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अपहरण के मामले में न्यायालय की अवमानना में एसपी तलब
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अपहरण के मामले में न्यायालय की अवमानना में एसपी तलब
देवरिया। अपहरण के एक मामले में हाईकोर्ट के आदेश का अनुुपालन नहीं करना पुलिस को भारी पड़ गया। शुक्रवार को अपर सिविल जज अतुल कुमार ने इसे कोर्ट के आदेश की अवमानना माना। इस दौरान घंटों एसओ एवं सीओ भाटपाररानी को कोर्ट में खड़ा रहना पड़ा। पांच अप्रैल को एसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की बात बताई गई। उसके बाद अपर सिविल जज ने सुनवाई अगली तिथि तक टाल दी। इस दौरान कचहरी पुलिस छावनी के रूप में तब्दील रही।
भाटपाररानी थाना क्षेत्र के दिसतौली गांव निवासी प्रियंका कुशवाहा के पिता सुरेंद्र कुशवाहा ने वर्ष 2019 में अपनी पुत्री को अगवा कर ले जाने का आरोप लगाते हुए मुकेश बिंद निवासी कुसम्हा टोला महुअवा सहित तीन के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कराया है। पुलिस प्रियंका के पति को परेशान करने लगी, लेकिन उसका कोर्ट में बयान नहीं कराया। प्रियंका ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से मुकेश बिंद से शादी की है। उससे दो बच्चे भी हैं। मेरे पिता सुरेंद्र कुशवाहा ने मेरे पति एवं तीन अन्य लोगों पर जो केस दर्ज कराया है, वह गलत है। इस मामले में हाईकोर्ट डबल बेंच के न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र एवं रजनीश कुमार ने 22 फरवरी को प्रियंका का कोर्ट में बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया। तीन सप्ताह में पूरी जानकारी कोर्ट में तलब की। उधर मामले में सिविल जज की अदालत ने आदेश के अनुपालन के लिए संबंधित थाने को आदेश दिया, लेकिन पुलिस ने अनुपालन नहीं कराया। सिविल जज ने एसपी को 11 मार्च, 14 मार्च, 16 मार्च, 25 मार्च, 26 मार्च को लगातार पत्र लिखा और हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने को कहा। पुलिस ने आदेश का अनुपालन नहीं किया। इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने एक अप्रैल को एसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए पत्र लिखा। एसपी ने व्यस्त होने की वजह से सीओ भाटपाररानी पंचमलाल को कोर्ट में भेजा, जहां सिविल जज अतुल कुमार ने सीओ एवं एसओ को घंटों खड़ा कराकर आदेश की अवमानना की कार्रवाई के लिए चेेताया। काफी देर बाद जेडी अभियोजन राजीव कुमार कोर्ट में आए और एसपी का पक्ष रखकर एक अवसर मांगा। कोर्ट ने शपथ पत्र देने को कहा, जिस पर उन्होंने चुप्पी साध ली। बाद में सीओ भाटपाररानी ने मोबाइल फोन से अधिकारियों से वार्ता कर मंगलवार को एसपी के व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में रिपोर्ट देने की बात कही। कोर्ट ने पांच अप्रैल की तिथि नियत की है।
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देवरिया। अपहरण के एक मामले में हाईकोर्ट के आदेश का अनुुपालन नहीं करना पुलिस को भारी पड़ गया। शुक्रवार को अपर सिविल जज अतुल कुमार ने इसे कोर्ट के आदेश की अवमानना माना। इस दौरान घंटों एसओ एवं सीओ भाटपाररानी को कोर्ट में खड़ा रहना पड़ा। पांच अप्रैल को एसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की बात बताई गई। उसके बाद अपर सिविल जज ने सुनवाई अगली तिथि तक टाल दी। इस दौरान कचहरी पुलिस छावनी के रूप में तब्दील रही।
भाटपाररानी थाना क्षेत्र के दिसतौली गांव निवासी प्रियंका कुशवाहा के पिता सुरेंद्र कुशवाहा ने वर्ष 2019 में अपनी पुत्री को अगवा कर ले जाने का आरोप लगाते हुए मुकेश बिंद निवासी कुसम्हा टोला महुअवा सहित तीन के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कराया है। पुलिस प्रियंका के पति को परेशान करने लगी, लेकिन उसका कोर्ट में बयान नहीं कराया। प्रियंका ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से मुकेश बिंद से शादी की है। उससे दो बच्चे भी हैं। मेरे पिता सुरेंद्र कुशवाहा ने मेरे पति एवं तीन अन्य लोगों पर जो केस दर्ज कराया है, वह गलत है। इस मामले में हाईकोर्ट डबल बेंच के न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र एवं रजनीश कुमार ने 22 फरवरी को प्रियंका का कोर्ट में बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया। तीन सप्ताह में पूरी जानकारी कोर्ट में तलब की। उधर मामले में सिविल जज की अदालत ने आदेश के अनुपालन के लिए संबंधित थाने को आदेश दिया, लेकिन पुलिस ने अनुपालन नहीं कराया। सिविल जज ने एसपी को 11 मार्च, 14 मार्च, 16 मार्च, 25 मार्च, 26 मार्च को लगातार पत्र लिखा और हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने को कहा। पुलिस ने आदेश का अनुपालन नहीं किया। इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने एक अप्रैल को एसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए पत्र लिखा। एसपी ने व्यस्त होने की वजह से सीओ भाटपाररानी पंचमलाल को कोर्ट में भेजा, जहां सिविल जज अतुल कुमार ने सीओ एवं एसओ को घंटों खड़ा कराकर आदेश की अवमानना की कार्रवाई के लिए चेेताया। काफी देर बाद जेडी अभियोजन राजीव कुमार कोर्ट में आए और एसपी का पक्ष रखकर एक अवसर मांगा। कोर्ट ने शपथ पत्र देने को कहा, जिस पर उन्होंने चुप्पी साध ली। बाद में सीओ भाटपाररानी ने मोबाइल फोन से अधिकारियों से वार्ता कर मंगलवार को एसपी के व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में रिपोर्ट देने की बात कही। कोर्ट ने पांच अप्रैल की तिथि नियत की है।
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