{"_id":"67f9686bbe8924b7030d80c8","slug":"tea-leaves-coloured-with-chemicals-will-spoil-your-health-deoria-news-c-208-1-sdn1004-151321-2025-04-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: केमिकल से रंगी चायपत्ती बिगाड़ देगी सेहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: केमिकल से रंगी चायपत्ती बिगाड़ देगी सेहत
Sat, 12 Apr 2025 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 12 Apr 2025 12:37 AM IST
विज्ञापन
बेचने के लिए दुकान पर रखी खुली चाप पत्ति।
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गौरी बाजार क्षेत्र में जनवरी के अंतिम सप्ताह में खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग ने बड़े पैमाने पर मिलावटी चायपत्ती पकड़ी थी। विभाग ने 120 क्विंटल करीब 14 लाख रुपये की चायपत्ती जब्त की थी। प्रयोगशाला की जांच में चायपत्ती में केमिकल कलर की मिलावट पाई गई थी।
कार्रवाई के बाद भी मिलावट खोर सुधर नहीं रहे हैं। कुछ दिन धंधा बंद करने के बाद फिर से सक्रिय हो गए हैं।
मिलावटी चायपत्ती सस्ती होने के कारण ग्रामीण और शहर के बाहरी इलाकों में धड़ल्ले से खपाया जा रहा है। इसके लगातार सेवन से लोग घातक बीमारियों के चपेट में आ सकते हैं।
यदि आप खुली चायपत्ती का प्रयोग कर रहे हैं तो विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में धंधेबाज बाजार में केमिकल युक्त चायपत्ती धड़ल्ले से बेच रहे हैं। यह सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचा रही है। ऐसी मिलावटी चाय का सेवन शरीर को बीमारियों का घर बना सकता है। इससे पाचन संबंधी समस्याएं और एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है।
विज्ञापन
इसी साल जनवरी में देवरिया के गौरी बाजार में चायपत्ती विक्रेता के यहां पड़े छापे से यह खुलासा हुआ है कि धंधेबाज असम से सस्ती घटिया चायपत्ती मंगाकर उसमें केमिकल और रंग मिलाकर स्ट्रांग बना रहे हैं।
अलग-अगल ब्रांड की कंपनियों की पन्नी छपवाकर उसमें मिलावटी चायपत्ती भरकर बेच रहे हैं। इन चायपत्तियों की आपूर्ति जिले के ग्रामीण इलाकों में की जा रही है। चाय दुकानदार इसकी सबसे ज्यादा खरीदारी करते हैं।
150 से 180 रुपये किलो यह चायपत्ती बाजार में उपलब्ध है। जिले में हर माह 25 से 30 लाख रुपये से अधिक की चायपत्ती का कारोबार होता है। मिलावटी चायपत्ती का कलर और स्वाद ऐसा है कि असली को भी मात देने के लिए काफी है।
दाम कम होने से होता है ज्यादा इस्तेमाल : बाजार में ब्रांडेड चायपत्ती का मूल्य 400 से 500 रुपये किलो तक हैं। जबकि खुली चायपत्तती 150 से 300 रुपये के बीच है।
इसमें 200 से 250 रुपये किलो वाली चायपत्ती की सबसे ज्यादा मांग है। 300 रुपये वाली चायपत्ती 30 फीसदी, 400 रुपये किलो वाली 20 फीसदी लोग इस्तेमाल करते हैं। जबकि 50 फीसदी लोग ही पैकेट वाली चायपत्ती का प्रयोग करते हैं।
विज्ञापन
देवरिया। गौरी बाजार क्षेत्र में जनवरी के अंतिम सप्ताह में खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग ने बड़े पैमाने पर मिलावटी चायपत्ती पकड़ी थी। विभाग ने 120 क्विंटल करीब 14 लाख रुपये की चायपत्ती जब्त की थी। प्रयोगशाला की जांच में चायपत्ती में केमिकल कलर की मिलावट पाई गई थी।
कार्रवाई के बाद भी मिलावट खोर सुधर नहीं रहे हैं। कुछ दिन धंधा बंद करने के बाद फिर से सक्रिय हो गए हैं।
मिलावटी चायपत्ती सस्ती होने के कारण ग्रामीण और शहर के बाहरी इलाकों में धड़ल्ले से खपाया जा रहा है। इसके लगातार सेवन से लोग घातक बीमारियों के चपेट में आ सकते हैं।
विज्ञापन
यदि आप खुली चायपत्ती का प्रयोग कर रहे हैं तो विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में धंधेबाज बाजार में केमिकल युक्त चायपत्ती धड़ल्ले से बेच रहे हैं। यह सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचा रही है। ऐसी मिलावटी चाय का सेवन शरीर को बीमारियों का घर बना सकता है। इससे पाचन संबंधी समस्याएं और एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है।
विज्ञापन
इसी साल जनवरी में देवरिया के गौरी बाजार में चायपत्ती विक्रेता के यहां पड़े छापे से यह खुलासा हुआ है कि धंधेबाज असम से सस्ती घटिया चायपत्ती मंगाकर उसमें केमिकल और रंग मिलाकर स्ट्रांग बना रहे हैं।
अलग-अगल ब्रांड की कंपनियों की पन्नी छपवाकर उसमें मिलावटी चायपत्ती भरकर बेच रहे हैं। इन चायपत्तियों की आपूर्ति जिले के ग्रामीण इलाकों में की जा रही है। चाय दुकानदार इसकी सबसे ज्यादा खरीदारी करते हैं।
150 से 180 रुपये किलो यह चायपत्ती बाजार में उपलब्ध है। जिले में हर माह 25 से 30 लाख रुपये से अधिक की चायपत्ती का कारोबार होता है। मिलावटी चायपत्ती का कलर और स्वाद ऐसा है कि असली को भी मात देने के लिए काफी है।
दाम कम होने से होता है ज्यादा इस्तेमाल : बाजार में ब्रांडेड चायपत्ती का मूल्य 400 से 500 रुपये किलो तक हैं। जबकि खुली चायपत्तती 150 से 300 रुपये के बीच है।
इसमें 200 से 250 रुपये किलो वाली चायपत्ती की सबसे ज्यादा मांग है। 300 रुपये वाली चायपत्ती 30 फीसदी, 400 रुपये किलो वाली 20 फीसदी लोग इस्तेमाल करते हैं। जबकि 50 फीसदी लोग ही पैकेट वाली चायपत्ती का प्रयोग करते हैं।