर उससे काम चलाओ।
मरीजों को तीसरे दिन भी नहीं मिला खाना
मेडिकल कॉलेज में मरीजों को तीसरे दिन भी खाना नहीं मिला। मरीजों को बाहर से खाना मंगाकर खाना पड़ा। ऐसी अव्यवस्थाएं कब तक रहेंगी, इस पर कोई भी जिम्मेदार बोलने को तैयार नहीं है। अज्ञात मरीज को स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा भोजन खिलाया जा रहा है। दरअसल, यहां ठेकेदार का भुगतान न होने से भोजन की आपूर्ति 1 अप्रैल से बंद कर दी गई है।
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जबकि हर रोज बेड की चादर बदलने का प्रावधान है। यहां मौजूद अर्जुन सिंह निवासी बुरहैनाबाद ने बताया कि पांच दिनों से पत्नी राजकुमारी सर्जिकल वार्ड में भर्ती हैं। एक अप्रैल से मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं बुरी तरह से प्रभावित हैं। यहां मरीजों के बेड की चादरें तक नहीं बदली गई हैं। वार्ड में दुर्गंध फैली हुई है, जिसकी वजह से बैठना मुश्किल हो रहा है। बेगमवती का उपचार करा रहीं इनकी मां कमलेश देवी ने बताया कि चादरें नहीं बदली हैं, बिना चादर के ही मरीज बेडों पर लेटे हैं। इसके अलावा ऑपरेशन के मरीज के लिए लघुशंका कराने के लिए कोई व्यवस्थाएं नहीं हैं। कर्मचारी कहते हैं कि बोतल काट कर उससे काम चलाओ।
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मरीजों को तीसरे दिन भी नहीं मिला खाना
मेडिकल कॉलेज में मरीजों को तीसरे दिन भी खाना नहीं मिला। मरीजों को बाहर से खाना मंगाकर खाना पड़ा। ऐसी अव्यवस्थाएं कब तक रहेंगी, इस पर कोई भी जिम्मेदार बोलने को तैयार नहीं है। अज्ञात मरीज को स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा भोजन खिलाया जा रहा है। दरअसल, यहां ठेकेदार का भुगतान न होने से भोजन की आपूर्ति 1 अप्रैल से बंद कर दी गई है।
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