अब भी चल रहा है डॉन बबलू का गिरोह!
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700 करोड़ के हवाला घोटाले में फंसे सूरत के अफरोज फत्ता से 150 करोड़ रुपये वसूलने के लिए रची गई साजिश में अंडर वर्ल्ड सरगना बबलू श्रीवास्तव का नाम सामने आया है। इस मामले में शीघ्र ही सूरत पुलिस बबलू श्रीवास्तव से पूछताछ कर सकती है। बबलू विभिन्न मामलों में सजा काट रहा है और फिलहाल बरेली की सेंट्रल जेल में बंद है।
सूरत के अडाजण पाटिया इलाके में 28 मार्च की रात अफरोज फत्ता के धोखे में उसके करीबी जमीन दलाल अमजद दलाल पर जानलेवा हमला हुआ था। इस मामले में गुजरात पुलिस ने गुजरात के ही पूणागाम निवासी रोशन चावला व सुरेश बंसल को गिरफ्तार किया। साथ ही खुलासा किया था कि जानलेवा हमले की साजिश 700 करोड़ के हवाला घोटाले में फंसे अफरोज फत्ता से 150 करोड़ रुपये वसूलने के लिए रची गई थी।
इसके लिए बरेली जेल में बंद अंडरवर्ल्ड सरगना बबलू श्रीवास्तव ने किसी से सुपारी ली थी। उसी ने मोन्टू, मुकेश, अफजल व समीर नामक चार लोगों को इस साजिश को अंजाम देने के लिए भेजा था। चारों ने रोशन व सुरेश की मदद लेकर हमला किया लेकिन उन्होंने गलती से अमजद को निशाना बना दिया था।
जेल में बंद बबलू से की जाएगी पूछताछ
इस बीच, पुलिस ने मिले सुराग के आधार पर रोशन चावला और सुरेश बंसल को 14 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया। इसके अगले ही दिन सूरत जिला न्यायालय में पेश कर 14 दिन का रिमांड मांगा और दोनों को 10 दिनों के लिए 25 अप्रैल तक पुलिस अभिरक्षा में रखने का आदेश हासिल कर लिया।
पुलिस के अनुसार बाकी चारों आरोपियों की तलाश जारी है। इस संबंध में रोशन व सुरेश से पूछताछ में मिली जानकारी, टेक्निकल सर्विलांस के अलावा मुंबई क्राइम ब्रांच व उत्तरप्रदेश के स्पेशल टास्क फोर्स की मदद ली जाएगी। पुलिस का कहना है कि मोन्टू का असली नाम विश्वेश्वर मिश्रा व मुकेश का असली नाम अर्जुन सिंह है। मोन्टू वाराणसी व मुकेश लखनऊ का निवासी है। अफजल व समीर के बारे में अधिक जानकारी नहीं मिल सकी है।
पुलिस का कहना है कि बरेली जेल में बंद बबलू श्रीवास्तव व दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद फजलू रहमान से पूछताछ की तैयारी है। फजलू ने ही बबलू से रोशन का संपर्क कराया था। पुलिस के मुताबिक फत्ता से रुपये वसूलने की सुपारी बबलू को किसने दी थी, इसकी पुख्ता जानकारी सिर्फ बबलू से ही मिल सकती है।
'डॉन ले रहा था साजिश की जानकारी'
सूरत पुलिस के अनुसार साजिश को अंजाम देने के दौरान बरेली जेल में बंद बबलू श्रीवास्तव इन लोगों के संपर्क में था। उसने गोली चलाने से दो घंटे पहले सारी तैयारियों की जानकारी हासिल करने के लिए रोशन व मोन्टू को फोन किया था। बाद में भी वह दो-तीन दिन तक मोन्टू के संपर्क में रहा था।
उसी के कहने पर मोन्टू ने इंटरनेट कॉलिंग के जरिए फत्ता को दो बार धमकी दी थी। इस केस में जहां तक रोशन और सुरेश की भूमिका का सवाल है, उनका इस्तेमाल फत्ता के पते पर ले जाने तथा फत्ता की रेकी करने तक सीमित था।
बरेली सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक एके राय का कहना है कि जैमर न लगा होने के कारण यह संभव है कि जेल के अंदर सिम और मोबाइल कैदी तक पहुंच जाएं। लेकिन बबलू श्रीवास्तव जैसे शातिर ऐसा नहीं करेंगे। बबलू से पूछताछ को लेकर सूरत पुलिस ने भी अभी तक सम्पर्क नहीं किया है।