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मानव रहित फाटकों ने दस साल में ली 29 जानें
ब्यूरो/अमर उजाला देवरिया
Updated Thu, 26 Apr 2018 10:35 PM IST
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बरहज में मानव रहित रेल क्रासिंग पार करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। कुशीनगर जिले के दुदही में बृहस्पतिवार सुबह दिल दहलाने वाले हुए हादसे ने देवरिया में मानव रहित खूनी फाटकों पर हुई दुर्घटनाओं की याद को ताजा कर दिया। वर्ष 2007 से अभी तक कुल दस हादसे हो चुके हैं। इससे कई परिवार उजड़ गए। अनेक घरों की खुशी मातम में बदल गई। बड़ा हादसा नोनापार और सलेमपुर में पिपरा नाजिर तथा अघैला के समीप मानव रहित फाटक पर हुई थी। अभी भी जिले में तीन मानव रहित फाटक हैं।
लोग ऐसे फाटकों को पार करने में जल्दीबाजी करते हैं। जिले अब तक हुई ऐसी दुर्घटनाएं सर्वाधिक ट्रैक्टर ट्रॉली से हुई है। लगतार कई हादसे के बाद रेल प्रशासन की नींद खुली और मानव रहित फाटकों को संरक्षित समपार बनाए गए। देवरिया-भटनी के बीच नूनखार के अघैला गांव के समीप 13 मई 2013 को मानव रहित फाटक पर तिलक लेकर जा रहे लोगों की चार पहिया वाहन ट्रेन से टकरा गई थी। इसमें लार थाना क्षेत्र के चुरिया गांव के चार लोगों की मौत हुई थी। 26 मई-2011 को नोनापार पूर्वी समपार फाटक पर चंढ़ीगढ़ डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन से बरातियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली टकराया था। ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार छह लोगों की मौत हुई थी। इसमें बैंड पार्टी में काम करने वाले लोग भी शामिल रहे। इसी फाटक पर 2009 में भटनी क्षेत्र के भरहे चौराह गांव निवासी रमजान के बेटे की जा रही बरात में शामिल बरातियों से भरी जीप को मौर्य एक्सप्रेस रौंदती हुई निकल गई थी। इसमें 13 बारातियों की मौत हुई थी। 18 मई-2005 को ट्रेन और जीप में टक्कर हुई थी लेकिन चालक कूदकर भाग गया था। कोई हताहत नहीं हुआ था। जून-2018 में फुलेमान टोला निवासी लालजी यादव के घर शादी समारोह में ट्रैक्टर से जनरेटर जा रहा था।
उधर से गुजर रही मौर्य एक्सप्रेस ने टक्कर मार दिया था। इसमें ट्राली पर सवार एक मजदूर की मौत हो गई थी। वर्ष-2010 में देवरिया के बीआरडी पीजी कॉलेज के समीप कॉलेज के प्रोफेसर की कार अचानक बंद हो गई थी। ट्रेन की टक्कर से दो लोग घायल हो गए थे। वर्ष 2007 में भी इसी स्थान पर ट्रैक्टर को ट्रेन से टक्कर मारा था लेकिन कोई चपेट में नहीं आया था। 13 मार्च 2012 को सलेमपुर के पिपरा नाजिर के समीप मानव रहित फाटक पर गोदान एक्सप्रेस की चपेट में आने से ट्रैक्टर चालक राजू की जहां मौत हो गई। वहीं इस पर सवार अमित घायल हो गया था। 12 अगस्त 2012 को पिपरा नाजिर मानव रहित फाटक पर निरीक्षण यान की चपेट में आने पड़री बाजार गांव के एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई थी। परिवार के सिर्फ एक बालक बचा था।
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इन हादसों में 29 लोगों के जान गंवाने के बाद रेल प्रशासन की नीद खुली और पिपरा नाजिर, नोनापार, अघैला, चकरवा, पीआरडी पीजी कॉलेज के समीप मानव रहित फाटकों को रेलवे ने मानव संरक्षित फाटक बना दिया। लेकिन अभी भी बनकटा-भाटपाररानघी, बनकटा-मैरवा और मैरवा-जीरादेई रेल खंड पर मानव रहित फाटक हैं। रेलवे की ओर से यहां कोई इंतजाम नहीं किया गया है। जान जोखिम में डालकर लोग मानव रहित फाटक पार करते हैं। स्टेशन अधीक्षक परशुराम तिवारी ने बताया कि जिले में तीन मानव रहित फाटक हैं। एक पर अंडर पास का कार्य चल रहा है। अधिकांश फाटों को संरक्षित समपार कर दिया गया है।
