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तुलसी शोध संस्थान की भूमि पर अतिक्रमण
ब्यूरो,अमर उजाला एटा
Updated Thu, 09 Jun 2016 11:29 PM IST
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तुलसी शोध संस्थान की जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है
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संत तुलसीदास इंटर कालेज के पास तुलसी शोध संस्थान के लिए चिन्हित भूमि पर अतिक्रमणकारियों की कुदृष्टि पड़ गई है। वे इस भूमि पर दुाकनारों निर्माण कराने में जुट गए हैं। दूसरी ओर बजट नहीं मिलने के कारण तुलसी शोघ संस्थान का कार्य अधर में लटक गया है, जिससे साहित्य प्रेमियों में निराशा है।
तीर्थ नगरी में लंबे समय से शोघ संस्थान की जरूरत महसूस हो रही है। तुलसी, रत्नावली, नंददास आदि महाकवियों के प्राचीन साहित्य व पांडुलिपियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए संत तुलसीदास नगर विकास समिति व विद्वान साहित्यकार दो दशक से भी अधिक लंबे समय से शोध संस्थान की स्थापना की मांग कर रहे हैं। पालिका ने इसके लिए जगह उपलब्ध कराई और शासन से बजट मांगा लेकिन चार वर्ष में भी शासन से बजट स्वीकृत नहीं हो सका है। संस्थान के निर्माण में हो रही देरी का फायदा अतिक्रमणकारी उठाने लगे हैं। तुलसी साहित्य मर्मज्ञ डॉ. राधा कृष्ण दीक्षित का कहना है कि संत तुलसी व उनकी रचनाओं पर शोध करने वाले छात्र व जिज्ञासु विद्वान बड़ी संख्या में तीर्थ नगरी आते हैं लेकिन यहां कोई शोध संस्थान न होने के कारण निराश होकर लौट जाते हैं।ं
एबीवीपी ने सौंपा ज्ञापन
सोरों। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित तुलसी शोध संस्थान के मुख्य द्वार पर दुकानों का निर्माण रोकने की मांग की है। इस मौके पर कृष्णकांत, ऋषभ बरबारिया, अर्जुन आदि हैं।
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संज्ञान में नहीं है दुकानों का निर्माण: ईओ
सोरों। अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि प्रस्तावित शोध संस्थान के द्वार पर दुकानों का निर्माण होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। पूरी जानकारी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
तीर्थ नगरी में लंबे समय से शोघ संस्थान की जरूरत महसूस हो रही है। तुलसी, रत्नावली, नंददास आदि महाकवियों के प्राचीन साहित्य व पांडुलिपियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए संत तुलसीदास नगर विकास समिति व विद्वान साहित्यकार दो दशक से भी अधिक लंबे समय से शोध संस्थान की स्थापना की मांग कर रहे हैं। पालिका ने इसके लिए जगह उपलब्ध कराई और शासन से बजट मांगा लेकिन चार वर्ष में भी शासन से बजट स्वीकृत नहीं हो सका है। संस्थान के निर्माण में हो रही देरी का फायदा अतिक्रमणकारी उठाने लगे हैं। तुलसी साहित्य मर्मज्ञ डॉ. राधा कृष्ण दीक्षित का कहना है कि संत तुलसी व उनकी रचनाओं पर शोध करने वाले छात्र व जिज्ञासु विद्वान बड़ी संख्या में तीर्थ नगरी आते हैं लेकिन यहां कोई शोध संस्थान न होने के कारण निराश होकर लौट जाते हैं।ं
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एबीवीपी ने सौंपा ज्ञापन
सोरों। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित तुलसी शोध संस्थान के मुख्य द्वार पर दुकानों का निर्माण रोकने की मांग की है। इस मौके पर कृष्णकांत, ऋषभ बरबारिया, अर्जुन आदि हैं।
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संज्ञान में नहीं है दुकानों का निर्माण: ईओ
सोरों। अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि प्रस्तावित शोध संस्थान के द्वार पर दुकानों का निर्माण होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। पूरी जानकारी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।