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Deoria News: दो धमाकों से हिल गया जहाज, आग का गुबार देख जान बचाने को भागे कर्मचारी
Fri, 19 Jun 2026 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 19 Jun 2026 12:07 AM IST
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पैकौली। ओमान के समुद्री क्षेत्र में 10 जून को हुए अमेरिकी बम हमले की भयावह तस्वीर उस जहाज पर जीवित बचे कर्मचारियों की जुबानी सामने आई है। इनके मुताबिक सुबह करीब साढ़े सात बजे अचानक ही दो जोरदार धमाके हुए, जिससे जहाज हिलने लगा। आंख खुली तो आसमान में उठती आग की ऊंची लपटें दिखीं। पल भर में लगा कि यहीं जीवन खत्म हो जाएगा। अगले चार घंटे तक अगले धमाके या फिर आग की लपटों में जल जाने की आशंका से शरीर थरथर कांप रहा था।
हमले में जान गंवाने वाले शिवानंद चौरसिया के रूम पार्टनर त्रिभुवन चौहान गौरी बाजार के जोड़उरा गांव और अमरेंद्र चौहान गौरी बाजार के बेलही गांव के रहने वाले हैं। ये दोनों भी उस खौफनाक मंजर के वक्त उसी जहाज पर सवार थे, जिस पर शिवानंद की ड्यूटी थी।
उन्होंने बताया कि सुबह करीब 7:30 बजे वे लोग अपने केबिन में नाश्ता कर रहे थे। तभी एक के बाद एक दो जोरदार धमाके हुए। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि पूरा जहाज कांप उठा। लोग चिल्लाते हुए जहाज के अगले हिस्से की ओर भागने लगे और सुरक्षित स्थान तलाश कर छिप गए। सभी के मन में डर था कि कहीं एक और धमाका न हो जाए।
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त्रिभुवन और अमरेंद्र के अनुसार, घटना के तुरंत बाद वॉकी-टॉकी के जरिये पास मौजूद दूसरी जहाज को सूचना दी गई। हमले के डर से दूसरी जहाज से भी बचाव दल आगे नहीं बढ़ा। करीब चार घंटे बाद बचाव दल पहुंचा और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस दौरान जहाज पर आग तेजी से फैल रही थी। आग बुझाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे कर्मचारियों में और अधिक भय व्याप्त हो गया था।
बचाव के दौरान जब कर्मचारी एक-दूसरे को खोज रहे थे, तब हिमाचल प्रदेश निवासी आदित्य शर्मा जहाज के ऊपरी हिस्से में घायल अवस्था में पड़े मिले। वह उस समय जीवित थे, लेकिन आग और धुएं के कारण कोई उनकी मदद नहीं कर सका। सभी लोग सहमे हुए थे और ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि किसी तरह उनकी जान बच जाए। दूसरे जहाज पर पहुंचने के बाद कर्मियों की दोबारा गिनती की गई तो दो लोग लापता थे।
करीब छह घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इसके बाद लापता कर्मचारियों की खोजबीन की गई तो शिवानंद चौरसिया और आंध्र प्रदेश के चीफ इंजीनियर सुरेश पटनाला के शव मिला। दोनों आग की भीषण लपटों में फंस गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके के वक्त शिवानंद चौरसिया और सुरेश पटनाला इंजन के पास कार्य कर रहे थे, जबकि आदित्य शर्मा नाश्ता करने के बाद बर्तन धो रहा था। संवाद
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हमले में जान गंवाने वाले शिवानंद चौरसिया के रूम पार्टनर त्रिभुवन चौहान गौरी बाजार के जोड़उरा गांव और अमरेंद्र चौहान गौरी बाजार के बेलही गांव के रहने वाले हैं। ये दोनों भी उस खौफनाक मंजर के वक्त उसी जहाज पर सवार थे, जिस पर शिवानंद की ड्यूटी थी।
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उन्होंने बताया कि सुबह करीब 7:30 बजे वे लोग अपने केबिन में नाश्ता कर रहे थे। तभी एक के बाद एक दो जोरदार धमाके हुए। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि पूरा जहाज कांप उठा। लोग चिल्लाते हुए जहाज के अगले हिस्से की ओर भागने लगे और सुरक्षित स्थान तलाश कर छिप गए। सभी के मन में डर था कि कहीं एक और धमाका न हो जाए।
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त्रिभुवन और अमरेंद्र के अनुसार, घटना के तुरंत बाद वॉकी-टॉकी के जरिये पास मौजूद दूसरी जहाज को सूचना दी गई। हमले के डर से दूसरी जहाज से भी बचाव दल आगे नहीं बढ़ा। करीब चार घंटे बाद बचाव दल पहुंचा और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस दौरान जहाज पर आग तेजी से फैल रही थी। आग बुझाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे कर्मचारियों में और अधिक भय व्याप्त हो गया था।
बचाव के दौरान जब कर्मचारी एक-दूसरे को खोज रहे थे, तब हिमाचल प्रदेश निवासी आदित्य शर्मा जहाज के ऊपरी हिस्से में घायल अवस्था में पड़े मिले। वह उस समय जीवित थे, लेकिन आग और धुएं के कारण कोई उनकी मदद नहीं कर सका। सभी लोग सहमे हुए थे और ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि किसी तरह उनकी जान बच जाए। दूसरे जहाज पर पहुंचने के बाद कर्मियों की दोबारा गिनती की गई तो दो लोग लापता थे।
करीब छह घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इसके बाद लापता कर्मचारियों की खोजबीन की गई तो शिवानंद चौरसिया और आंध्र प्रदेश के चीफ इंजीनियर सुरेश पटनाला के शव मिला। दोनों आग की भीषण लपटों में फंस गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके के वक्त शिवानंद चौरसिया और सुरेश पटनाला इंजन के पास कार्य कर रहे थे, जबकि आदित्य शर्मा नाश्ता करने के बाद बर्तन धो रहा था। संवाद