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Deoria News: बढ़ती गई आबादी, सड़कें वही, पैदल चलना भी दुश्वार
Wed, 03 Dec 2025 11:37 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 03 Dec 2025 11:37 PM IST
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रेलवे स्टेशन से तहसील की ओर जाने वाली सड़क
देवरिया। शहर में करीब ढाई लाख की आबादी रहती है। रोजाना इसमें वृद्धि भी होती रहती है। नित नए मकान बनते रहते हैं। इसके अलावा रोजी-रोजगार के सिलसिले में हजारों लोग किराए पर रहते हैं।
इसके चलते शहर की जनसंख्या तीन लाख के पार है। इसके अलावा जरूरी कार्यों से रोजाना शहर में आने वाले लोगों की बड़ी संख्या है।
इन सबके लिए आने-जाने के लिए शहर की सड़कों की चौड़ाई कम पड़ रही है। महायोजना 2031 में इन सड़कों की चौड़ाई आबादी को ध्यान में रखकर तय की गई है। इसको ध्यान में रखकर देखें तो इन सड़कों पर भारी अतिक्रमण है। इसके चलते शहर की यह पतली सड़कें जाम की वजह बनती जा रही हैं।
शहर में जाम की समस्या आम है। सिविल लाइंस से लेकर रामलीला मैदान रोड, मोतीलाल रोड से लेकर जलकल रोड तक हर जगह जाम की स्थिति बनी रहती है। यही हाल राघव नगर का भी है। इसके अलावा भीखमपुर रोड पर पूरे दिन जाम लगा रहता है।
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इस सड़क पर जिले के बरियारपुर, गोरयाघाट के ट्रैफिक के अलावा बिहार से आने जाने वाले लोगों का ट्रैफिक भी है। भारी ट्रैफिक के चलते इन सड़कों पर दिन में चलना मुश्किल रहता है। सड़क के किनारे की जगह अतिक्रमण और ठेले खोमचे और पटरी व्यवसायियों के कब्जे में है। प्रशासन द्वारा इस अतिक्रमण को हटाने में इन व्यवसायियों का मजबूत संगठन आड़े आ जाता है। इसके बावजूद प्रशासन जब तक इन पटरी व्यवसायियों के कब्जे से पटरियों को मुक्त कराता रहता है। कुछ दिन बाद इन सड़कों की स्थिति पूर्वववत हो जाती है। परिणास्वरूप इन सड़कों पर चलना किसी मुसीबत से कम नहीं है।
स्टेशन रोड जाने के सभी रास्ते संकरे : शहर में स्टेशन रोड जाने के सभी रास्ते संकरे हैं। कसया ढाला से लेकर मछली हट्टा तक सड़क पर दिन भर ट्रकों की आवाजाही लगी रहती है। ट्रकों के हिसाब से यह सड़क चौड़ी नहीं है।
इस रोड पर मछली और मीट व्यवसायियों को हटाने के अभी तक के प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हुए। वहीं तहसील से लेकर अबूबकर नगर होकर रेलवे स्टेशन जाने पर अगर दो चार पहिया वाहन आमने सामने आ जाए तो फिर निकलने के लिए जगह ढूंढ़नी पड़ती है। इसके चलते रेलवे स्टेशन जाना भी टेढ़ा काम है। भीखमपुर रोड पर भी लगता है जाम : शहर के भीखमपुर रोड पर भी पूरे दिन जाम लगा रहता है। महायोजना में इसकी चौड़ाई 100 फीट बताई गई है पर मौके पर यह उतनी नहीं है। इस सड़क से बिहार और जिले के अंदरुनी क्षेत्र से आने वाले लोगों के अलावा शहर की 20 प्रतिशत आबादी भी होकर गुजरती है।
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इसके चलते शहर की जनसंख्या तीन लाख के पार है। इसके अलावा जरूरी कार्यों से रोजाना शहर में आने वाले लोगों की बड़ी संख्या है।
इन सबके लिए आने-जाने के लिए शहर की सड़कों की चौड़ाई कम पड़ रही है। महायोजना 2031 में इन सड़कों की चौड़ाई आबादी को ध्यान में रखकर तय की गई है। इसको ध्यान में रखकर देखें तो इन सड़कों पर भारी अतिक्रमण है। इसके चलते शहर की यह पतली सड़कें जाम की वजह बनती जा रही हैं।
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शहर में जाम की समस्या आम है। सिविल लाइंस से लेकर रामलीला मैदान रोड, मोतीलाल रोड से लेकर जलकल रोड तक हर जगह जाम की स्थिति बनी रहती है। यही हाल राघव नगर का भी है। इसके अलावा भीखमपुर रोड पर पूरे दिन जाम लगा रहता है।
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इस सड़क पर जिले के बरियारपुर, गोरयाघाट के ट्रैफिक के अलावा बिहार से आने जाने वाले लोगों का ट्रैफिक भी है। भारी ट्रैफिक के चलते इन सड़कों पर दिन में चलना मुश्किल रहता है। सड़क के किनारे की जगह अतिक्रमण और ठेले खोमचे और पटरी व्यवसायियों के कब्जे में है। प्रशासन द्वारा इस अतिक्रमण को हटाने में इन व्यवसायियों का मजबूत संगठन आड़े आ जाता है। इसके बावजूद प्रशासन जब तक इन पटरी व्यवसायियों के कब्जे से पटरियों को मुक्त कराता रहता है। कुछ दिन बाद इन सड़कों की स्थिति पूर्वववत हो जाती है। परिणास्वरूप इन सड़कों पर चलना किसी मुसीबत से कम नहीं है।
स्टेशन रोड जाने के सभी रास्ते संकरे : शहर में स्टेशन रोड जाने के सभी रास्ते संकरे हैं। कसया ढाला से लेकर मछली हट्टा तक सड़क पर दिन भर ट्रकों की आवाजाही लगी रहती है। ट्रकों के हिसाब से यह सड़क चौड़ी नहीं है।
इस रोड पर मछली और मीट व्यवसायियों को हटाने के अभी तक के प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हुए। वहीं तहसील से लेकर अबूबकर नगर होकर रेलवे स्टेशन जाने पर अगर दो चार पहिया वाहन आमने सामने आ जाए तो फिर निकलने के लिए जगह ढूंढ़नी पड़ती है। इसके चलते रेलवे स्टेशन जाना भी टेढ़ा काम है। भीखमपुर रोड पर भी लगता है जाम : शहर के भीखमपुर रोड पर भी पूरे दिन जाम लगा रहता है। महायोजना में इसकी चौड़ाई 100 फीट बताई गई है पर मौके पर यह उतनी नहीं है। इस सड़क से बिहार और जिले के अंदरुनी क्षेत्र से आने वाले लोगों के अलावा शहर की 20 प्रतिशत आबादी भी होकर गुजरती है।