{"_id":"65fb2b8b85e8d3aa8104ae17","slug":"problem-of-trainers-in-stadium-deoria-news-c-208-1-sgkp1008-121855-2024-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: प्रशिक्षकों की तैनाती अवधि खत्म, अब प्रशिक्षण के लिए परेशान हो रहे खिलाड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: प्रशिक्षकों की तैनाती अवधि खत्म, अब प्रशिक्षण के लिए परेशान हो रहे खिलाड़ी
Thu, 21 Mar 2024 12:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 21 Mar 2024 12:01 AM IST
विज्ञापन
...फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। स्पोर्ट्स स्टेडियम में विभिन्न खेलों के आउटसोर्सिंग से तैनात प्रशिक्षकों की तैनाती अवधि समाप्त हो गई है। इससे विभिन्न खेलों के खिलाड़ी बिना प्रशिक्षक के ही अभ्यास करने के लिए मजबूर हैं। अब नए सत्र में या लोकसभा चुनाव के बाद ही इनकी तैनाती होने की बात कही जा रही है।
रवींद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में चालू सत्र में ताइक्वांडो, खो-खो, फुटबाल, एथलेटिक्स, हॉकी, हैंडबाल के अलावा विभागीय स्तर पर एक कुश्ती एवं एक क्रिकेट प्रशिक्षक की भी तैनाती थी। खेल निदेशालय ने सत्र 2023-24 के लिए 31 जनवरी को ही शिविरों के संचालन की समय सीमा को समाप्त कर दिया। ऐसे में मैदान पर आ रहे खिलाड़ी बिना प्रशिक्षक के ही अभ्यास करने के लिए विवश हैं।
विभागीय नियमों के अनुसार, एक अप्रैल से नया खेल सत्र प्रारंभ हो जाता है। लेकिन जिस आउटसोर्सिंग एजेंसी को प्रशिक्षकों की तैनाती करनी है, उसका खेल निदेशालय के साथ तीन साल का अनुबंध इसी वर्ष पूरा हो गया है। ऐसे में नई एजेंसी के चुने जाने के बाद ही प्रशिक्षकों की तैनाती होनी है। खिलाड़ियों व खेल के जानकारों का मानना है कि इधर लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगाए जाने के बाद इन विभागीय प्रक्रियाओं पर असर पड़ेगा। ऐसे में प्रशिक्षकाें की तैनाती में जितना देरी होगी, खिलाड़ियों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।
विज्ञापन
स्पीकअप
प्रशिक्षक की देखरेख में ही खिलाड़ी निखरता है। प्रदर्शन के दौरान वह हर खिलाड़ी पर बारीक नजर रखता है और हर कमी पर उसे टोकता है। बिना प्रशिक्षक के अभ्यास करना खिलाड़ियों के आत्मविश्वास के कमजोर बनाता है।
-समृद्धि गुप्ता, ताइक्वांडो खिलाड़ी-
सत्र अभी चल रहा है। इसके बावजूद डेढ़ माह पूर्व से ही प्रशिक्षण का बंद किया जाना खिलाड़ियों के साथ अन्याय है। प्रशिक्षण प्रभावित न हो, इसके लिए जल्द से जल्द सभी खेलों के प्रशिक्षकों की तैनाती की जानी चाहिए।
.-शिवम शुक्ला, क्रिकेट खिलाड़ी
कोट
प्रशिक्षण शिविरों की समाप्ति 31 जनवरी को ही कर दी गई थी। अब नए सत्र में ही खेल निदेशालय प्रशिक्षकों के तैनाती के संबंध में कोई निर्णय लेगा।
-राज नारायण प्रसाद, क्रीड़ाधिकारी
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। स्पोर्ट्स स्टेडियम में विभिन्न खेलों के आउटसोर्सिंग से तैनात प्रशिक्षकों की तैनाती अवधि समाप्त हो गई है। इससे विभिन्न खेलों के खिलाड़ी बिना प्रशिक्षक के ही अभ्यास करने के लिए मजबूर हैं। अब नए सत्र में या लोकसभा चुनाव के बाद ही इनकी तैनाती होने की बात कही जा रही है।
रवींद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में चालू सत्र में ताइक्वांडो, खो-खो, फुटबाल, एथलेटिक्स, हॉकी, हैंडबाल के अलावा विभागीय स्तर पर एक कुश्ती एवं एक क्रिकेट प्रशिक्षक की भी तैनाती थी। खेल निदेशालय ने सत्र 2023-24 के लिए 31 जनवरी को ही शिविरों के संचालन की समय सीमा को समाप्त कर दिया। ऐसे में मैदान पर आ रहे खिलाड़ी बिना प्रशिक्षक के ही अभ्यास करने के लिए विवश हैं।
विज्ञापन
विभागीय नियमों के अनुसार, एक अप्रैल से नया खेल सत्र प्रारंभ हो जाता है। लेकिन जिस आउटसोर्सिंग एजेंसी को प्रशिक्षकों की तैनाती करनी है, उसका खेल निदेशालय के साथ तीन साल का अनुबंध इसी वर्ष पूरा हो गया है। ऐसे में नई एजेंसी के चुने जाने के बाद ही प्रशिक्षकों की तैनाती होनी है। खिलाड़ियों व खेल के जानकारों का मानना है कि इधर लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगाए जाने के बाद इन विभागीय प्रक्रियाओं पर असर पड़ेगा। ऐसे में प्रशिक्षकाें की तैनाती में जितना देरी होगी, खिलाड़ियों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।
विज्ञापन
स्पीकअप
प्रशिक्षक की देखरेख में ही खिलाड़ी निखरता है। प्रदर्शन के दौरान वह हर खिलाड़ी पर बारीक नजर रखता है और हर कमी पर उसे टोकता है। बिना प्रशिक्षक के अभ्यास करना खिलाड़ियों के आत्मविश्वास के कमजोर बनाता है।
-समृद्धि गुप्ता, ताइक्वांडो खिलाड़ी-
सत्र अभी चल रहा है। इसके बावजूद डेढ़ माह पूर्व से ही प्रशिक्षण का बंद किया जाना खिलाड़ियों के साथ अन्याय है। प्रशिक्षण प्रभावित न हो, इसके लिए जल्द से जल्द सभी खेलों के प्रशिक्षकों की तैनाती की जानी चाहिए।
.-शिवम शुक्ला, क्रिकेट खिलाड़ी
कोट
प्रशिक्षण शिविरों की समाप्ति 31 जनवरी को ही कर दी गई थी। अब नए सत्र में ही खेल निदेशालय प्रशिक्षकों के तैनाती के संबंध में कोई निर्णय लेगा।
-राज नारायण प्रसाद, क्रीड़ाधिकारी