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Deoria News: खुशियां लेकर आया चांद...ईद ने बढ़ाई राैनक
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अलविदा की नमाज के बाद बाजार में निकले खरीदार।
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देवरिया। मुकद्दस रमजान का 30 रोजा मुकम्मल होने पर शुक्रवार की शाम को मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में खुशियां छा गईं। ईद के चांद की तस्दीक होने के साथ लोगों ने एक दूसरे को ईद की बधाई दी। लोगों ने ईद मुबारक बाद के मैसेज, इसके साथ ही ईद की तैयारी में लोग जुट गए।
शुक्रवार को मुकद्दस रमजान का 30वां रोजा और 5वां जुमा अलविदा था। सुबह से ही लोग अलविदा जुमा की तैयारी में लोग जुट गए।
तहसील रोड स्थित जमा मस्जिद समेत अन्य मस्जिदों में 12 बजे से लोग नमाज पढ़ने के लिए आने लगे पेश इमाम मौलाना अशफाक अहमद कासमी ने अलविदा जुमा की नमाज पढ़ाई। उन्होंने रोजेदारों से मुकद्दस रमजान की तरह जिंदगी गुजर बसर करने का अपील की।
शाम को ईद के चांद की दीदार होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। चहुंओर ईद की खुशी छा गई। शहर के अबबूकर नगर, बांस देवरिया, अहमद नगर, अली नगर के अलावा रामपुर कारखाना, पथरदेवा, बघौचघाट, भटनी दादन, मदनपुर, लार समेत जिले के दूर दराज के गांवों तक ईद की खुशी फैल गई।
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अलविदा की नमाज में देश के अमन की मांगी दुआ : बघौचघाट प्रतिनिधि के अनुसार, मस्जिदों के अंदरूनी हिस्से नमाज़ियों से भर गए, जबकि कई जगहों पर लोगों ने सड़कों और खुले मैदानों में भी नमाज अदा की। इस मौके पर बेहद रूहानी माहौल देखने को मिला और हर तरफ इबादत का माहौल बना रहा।
जुमा की नमाज से पहले उलमा-ए-कराम ने अपने बयान में रमजान की अहमियत और फज़ीलत पर रोशनी डाली और आखिरी दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि रमजान हमें सब्र, तकवा और भाईचारे का पैगाम देता है, जिसे हमें अपनी जिंदगी में अपनाना चाहिए।
इसी क्रम में सुन्नी कादरी मस्जिद बलवनिया के इमाम व खतीब हाफिज मोनिस आजम ने अपने बयान में सभी लोगों को आपसी एकता और भाईचारे का संदेश देते हुए कहा कि मौजूदा हालात में उम्मत को आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होने की सख्त जरूरत है ताकि देश, समाज मजबूत हो सके ।
उन्होंने कहा कि एकता ही हमारी असली ताकत है, जिसके जरिए हम हर मुश्किल का सामना कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने मोहब्बत, भाईचारा और सहिष्णुता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।नमाज़ के बाद मुल्क व मिल्लत की सलामती, अमन-चैन और खुशहाली के लिए खास दुआएं की गईं। इस मौके पर लोगों के बीच एकता और भाईचारे की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली।
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शुक्रवार को मुकद्दस रमजान का 30वां रोजा और 5वां जुमा अलविदा था। सुबह से ही लोग अलविदा जुमा की तैयारी में लोग जुट गए।
तहसील रोड स्थित जमा मस्जिद समेत अन्य मस्जिदों में 12 बजे से लोग नमाज पढ़ने के लिए आने लगे पेश इमाम मौलाना अशफाक अहमद कासमी ने अलविदा जुमा की नमाज पढ़ाई। उन्होंने रोजेदारों से मुकद्दस रमजान की तरह जिंदगी गुजर बसर करने का अपील की।
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शाम को ईद के चांद की दीदार होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। चहुंओर ईद की खुशी छा गई। शहर के अबबूकर नगर, बांस देवरिया, अहमद नगर, अली नगर के अलावा रामपुर कारखाना, पथरदेवा, बघौचघाट, भटनी दादन, मदनपुर, लार समेत जिले के दूर दराज के गांवों तक ईद की खुशी फैल गई।
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अलविदा की नमाज में देश के अमन की मांगी दुआ : बघौचघाट प्रतिनिधि के अनुसार, मस्जिदों के अंदरूनी हिस्से नमाज़ियों से भर गए, जबकि कई जगहों पर लोगों ने सड़कों और खुले मैदानों में भी नमाज अदा की। इस मौके पर बेहद रूहानी माहौल देखने को मिला और हर तरफ इबादत का माहौल बना रहा।
जुमा की नमाज से पहले उलमा-ए-कराम ने अपने बयान में रमजान की अहमियत और फज़ीलत पर रोशनी डाली और आखिरी दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि रमजान हमें सब्र, तकवा और भाईचारे का पैगाम देता है, जिसे हमें अपनी जिंदगी में अपनाना चाहिए।
इसी क्रम में सुन्नी कादरी मस्जिद बलवनिया के इमाम व खतीब हाफिज मोनिस आजम ने अपने बयान में सभी लोगों को आपसी एकता और भाईचारे का संदेश देते हुए कहा कि मौजूदा हालात में उम्मत को आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होने की सख्त जरूरत है ताकि देश, समाज मजबूत हो सके ।
उन्होंने कहा कि एकता ही हमारी असली ताकत है, जिसके जरिए हम हर मुश्किल का सामना कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने मोहब्बत, भाईचारा और सहिष्णुता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।नमाज़ के बाद मुल्क व मिल्लत की सलामती, अमन-चैन और खुशहाली के लिए खास दुआएं की गईं। इस मौके पर लोगों के बीच एकता और भाईचारे की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली।