{"_id":"63fba856cf29c7e57507c754","slug":"police-searching-ateeque-network-deoria-news-c-7-1-67813-2023-02-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: अतीक के नेटवर्क को खंगाल रही पुलिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: अतीक के नेटवर्क को खंगाल रही पुलिस
Mon, 27 Feb 2023 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 27 Feb 2023 12:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीस माह तक माफिया ने सात नंबर बैरक को बना दिया था यातना गृह
देवरिया। माफिया अतीक अहमद जेल के सात नंबर बैरक में करीब बीस माह तक बंद रहा है। यहीं से उसने पूरे गैंग को संचालित करने का काम भी किया था। जेल में बंद होने के दौरान भी अपने गुर्गे को जरिए गुंडा टैक्स वसूल करता था। जेल में उसका राज चलता था। छापे के दौरान उसके पास से 41 मोबाइल सेट बरामद हुए थे।
उमेश पाल की हत्या के बाद जनपद की पुलिस भी सतर्क हो गई है कि अतीक का नेटवर्क जिले में भी हो सकता है। जेल में बंद रहने के दौरान उसकी पत्नी, बेटे और करीबियों को आना-जाना बराबर लगा रहता था। शहर के कुछ लोगों से उसके परिवार के संबंध हो गए थे।
माफिया अतीक अहमद 2018 से जनवरी 2020 जनवरी तक जिला में बंद था। इसी दौरान प्रापर्टी डीलिंग का काम करने वाले धूमनगंज निवासी जैद का संपत्ति को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद अतीक के इशारे पर उसके रिश्तेदार नीलू उर्फ राशिद और खालिद ने जैद का अपहरण कर लूटपाट की और अगवा कर देवरिया जेल लाया था। यहां अतीक ने सात नंबर बैरक में पिटाई की थी।
विज्ञापन
इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, गिरफ्तारी हुई। जबकि अतीक को यहां से बरेली जेल भेज दिया गया। इस घटना में शामिल दो करीबियों नीलू अतीक का मौसेरा भाई जबकि खालिद जफर बहन का दामाद है। दोनों शहर के एक मोहल्ले में अक्सर डेरा जमाए रखते थे।
सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो जेल में माफिया अतीक अहमद की दबंगई के मामले की जांच में यह बात सामने आई थी कि बैरक नंबर सात को पूरी तरह से यातना गृह में तब्दील कर दिया था। जहां वह अपने विरोधियों को बुलाकर उनकी पिटाई करता था।
20 महीने में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें अतीक अहमद ने जबरन वसूली, धमकी और अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए कई लोगों पीटा था। अतीक के जुल्म की जानकारी जेल के अधिकारियों और पूरे जेल प्रशासन को भी थी। कोई मुंह खोलने की हिम्मत नहीं करता था।
उस समय चर्चा थी कि उसके भाई, बेटे, बहू और पत्नी के आने पर शहर में रहने-खाने की व्यवस्था कुछ लोग करते थे। यहां की जेल में बाहर का भोजन पहुंच जाता था। इससे पुलिस को आशंका है कि अतीक गिरोह से संबंध रखने वाले गुर्गे जनपद में हो सकते हैं। संवाद
कोट
अतीक गिरोह पर पुलिस की नजर है। जब जेल में बंद था तो किससे उसके संबंध स्थानीय पर बन गए थे। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस मुस्तैदी के साथ अपना काम कर रही है।
-संकल्प शर्मा, एसपी
विज्ञापन
देवरिया। माफिया अतीक अहमद जेल के सात नंबर बैरक में करीब बीस माह तक बंद रहा है। यहीं से उसने पूरे गैंग को संचालित करने का काम भी किया था। जेल में बंद होने के दौरान भी अपने गुर्गे को जरिए गुंडा टैक्स वसूल करता था। जेल में उसका राज चलता था। छापे के दौरान उसके पास से 41 मोबाइल सेट बरामद हुए थे।
उमेश पाल की हत्या के बाद जनपद की पुलिस भी सतर्क हो गई है कि अतीक का नेटवर्क जिले में भी हो सकता है। जेल में बंद रहने के दौरान उसकी पत्नी, बेटे और करीबियों को आना-जाना बराबर लगा रहता था। शहर के कुछ लोगों से उसके परिवार के संबंध हो गए थे।
विज्ञापन
माफिया अतीक अहमद 2018 से जनवरी 2020 जनवरी तक जिला में बंद था। इसी दौरान प्रापर्टी डीलिंग का काम करने वाले धूमनगंज निवासी जैद का संपत्ति को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद अतीक के इशारे पर उसके रिश्तेदार नीलू उर्फ राशिद और खालिद ने जैद का अपहरण कर लूटपाट की और अगवा कर देवरिया जेल लाया था। यहां अतीक ने सात नंबर बैरक में पिटाई की थी।
विज्ञापन
इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, गिरफ्तारी हुई। जबकि अतीक को यहां से बरेली जेल भेज दिया गया। इस घटना में शामिल दो करीबियों नीलू अतीक का मौसेरा भाई जबकि खालिद जफर बहन का दामाद है। दोनों शहर के एक मोहल्ले में अक्सर डेरा जमाए रखते थे।
सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो जेल में माफिया अतीक अहमद की दबंगई के मामले की जांच में यह बात सामने आई थी कि बैरक नंबर सात को पूरी तरह से यातना गृह में तब्दील कर दिया था। जहां वह अपने विरोधियों को बुलाकर उनकी पिटाई करता था।
20 महीने में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें अतीक अहमद ने जबरन वसूली, धमकी और अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए कई लोगों पीटा था। अतीक के जुल्म की जानकारी जेल के अधिकारियों और पूरे जेल प्रशासन को भी थी। कोई मुंह खोलने की हिम्मत नहीं करता था।
उस समय चर्चा थी कि उसके भाई, बेटे, बहू और पत्नी के आने पर शहर में रहने-खाने की व्यवस्था कुछ लोग करते थे। यहां की जेल में बाहर का भोजन पहुंच जाता था। इससे पुलिस को आशंका है कि अतीक गिरोह से संबंध रखने वाले गुर्गे जनपद में हो सकते हैं। संवाद
कोट
अतीक गिरोह पर पुलिस की नजर है। जब जेल में बंद था तो किससे उसके संबंध स्थानीय पर बन गए थे। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस मुस्तैदी के साथ अपना काम कर रही है।
-संकल्प शर्मा, एसपी