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याद किए गए शहीद रामचंद्र विद्यार्थी और शिवराज
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याद किए गए शहीद रामचंद्र विद्यार्थी और शिवराज
देसही देवरिया। अमर शहीद रामचंद्र विद्यार्थी और शिवराज सोनार को उनके पैतृक गांवों में उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया। लोगों ने देश को आजाद कराने में इनके सहयोग व बलिदान से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
देसही देवरिया क्षेत्र के नौतन हथियागढ़ गांव के शहीद रामचंद्र विद्द्यार्थी का जन्म 1 अप्रैल, 1929 को हुआ था। उनके पिता का नाम बाबूलाल प्रजापति और माता का नाम मोतिरानी देवी था। रामचंद्र चार भाइयों में बड़े थे। गोपीनाथ, रामबड़ाई प्रजापति, रामपरोजन प्रजापति उनके छोटे भाई हैं। इस समय रामबड़ाई प्रजापति जीवित हैं। रामचंद्र तरकुलवा क्षेत्र के बसंतपुर धुसी इंटर कॉलेज में कक्षा सात के छात्र थे। देश की आजादी के लिए उन दिनों जगह-जगह अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन हो रहे थे। तीव्र हो रहे आंदोलनों को बर्बरता पूर्वक कुचला जा रहा था। रामचंद्र विद्यार्थी के मन में भी आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ धधक रही चिंगारी फूट पड़ी। 13 अगस्त, को अपने साथियों के साथ देवरिया कलेक्ट्रेट पर तिरंगा फहराने की योजना बना डाली। घर आकर जब मां को यह बात बताई तो उन्होंने उम्र का हवाला देकर बहुत मना किया। मगर उनके इरादे नहीं बदले। 14 अगस्त, 1942 को मां के पैर छूकर आशीर्वाद लेकर सिर पर कफ़न बांधकर यह बालक निकल पड़ा। साथियों संग कलेक्ट्रेट पर पहुंचकर बरतानिया झंडा उतारकर भारतीय तिरंगा फहरा दिया। भारत माता की जय बोल ही रहे थे कि अंग्रेज डीएम उमराव सिंह ने गोलियां चलाने का हुक्म दे दिया। चार से पांच गोलियां सीने पर लगी। सीना तो छलनी हो गया। मगर, यह वीर बालक धरती मां की गोद में सदा के लिए सोने तक इंकलाब जिंदाबाद बोलते रहे। उनकी वीरता और जयघोष से अंग्रेज सिपाही भी शर्मसार हो गए। रामचंद्र विद्यार्थी का सहयोग करने के लिए क्षेत्र के ही सहोदर पट्टी गांव के शिवराज उर्फ सोना स्वर्णकार को भी लाठियों से पीटा गया। कुछ दिन बाद वह भी शहीद हो गए। शनिवार को नौतन हथियागढ़ और सहोदरपट्टी बाजारों में स्थित दोनों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उनको याद किया गया। जनता समता पार्टी के अध्यक्ष रणजीत विश्वकर्मा ने कहा कि यह क्षेत्र बहुत सौभाग्यशाली है कि शहीद रामचंद्र विद्यार्थी और शिवराज सोनार का जन्म हुआ। रामचंद्र ने 13 वर्ष 3 माह की उम्र में अपने मजबूत इरादे से अपना नाम अमर कर गए। इस दौरान शहीद रामचंद्र विद्यार्थी के छोटे भाई रामबड़ाई प्रजापति व ब्रजेश प्रजापति को सम्मानित किया गया। इस दौरान पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि नन्हे सिंह, गोरख पटेल, राजकेश्वर जायसवाल, इंद्रासन गुप्ता, कैलाश जायसवाल, सुरेंद्र सिंह, रामध्यान, चंद्रभान पासवान, बशीर, अरविंद, ऋषिकेश चौहान, अशोक सैनी, महेश, गुड्डू, राजू, आदि मौजूद रहे।
शहीद रामचंद्र विद्यार्थी को प्रजापति महासंघ ने दी श्रद्धांजलि
देवरिया। अखिल भारतीय प्रजापति महासंघ के पदाधिकारियों ने शनिवार को रामलीला मैदान स्थित शहीद रामचंद्र विद्यार्थी के स्मारक पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। संगठन के उत्तर प्रदेश पूर्वी जोन के अध्यक्ष रामविलास प्रजापति ने कहा कि 14 अगस्त 1942 को रामचंद्र विद्यार्थी ने जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय भवन से यूनियन जैक उतारकर तिरंगा फहराया था। इसी दौरान वे अंग्रेजों की गोलियों से शहीद हो गए। उस समय उनकी अवस्था मात्र 13 वर्ष चार माह थी। देश की आजादी के लिए शहीद होने वाले सभी जाबांज शहीदों को संगठन सलाम करता है। इस दौरान जिलाध्यक्ष पृथ्वीनारायण प्रजापति, हरिओम प्रजापति, राजेश कजुमार, परमहंस प्रजापति, सुरेश, ज्वाला प्रसाद, ज्ञानचंद, शिवचंद, सुभाष चंद, डॉ.अशोक, गेदालाल आदि मौजूद रहे।
