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साक्ष्यों के अभाव में ‘जिंदा’ नहीं हो सके रामअवध
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साक्ष्यों के अभाव में ‘जिंदा’ नहीं हो सके रामअवध
नायब तहसीलदार न्यायालय ने केस किया खारिज
अब उपजिलाधिकारी की कोर्ट में अपील करेंगे रामअवध
रुद्रपुर। करीब दस साल पहले जीते जी राजस्व अभिलेखों में मृत दर्ज रामअवध को अभी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। नायब तहसीलदार न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव बताकर उनके केस को खारिज कर दिया है।
पैतृक जमीन को जीते जी गवां चुके रामअवध को खुद को जिंदा साबित करने के लिए 80 साल की उम्र में जद्दोजहद करनी पड़ रही है। नायब तहसीलदार रुद्रपुर के न्यायालय में तीन साल से चल रहे मुकदमे में उन्हें निराशा हाथ लगी है। अदालत ने सबूतों का अभाव बताकर केस खारिज कर दिया है।
रामअवध के अधिवक्ता आनंद सिंह ने बताया कि नायब तहसीलदार न्यायालय से काफी दिनों के बाद सुनाए गए फैसले में सबूत, बयान और गवाही को पर्याप्त नहीं माना। मामले की निगरानी के लिए सोमवार को उपजिलाधिकारी न्यायालय में अपील की जाएगी।
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यह है मामला
डाला गांव के रहने वाले रामअवध करीब 40 साल पहले नौकरी की तलाश में ललितपुर के सैदपुर गांव में जाकर बस गए। जब गांव लौटे तो राजस्व अभिलेख में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया था। उनकी जमीन पर पट्टीदारों का नाम अंकित कर दिया गया था। अब रामअवध स्वयं को जिंदा साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नायब तहसीलदार कोर्ट में उन्होंने खुद को जिंदा साबित करने के लिए मुकदमा किया। डीएम के निर्देश पर कोर्ट में लगातार उनकी फाइल पर बहस की गई, लेकिन रामअवध कागज में जिंदा नहीं हो सके। कोर्ट से न्याय नहीं मिलने पर उन्होंने अब एसडीएम कोर्ट में फाइल प्रस्तुत करने को कहा है। अधिवक्ता ने कहा कि मजबूत साक्ष्य और गवाहों के साथ एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा। रामअवध को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
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नायब तहसीलदार न्यायालय ने केस किया खारिज
अब उपजिलाधिकारी की कोर्ट में अपील करेंगे रामअवध
रुद्रपुर। करीब दस साल पहले जीते जी राजस्व अभिलेखों में मृत दर्ज रामअवध को अभी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। नायब तहसीलदार न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव बताकर उनके केस को खारिज कर दिया है।
पैतृक जमीन को जीते जी गवां चुके रामअवध को खुद को जिंदा साबित करने के लिए 80 साल की उम्र में जद्दोजहद करनी पड़ रही है। नायब तहसीलदार रुद्रपुर के न्यायालय में तीन साल से चल रहे मुकदमे में उन्हें निराशा हाथ लगी है। अदालत ने सबूतों का अभाव बताकर केस खारिज कर दिया है।
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रामअवध के अधिवक्ता आनंद सिंह ने बताया कि नायब तहसीलदार न्यायालय से काफी दिनों के बाद सुनाए गए फैसले में सबूत, बयान और गवाही को पर्याप्त नहीं माना। मामले की निगरानी के लिए सोमवार को उपजिलाधिकारी न्यायालय में अपील की जाएगी।
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यह है मामला
डाला गांव के रहने वाले रामअवध करीब 40 साल पहले नौकरी की तलाश में ललितपुर के सैदपुर गांव में जाकर बस गए। जब गांव लौटे तो राजस्व अभिलेख में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया था। उनकी जमीन पर पट्टीदारों का नाम अंकित कर दिया गया था। अब रामअवध स्वयं को जिंदा साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नायब तहसीलदार कोर्ट में उन्होंने खुद को जिंदा साबित करने के लिए मुकदमा किया। डीएम के निर्देश पर कोर्ट में लगातार उनकी फाइल पर बहस की गई, लेकिन रामअवध कागज में जिंदा नहीं हो सके। कोर्ट से न्याय नहीं मिलने पर उन्होंने अब एसडीएम कोर्ट में फाइल प्रस्तुत करने को कहा है। अधिवक्ता ने कहा कि मजबूत साक्ष्य और गवाहों के साथ एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा। रामअवध को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।