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यूपी : बेसिक स्कूलों में तैनात सभी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की होगी जांच, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Sun, 18 Oct 2026 12:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 18 Oct 2026 12:00 PM IST
सार

एक ही शैक्षिक प्रमाणपत्र पर बेसिक शिक्षा विभाग में 10 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आने से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कक्षा आठ तक के स्कूलों में तैनात शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच कराने और एक सप्ताह में नियुक्ति संबंधी दस्तावेज जमा करने का आदेश दिया है। जांच की निगरानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और एसटीएफ करेंगे।

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Educational certificates of all teachers posted in basic schools to be verified; High Court issues order
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

बेसिक शिक्षा विभाग में एक ही प्रमाणपत्र पर 10 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आया है। इससे हैरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक से कक्षा आठ तक के स्कूलों में तैनात शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने संतकबीरनगर निवासी कुसुमलता की याचिका पर दिया है।

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कोर्ट ने कहा है कि शिक्षक एक हफ्ते में नियुक्ति पत्र व शैक्षिक प्रमाणपत्र बीएसए को सौंपें। एक नोटरी शपथ पत्र भी दें, जिसमें अपने उन रिश्तेदारों का खुलासा करें जो शिक्षा विभाग में बीएसए या उससे ऊपर के पदों पर कार्यरत हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बाद ब्योरा तैयार कर बीएसए एसटीएफ को भेजेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विभाग और एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारी जांच प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

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चार नवंबर को अधिकारियों को अनुपालन आख्या पेश करनी होगी। कोर्ट ने गरिमा सिंह मामले में दिए गए आदेश का हवाला भी दिया। स्पष्ट किया कि फर्जी नियुक्तियां रद्द करने, नियमानुसार वेतन की वसूली और संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई के संबंध में भी कोर्ट अगली सुनवाई पर विचार करेगा।

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नियुक्ति की मंजूरी और वेतन के लिए याची पहुंची थी कोर्ट, शुरू हो गई जांच

याची ने नियुक्ति को मंजूरी देने और वेतन जारी करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दावा किया कि उसका चयन सहायक अध्यापक के पद पर हुआ था। कार्यभार ग्रहण करने के बाद नियमित रूप से काम कर रही थी। 11 फरवरी 2021 को संतकबीरनगर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उसे निलंबित कर दिया। एसटीएफ की जांच में सामने आया कि उसने गोरखपुर में कार्यरत दूसरी शिक्षिका कुसुमलता श्रीवास्तव के शैक्षिक दस्तावेज का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की थी।

सत्यापन के लिए 12 और 13 अक्तूबर को बुलाने के बावजूद याची एसटीएफ के सामने पेश नहीं हुई। सुनवाई के दौरान भी उसकी ओर से कोई पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने पाया कि जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही शैक्षिक दस्तावेज के आधार पर 10 या उससे अधिक लोगों ने नौकरी हासिल की है।

फर्जी डिग्री से गुरु जी बने लोग नौनिहालों का भविष्य कभी नहीं संवार सकते : कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि शिक्षा विभाग में फर्जी नियुक्तियों पर लगाम लगनी चाहिए। फर्जी डिग्री से गुरु जी बने लोग नौनिहालों का भविष्य कभी नहीं संवार सकते। भले ही सरकार मुफ्त किताबें, कपड़े, एमडीएम जैसी सुविधाओं पर कितना ही खर्च कर डाले। शिक्षकों की अयोग्यता सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में कमी और शिक्षा के स्तर में सुधार नहीं होने का बड़ा कारण है। शिक्षक में विषय का ज्ञान होने के साथ बच्चों को पढ़ाने की क्षमता, नियमित उपस्थिति, धैर्य और सभी विद्यार्थियों के प्रति समान व्यवहार भी जरूरी है।

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