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अमर शहीद पंडित विश्वनाथ और जगन्नाथ मल्ल को दी गई श्रद्धांजलि
बरहज। नगर के मुख्य चौक स्थित अमर शहीद पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल के बलिदान दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहीद स्थली पर अधिकारियों और नगर के लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। अधिकारियों का कहना था कि देश का हर एक नागरिक आजादी के दीवानों का ऋणी है। निष्ठा और ईमानदारी से फर्जों का निर्वहन करना ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
बरहज नगर में प्रभातफेरी निकाली गई। मुख्य चौक स्थित शहीद स्मारक पर शनिवार को नगरपालिका की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहीद स्थली को रंग-रोगन, गुब्बारा, तोरण-पताकाओं आदि से सजाया गया था। एसडीएम संजीव कुमार यादव, एसडीएम न्यायिक सुनील कुमार सिंह, सीओ देवआनंद ने देशप्रेम का पाठ पढ़ाया। बताया गया कि 14 अगस्त 1942 को पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल ने नगर को आजाद घोषित करा दिया था। बौखलाए अंग्रेज अफसर कैप्टन मूर की गोली लगने के बाद भी आजादी के दोनों दीवानों ने तिरंगे को झुकने नहीं दिया था। इस दौरान इंस्पेक्टर आनंद टीजे सिंह, एसआई सुमित राय, आनंद सिंह, मनोज गुप्त, सरवन जोखन बाबू, अनूप साहा, अंकित सिंह, रवि जायसवाल, पवन मद्धेशिया, बिट्टू सिंह, अखिलेश कुमार, अजय कुमार सिंह, अन्नू सिंह, रतनबीर, शंभूदयाल आदि मौजूद रहे।
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देसही देवरिया। अमर शहीद रामचंद्र विद्यार्थी और शिवराज सोनार को उनके पैतृक गांवों में उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया। लोगों ने देश को आजाद कराने में इनके सहयोग व बलिदान से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
देसही देवरिया क्षेत्र के नौतन हथियागढ़ गांव के शहीद रामचंद्र विद्द्यार्थी का जन्म 1 अप्रैल, 1929 को हुआ था। उनके पिता का नाम बाबूलाल प्रजापति और माता का नाम मोतिरानी देवी था। रामचंद्र चार भाइयों में बड़े थे। गोपीनाथ, रामबड़ाई प्रजापति, रामपरोजन प्रजापति उनके छोटे भाई हैं। इस समय रामबड़ाई प्रजापति जीवित हैं। रामचंद्र तरकुलवा क्षेत्र के बसंतपुर धुसी इंटर कॉलेज में कक्षा सात के छात्र थे। देश की आजादी के लिए उन दिनों जगह-जगह अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन हो रहे थे। तीव्र हो रहे आंदोलनों को बर्बरता पूर्वक कुचला जा रहा था। रामचंद्र विद्यार्थी के मन में भी आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ धधक रही चिंगारी फूट पड़ी। 13 अगस्त, को अपने साथियों के साथ देवरिया कलेक्ट्रेट पर तिरंगा फहराने की योजना बना डाली। घर आकर जब मां को यह बात बताई तो उन्होंने उम्र का हवाला देकर बहुत मना किया। मगर उनके इरादे नहीं बदले। 