नमी बता कर किसानों का धान लौटा रहे

Etah Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
एटा। जिला गेहूं खरीद की तरह ही धान खरीद में भी पिछड़ रहा है। अब तक 6200 मीट्रिक टन लक्ष्य के विपरीत मात्र 41 मीट्रिक टन धान की ही खरीद हो सकी है। किसानों का तो कहना है कि जिले में 88 फीसदी उत्पादन की खरीद की व्यवस्था ही नहीं है। उल्टे धान में नमी के नाम पर किसानों का शोषण किया जा रहा है। स्थिति यह है कि सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों की अव्यवस्थाओं से जूझने वाले किसानों को धान क्रय केंद्रों पर भी राहत नहीं मिल रही है।
जिले में एक अक्तूबर से सरकारी धान की खरीद शुरू हो गई है। डेढ़ माह में 6200 मीट्रिक टन लक्ष्य के विपरीत मात्र 41 मीट्रिक टन धान ही खरीदा जा सका है। बताते चलें कि जनपद में केवल कॉमन धान की ही खरीद की जा रही है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी नरेंद्र कुमार मलिक ने बताया कि 13 क्रय केंद्रों को बढ़ाकर 19 कर दिया गया है। लेट कटाई के चलते नवंबर के अंतिम सप्ताह से खरीद में तेजी आएगी। सभी कें द्रों पर पर्याप्त वारदाना उपलब्ध है। किसानों का भुगतान चेक द्वारा किया जाएगा। मलिक के अनुसार विभाग केवल कॉमन धान (सामान्य धान) की ही खरीद करता है। जिसका खरीद मूल्य 1250 रुपये एवं ग्रेड ए का क्रय मूल्य 1280 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।
विपणन अधिकारी के अनुसार केंद्रों पर पहुंच रहे धान में अधिक मॅास्चर (नमी) की शिकायतें हैं, जबकि 17 प्रतिशत नमी तक के धान की खरीद अनुमन्य है। जनपद में संचालित 19 क्रय केंद्रों में सर्वाधिक पीसीएफ के 10, खाद्य विभाग के 05, यूपी एग्रो के दो एवं यूपीएसएस के दो केंद्र शामिल हैं।सुगंधा, पीटन का बढ़ रहा क्षेत्रफल। शासन की उपेक्षा के चलते जनपद के किसान सामान्य धान से पल्ला झाड़ रहे हैं, वहीं सुगंधा, पीटन, बासमती आदि का क्रेज बढ़ रहा है। खाद्य एवं विपणन अधिकारी नरेंद्र कुमार मलिक के अनुसार रेजिस्टेंट अधिक होने के चलते इनमें बीमारियों का प्रकोप न्यूनतम रहता है। कम उत्पादन के बाद भी महंगे दामों के चलते किसानों को अधिक लाभ होता है। वे बताते हैं कि जनपद में 12 प्रतिशत ही सामान्य धान होता है। शेष में सुगंधा, पीटन आदि का बोलबाला है। क्या कहते हैं किसान। गांव खंगार पुर निवासी किसान मानपाल सिंह का कहना है कि धान के क्रय मूल्य से लागत नहीं मिल रही, वहीं केंद्रों पर गीले धान के नाम पर किसानों का शोषण किया जा रहा है। मींसाकलां निवासी रामप्रकाश का कहना है कि जनपद में तेजी से बढ़ रही धान प्रजातियों की खरीद शासन नहीं कर रहा। ऐसे में उन्हें उत्पादन का लाभ नहीं मिल रहा। वह कहते हैं कि जनपद में 88 फीसदी धान उत्पादन खरीद की व्यवस्था ही नहीं है। मलावन निवासी जमादार सिंह एवं भरतपुर निवासी रामखिलाड़ी आदि का कहना है कि जनपद में करीब 88 प्रतिशत खेती सुगंधा, पीटन, बासमती धान की हो रही है। ऐसे में इसकी खरीद नहीं होने से किसान शासन की योजना से वंचित हो रहे हैं।

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