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Deoria News: शहर से गांव तक कुत्तों का आतंक, हर राेज 40 मासूमों को बना रहे शिकार
Sun, 13 Aug 2023 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 13 Aug 2023 11:14 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में घूम रहे कुत्ता।संवाद
देवरिया। शहर से देहात तक देसी कुत्तों का आतंक फैला हुआ है। पिटबुल और रॉटविलर जैसी विदेशी नस्ल के कुत्तों से भी ज्यादा खूंखार देसी साबित हो रहे हैं। गली-गली बच्चों और वयस्कों को कुत्ते के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके बाद भी आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
भटनी में बच्चे को कुत्तों के काटने की घटना के बाद लोगों में देसी नस्ल के कुत्तों के प्रति और भय बैठ गया है। विदेशी से ज्यादा इन दिनों देसी कुत्ते खूंखार दिखाई दे रहे हैं। इसका अंदाजा जिला अस्पताल के रिकार्ड से लगा सकते हैं। यहां हर रोज एंटी रैबीज लगवाने आने वाले औसतन 100 लोगों में से 40 छोटे बच्चे रह रहे हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि सरकारी इंतजाम के भरोसे रहने के बजाए इन दिनों अपना और अपने बच्चों का ख्याल रखें। शहर की सड़कों पर रात में निकल रहे हो या देहात का खेत खलिहान तक कुत्ते हमला कर सकते हैं। पिछले सप्ताह हर रोज जिला अस्पताल में करीब 130 लोग वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंचे हैं। इनमें 35 से 40 बच्चे थे। दरअसल शहर की गलियों से लेकर प्रमुख सड़कों पर झुंड में कुत्ते डेरा जमा कर मौजूद रह रहे हैं। संख्या इतनी ज्यादा होती है कि अगर सावधान नहीं रहे तो कुत्तों का झुंड पीछे लग जाएगा। कभी भी यह हमला कर सकते हैं।
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कुत्ता काटे तो जरूर लगवाएं एआरवी
देवरिया। डॉ. सिराजुद्दीन ने बताया कि कुत्ता काटने के बाद तत्काल एआरवी नहीं लगवाते हैं तो जान जोखिम में पड़ सकती है। तत्काल तो दिक्कत नहीं होती है। पर जैसे-जैसे समय बीतता है वैसे-वैसे शरीर में संक्रमण बढ़ जाता है। इसलिए कुत्ते, बंदर, सियार, इंसान के काटने पर एआरवी जरूर लगवाना चाहिए।
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- कुत्तों के काटने से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। मौसम में बदलाव के कारण कुत्तों के व्यवहार में बदलाव हुआ है और वह आक्रामक हो गए हैं। इनसे बचने की जरूरत है। अस्पताल में रैबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्र में है।
- डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस
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मेडिकल कॉलेज में चार दिन में एआरवी लगवाने पहुंचे मरीज
9 अगस्त- 101- बच्चे- 22
10 अगस्त- 116- बच्चे-28
11 जुलाई-124- बच्चे- 35
12 अगस्त- 130- बच्चे- 40
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भटनी में बच्चे को कुत्तों के काटने की घटना के बाद लोगों में देसी नस्ल के कुत्तों के प्रति और भय बैठ गया है। विदेशी से ज्यादा इन दिनों देसी कुत्ते खूंखार दिखाई दे रहे हैं। इसका अंदाजा जिला अस्पताल के रिकार्ड से लगा सकते हैं। यहां हर रोज एंटी रैबीज लगवाने आने वाले औसतन 100 लोगों में से 40 छोटे बच्चे रह रहे हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि सरकारी इंतजाम के भरोसे रहने के बजाए इन दिनों अपना और अपने बच्चों का ख्याल रखें। शहर की सड़कों पर रात में निकल रहे हो या देहात का खेत खलिहान तक कुत्ते हमला कर सकते हैं। पिछले सप्ताह हर रोज जिला अस्पताल में करीब 130 लोग वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंचे हैं। इनमें 35 से 40 बच्चे थे। दरअसल शहर की गलियों से लेकर प्रमुख सड़कों पर झुंड में कुत्ते डेरा जमा कर मौजूद रह रहे हैं। संख्या इतनी ज्यादा होती है कि अगर सावधान नहीं रहे तो कुत्तों का झुंड पीछे लग जाएगा। कभी भी यह हमला कर सकते हैं।
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कुत्ता काटे तो जरूर लगवाएं एआरवी
देवरिया। डॉ. सिराजुद्दीन ने बताया कि कुत्ता काटने के बाद तत्काल एआरवी नहीं लगवाते हैं तो जान जोखिम में पड़ सकती है। तत्काल तो दिक्कत नहीं होती है। पर जैसे-जैसे समय बीतता है वैसे-वैसे शरीर में संक्रमण बढ़ जाता है। इसलिए कुत्ते, बंदर, सियार, इंसान के काटने पर एआरवी जरूर लगवाना चाहिए।
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- कुत्तों के काटने से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। मौसम में बदलाव के कारण कुत्तों के व्यवहार में बदलाव हुआ है और वह आक्रामक हो गए हैं। इनसे बचने की जरूरत है। अस्पताल में रैबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्र में है।
- डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस
मेडिकल कॉलेज में चार दिन में एआरवी लगवाने पहुंचे मरीज
9 अगस्त- 101- बच्चे- 22
10 अगस्त- 116- बच्चे-28
11 जुलाई-124- बच्चे- 35
12 अगस्त- 130- बच्चे- 40