14 अगस्त, 1942 को मां के पैर छूकर आशीर्वाद लेकर सिर पर कफ़न बांधकर यह बालक निकल पड़ा। साथियों संग कलेक्ट्रेट पर पहुंचकर बरतानिया झंडा उतारकर भारतीय तिरंगा फहरा दिया। भारत माता की जय बोल ही रहे थे कि अंग्रेज डीएम उमराव सिंह ने गोलियां चलाने का हुक्म दे दिया। चार से पांच गोलियां सीने पर लगी। सीना तो छलनी हो गया। मगर, यह वीर बालक धरती मां की गोद में सदा के लिए सोने तक इंकलाब जिंदाबाद बोलते रहे। उनकी वीरता और जयघोष से अंग्रेज सिपाही भी शर्मसार हो गए। रामचंद्र विद्यार्थी का सहयोग करने के लिए क्षेत्र के ही सहोदर पट्टी गांव के शिवराज उर्फ सोना स्वर्णकार को भी लाठियों से पीटा गया। कुछ दिन बाद वह भी शहीद हो गए। शनिवार को नौतन हथियागढ़ और सहोदरपट्टी बाजारों में स्थित दोनों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उनको याद किया गया। जनता समता पार्टी के अध्यक्ष रणजीत विश्वकर्मा ने कहा कि यह क्षेत्र बहुत सौभाग्यशाली है कि शहीद रामचंद्र विद्यार्थी और शिवराज सोनार का जन्म हुआ। रामचंद्र ने 13 वर्ष 3 माह की उम्र में अपने मजबूत इरादे से अपना नाम अमर कर गए। इस दौरान शहीद रामचंद्र विद्यार्थी के छोटे भाई रामबड़ाई प्रजापति व ब्रजेश प्रजापति को सम्मानित किया गया। इस दौरान पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि नन्हे सिंह, गोरख पटेल, राजकेश्वर जायसवाल, इंद्रासन गुप्ता, कैलाश जायसवाल, सुरेंद्र सिंह, रामध्यान, चंद्रभान पासवान, बशीर, अरविंद, ऋषिकेश चौहान, अशोक सैनी, महेश, गुड्डू, राजू, आदि मौजूद रहे।
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शहीद रामचंद्र विद्यार्थी को प्रजापति महासंघ ने दी श्रद्धांजलि
देवरिया। अखिल भारतीय प्रजापति महासंघ के पदाधिकारियों ने शनिवार को रामलीला मैदान स्थित शहीद रामचंद्र विद्यार्थी के स्मारक पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। संगठन के उत्तर प्रदेश पूर्वी जोन के अध्यक्ष रामविलास प्रजापति ने कहा कि 14 अगस्त 1942 को रामचंद्र विद्यार्थी ने जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय भवन से यूनियन जैक उतारकर तिरंगा फहराया था। इसी दौरान वे अंग्रेजों की गोलियों से शहीद हो गए। उस समय उनकी अवस्था मात्र 13 वर्ष चार माह थी। देश की आजादी के लिए शहीद होने वाले सभी जाबांज शहीदों को संगठन सलाम करता है। इस दौरान जिलाध्यक्ष पृथ्वीनारायण प्रजापति, हरिओम प्रजापति, राजेश कजुमार, परमहंस प्रजापति, सुरेश, ज्वाला प्रसाद, ज्ञानचंद, शिवचंद, सुभाष चंद, डॉ.अशोक, गेदालाल आदि मौजूद रहे।
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अमर शहीद पंडित विश्वनाथ और जगन्नाथ मल्ल को दी गई श्रद्धांजलि
बरहज। नगर के मुख्य चौक स्थित अमर शहीद पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल के बलिदान दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहीद स्थली पर अधिकारियों और नगर के लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। अधिकारियों का कहना था कि देश का हर एक नागरिक आजादी के दीवानों का ऋणी है। निष्ठा और ईमानदारी से फर्जों का निर्वहन करना ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
बरहज नगर में प्रभातफेरी निकाली गई। मुख्य चौक स्थित शहीद स्मारक पर शनिवार को नगरपालिका की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहीद स्थली को रंग-रोगन, गुब्बारा, तोरण-पताकाओं आदि से सजाया गया था। एसडीएम संजीव कुमार यादव, एसडीएम न्यायिक सुनील कुमार सिंह, सीओ देवआनंद ने देशप्रेम का पाठ पढ़ाया। बताया गया कि 14 अगस्त 1942 को पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल ने नगर को आजाद घोषित करा दिया था। बौखलाए अंग्रेज अफसर कैप्टन मूर की गोली लगने के बाद भी आजादी के दोनों दीवानों ने तिरंगे को झुकने नहीं दिया था। इस दौरान इंस्पेक्टर आनंद टीजे सिंह, एसआई सुमित राय, आनंद सिंह, मनोज गुप्त, सरवन जोखन बाबू, अनूप साहा, अंकित सिंह, रवि जायसवाल, पवन मद्धेशिया, बिट्टू सिंह, अखिलेश कुमार, अजय कुमार सिंह, अन्नू सिंह, रतनबीर, शंभूदयाल आदि मौजूद रहे।