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Deoria News: राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा संत गणिनाथ का जीवन
Sun, 31 Aug 2025 12:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 31 Aug 2025 12:29 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। दुग्धेश्वरनाथ मंदिर के प्रांगण में स्थित बहुद्देशीय सभागार में शनिवार को संत शिरोमणि गणिनाथ की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर मद्धेशिया और हलवाई समाज के लोगों ने पूजनोत्सव समारोह का आयोजन किया।
समारोह में वक्ताओं ने संत गणिनाथ के जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि बांसगांव के सासंद व केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि संत गणिनाथ ने समाज को दया करुणा और एकता का संदेश दिया।
वह सनातन के सच्चे सिपाही थे। उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए संन्यास लेकर जीवन को राष्ट्र सेवा में समर्पित कर दिया। उनके जीवन मूल्यों से समाज प्रेरणा ले रहा है।
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विधायक जयप्रकाश निषाद ने कहा कि भारत संत और संन्यासियों की तपोस्थली रहा है। यहां संतों ने समाज को संस्कृति दी। संत गणिनाथ, नाथ संप्रदाय के एकनाथ भगवान शिव के मानस पुत्र थे। उन्होंने गुरु गोरखनाथ से शिक्षा लेकर अपने समाज में क्षतिग्रस्त हो रही सनातन की संस्कृति का बीजारोपण किया। वह राष्ट्रवादी संत थे।
रामपुर कारखाना के विधायक सुरेंद्र चौरसिया ने कहा कि महापुरुषों का सम्मान ही भारत का स्वाभिमान है। संत गणिनाथ का जीवन अनुकरणीय है। कार्यक्रम के आयोजक व पूर्व चेयरमैन सुभाष चंद मद्देशिया,विजय कानू,आलोक गुप्ता आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर पूर्व चेयरमैन छट्ठे लाल निगम, अमित मोदनवाल, नंदलाल मद्धेशिया, अरुण मद्धेशिया, बल्लू,सत्यप्रकाश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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रुद्रपुर। दुग्धेश्वरनाथ मंदिर के प्रांगण में स्थित बहुद्देशीय सभागार में शनिवार को संत शिरोमणि गणिनाथ की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर मद्धेशिया और हलवाई समाज के लोगों ने पूजनोत्सव समारोह का आयोजन किया।
समारोह में वक्ताओं ने संत गणिनाथ के जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि बांसगांव के सासंद व केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि संत गणिनाथ ने समाज को दया करुणा और एकता का संदेश दिया।
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वह सनातन के सच्चे सिपाही थे। उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए संन्यास लेकर जीवन को राष्ट्र सेवा में समर्पित कर दिया। उनके जीवन मूल्यों से समाज प्रेरणा ले रहा है।
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विधायक जयप्रकाश निषाद ने कहा कि भारत संत और संन्यासियों की तपोस्थली रहा है। यहां संतों ने समाज को संस्कृति दी। संत गणिनाथ, नाथ संप्रदाय के एकनाथ भगवान शिव के मानस पुत्र थे। उन्होंने गुरु गोरखनाथ से शिक्षा लेकर अपने समाज में क्षतिग्रस्त हो रही सनातन की संस्कृति का बीजारोपण किया। वह राष्ट्रवादी संत थे।
रामपुर कारखाना के विधायक सुरेंद्र चौरसिया ने कहा कि महापुरुषों का सम्मान ही भारत का स्वाभिमान है। संत गणिनाथ का जीवन अनुकरणीय है। कार्यक्रम के आयोजक व पूर्व चेयरमैन सुभाष चंद मद्देशिया,विजय कानू,आलोक गुप्ता आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर पूर्व चेयरमैन छट्ठे लाल निगम, अमित मोदनवाल, नंदलाल मद्धेशिया, अरुण मद्धेशिया, बल्लू,सत्यप्रकाश गुप्ता आदि मौजूद रहे।