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लोग ऐसे फाटकों को पार करने में जल्दीबाजी करते हैं। जिले अब तक हुई ऐसी दुर्घटनाएं सर्वाधिक ट्रैक्टर ट्रॉली से हुई है। लगतार कई हादसे के बाद रेल प्रशासन की नींद खुली और मानव रहित फाटकों को संरक्षित समपार बनाए गए। देवरिया-भटनी के बीच नूनखार के अघैला गांव के समीप 13 मई 2013 को मानव रहित फाटक पर तिलक लेकर जा रहे लोगों की चार पहिया वाहन ट्रेन से टकरा गई थी। इसमें लार थाना क्षेत्र के चुरिया गांव के चार लोगों की मौत हुई थी। 26 मई-2011 को नोनापार पूर्वी समपार फाटक पर चंढ़ीगढ़ डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन से बरातियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली टकराया था। ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार छह लोगों की मौत हुई थी। इसमें बैंड पार्टी में काम करने वाले लोग भी शामिल रहे। इसी फाटक पर 2009 में भटनी क्षेत्र के भरहे चौराह गांव निवासी रमजान के बेटे की जा रही बरात में शामिल बरातियों से भरी जीप को मौर्य एक्सप्रेस रौंदती हुई निकल गई थी। इसमें 13 बारातियों की मौत हुई थी। 18 मई-2005 को ट्रेन और जीप में टक्कर हुई थी लेकिन चालक कूदकर भाग गया था। कोई हताहत नहीं हुआ था। जून-2018 में फुलेमान टोला निवासी लालजी यादव के घर शादी समारोह में ट्रैक्टर से जनरेटर जा रहा था।
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उधर से गुजर रही मौर्य एक्सप्रेस ने टक्कर मार दिया था। इसमें ट्राली पर सवार एक मजदूर की मौत हो गई थी। वर्ष-2010 में देवरिया के बीआरडी पीजी कॉलेज के समीप कॉलेज के प्रोफेसर की कार अचानक बंद हो गई थी। ट्रेन की टक्कर से दो लोग घायल हो गए थे। वर्ष 2007 में भी इसी स्थान पर ट्रैक्टर को ट्रेन से टक्कर मारा था लेकिन कोई चपेट में नहीं आया था। 13 मार्च 2012 को सलेमपुर के पिपरा नाजिर के समीप मानव रहित फाटक पर गोदान एक्सप्रेस की चपेट में आने से ट्रैक्टर चालक राजू की जहां मौत हो गई। वहीं इस पर सवार अमित घायल हो गया था। 12 अगस्त 2012 को पिपरा नाजिर मानव रहित फाटक पर निरीक्षण यान की चपेट में आने पड़री बाजार गांव के एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई थी। परिवार के सिर्फ एक बालक बचा था।
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इन हादसों में 29 लोगों के जान गंवाने के बाद रेल प्रशासन की नीद खुली और पिपरा नाजिर, नोनापार, अघैला, चकरवा, पीआरडी पीजी कॉलेज के समीप मानव रहित फाटकों को रेलवे ने मानव संरक्षित फाटक बना दिया। लेकिन अभी भी बनकटा-भाटपाररानघी, बनकटा-मैरवा और मैरवा-जीरादेई रेल खंड पर मानव रहित फाटक हैं। रेलवे की ओर से यहां कोई इंतजाम नहीं किया गया है। जान जोखिम में डालकर लोग मानव रहित फाटक पार करते हैं। स्टेशन अधीक्षक परशुराम तिवारी ने बताया कि जिले में तीन मानव रहित फाटक हैं। एक पर अंडर पास का कार्य चल रहा है। अधिकांश फाटों को संरक्षित समपार कर दिया गया है।