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कस्तूूरबा विद्यालयों में भोजन की व्यवस्था स्वयं सहायता समूहों को देने की तैयारी
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कस्तूूरबा विद्यालयों में भोजन की व्यवस्था स्वयं सहायता समूहों को देने की तैयारी
शासन ने एनजीओ को चिह्नित कर रिपोर्ट भेजने के दिए निर्देश
ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक ने सीडीओ को भेजा पत्र
लगातार हो रही गड़बड़ियों को देखते हुए लिया गया निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कस्तूरबा विद्यालयों में छात्राओं को लगातार कम गुणवत्ता वाला नाश्ता एवं भोजन देने की शिकायतों के बाद अब खाने की व्यवस्था स्वयं सहायता समूहों को देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जिले के सभी ब्लॉकों से चयन करने के निर्देश दिए गए हैं। 20 सहायता समूहों का चयन कर लिया गया है। इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है।
जिले में वर्तमान में 13 कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। अभी यहां कुल 39 रसोइया मिलकर छात्राओं के लिए भोजन व नाश्ता तैयार करते हैं। बाहरी ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया के बाद खाद्य सामग्री उपलब्ध कराते हैं। खाने में लगातार गड़बड़ी की शिकायतें शासन को पहुंच रही है। आरोप तो यहां तक लगता है कि अधिकारी, वार्डेन व लेखाकार और सामानों की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार शासन से आए धन में से करीब 40 प्रतिशत की बंदरबांट कर लेते हैं। केवल 60 प्रतिशत में ही नाश्ता व भोजन की व्यवस्था की जाती है। इससे छात्राओं को मिलने वाला नाश्ता व भोजन की क्वालिटी को लेकर जिम्मेदारों पर लगातार प्रश्नचिह्न लगते रहते हैं। अब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से भोजन की आपूर्ति करने की योजना बनाई है। इसके लिए सीडीओ को पत्र भी शासन से आ चुका है। इसके लिए प्रतिदिन के मेन्यू सहित स्वयं सहायता समूहों की सूची सहित अन्य जानकारियां मांगी गई हैं।
कोट
पांच ब्लॉकों से 20 स्वयं सहायता समूहों का चयन कर लिया गया है। छह से और किया जाना है। यह तय किया जा रहा है कि समूह की महिलाएं केवल भोजन तैयार करेंगी कि खाद्यान्न सामग्री भी उन्हीं की होगी।
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-कुमार गौरव, जिला मिशन प्रबंधक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन।
कोट
कस्तूरबा विद्यालयों में भोजन की व्यवस्था के लिए स्वयं सहायता समूहों का चयन करने का निर्देश आया है। इस पर कुछ काम भी हो चुका है। शीघ्र ही इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
-विजय कुमार चौधरी, उपायुक्त राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन।
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शासन ने एनजीओ को चिह्नित कर रिपोर्ट भेजने के दिए निर्देश
ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक ने सीडीओ को भेजा पत्र
लगातार हो रही गड़बड़ियों को देखते हुए लिया गया निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कस्तूरबा विद्यालयों में छात्राओं को लगातार कम गुणवत्ता वाला नाश्ता एवं भोजन देने की शिकायतों के बाद अब खाने की व्यवस्था स्वयं सहायता समूहों को देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जिले के सभी ब्लॉकों से चयन करने के निर्देश दिए गए हैं। 20 सहायता समूहों का चयन कर लिया गया है। इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है।
जिले में वर्तमान में 13 कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। अभी यहां कुल 39 रसोइया मिलकर छात्राओं के लिए भोजन व नाश्ता तैयार करते हैं। बाहरी ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया के बाद खाद्य सामग्री उपलब्ध कराते हैं। खाने में लगातार गड़बड़ी की शिकायतें शासन को पहुंच रही है। आरोप तो यहां तक लगता है कि अधिकारी, वार्डेन व लेखाकार और सामानों की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार शासन से आए धन में से करीब 40 प्रतिशत की बंदरबांट कर लेते हैं। केवल 60 प्रतिशत में ही नाश्ता व भोजन की व्यवस्था की जाती है। इससे छात्राओं को मिलने वाला नाश्ता व भोजन की क्वालिटी को लेकर जिम्मेदारों पर लगातार प्रश्नचिह्न लगते रहते हैं। अब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से भोजन की आपूर्ति करने की योजना बनाई है। इसके लिए सीडीओ को पत्र भी शासन से आ चुका है। इसके लिए प्रतिदिन के मेन्यू सहित स्वयं सहायता समूहों की सूची सहित अन्य जानकारियां मांगी गई हैं।
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पांच ब्लॉकों से 20 स्वयं सहायता समूहों का चयन कर लिया गया है। छह से और किया जाना है। यह तय किया जा रहा है कि समूह की महिलाएं केवल भोजन तैयार करेंगी कि खाद्यान्न सामग्री भी उन्हीं की होगी।
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-कुमार गौरव, जिला मिशन प्रबंधक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन।
कोट
कस्तूरबा विद्यालयों में भोजन की व्यवस्था के लिए स्वयं सहायता समूहों का चयन करने का निर्देश आया है। इस पर कुछ काम भी हो चुका है। शीघ्र ही इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
-विजय कुमार चौधरी, उपायुक्त राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन।