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यूपी की गोशालाओं में जेल के बंदी करेंगे पशुओं की सेवा

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2020 11:34 PM IST
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यूपी की गोशालाओं में जेल के बंदी करेंगे पशुओं की सेवा
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देवरिया (विनोद कुमार तिवारी)। यूपी के सभी जिलों में गोशालाओं में पशुओं के सेवा की जिम्मेदारी जेल में बंद बंदियों को सौंपी जाएगी। इसकी कवायद शुरू हो गई है। इसके तहत खुले बंदी शिविरों की स्थापना होगी।
शासन में हाल ही में एक अक्तूबर को हुई बैठक के बाद 12 अक्तूबर को सभी जेलों के अधीक्षक और मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। देवरिया में पशु आश्रय स्थलों के स्थानीय स्थितियों का आंकलन करने में जेल अधीक्षक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जुट गए हैं।

प्रदेश के सभी जिलों में पशु आश्रय स्थल खोले गए हैं, लेकिन बेहतर देखरेख नहीं होने की वजह से आश्रय स्थलों में पशुओं की मौत हो रही है। इसके पीछे कर्मचारियों की कमी एवं बेहतर देखरेख नहीं होना बताया जा रहा है। कोरोना संक्रमण काल में जेल में बंद बंदियों को स्वरोजगार का अवसर मुहैया कराने के लिए खुले में बंदी शिविरों की स्थापना का निर्णय शासन ने लिया है।
एक अक्तूबर को लखनऊ में प्रमुख सचिव पशुधन विकास एवं महानिरीक्षक कारागार सहित कई अधिकारियों की मौजूदगी में एक बैठक हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि जिलों में राजकीय पशुधन एवं कृषि परिक्षत्रों के कार्य पर जेल में बंद बंदियों को लगाया जाए। जिसमें बंदी पारिश्रमिक अर्जित कर सकें और जमानत के बाद समाज की मुख्य धारा में जुड़ सकें। इसके लिए जिले के सभी जेल अधीक्षकों एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया कि वह स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन करें कि कृषि फार्म एवं गोशालाओं पर कितने बंदियों को कार्य पर लगाया जा सकता जा सकता है। ऐसे स्थानों पर बंदियों के लिए मूलभूत सुविधाएं होनी चाहिए।
जिले में हैं 18 पशु आश्रय स्थल
जिले में पिपरा चंद्रभान, रामगुलाम टोला सहित 18 पशु आश्रय स्थल हैं। जहां 1288 पशुओं को रखा गया है। जिले में पशुओं की संख्या चार लाख 80 हजार के करीब है। जेल अधीक्षक केपी त्रिपाठी ने बताया कि बंदी शिविरों की स्थापना करने को लेकर पशु आश्रय स्थलों की जानकारी जुटाई जा रही है।
इनसेट
जेल अधीक्षकों से मांगी है जानकारी
खुले बंदी शिविरों की स्थापना के लिए सभी जेल अधीक्षकों को उप महानिरीक्षक कारागार मुख्यालय वीपी त्रिपाठी ने पत्र 12 अक्तूबर को भेजा है। जिसमें उन्होंने जेल अधीक्षक एवं पशु चिकित्सा अधिकारी संयुक्त रूप से अपनी रिपोर्ट देने की बात कहते हुए इस बात की जानकारी मांगी है कि इसमें कितने बंदियों को लगाया जा सकता है। इससे बंदियों में सुधार एवं पुर्नवास होगा।

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